जापान की फ्लाइंग कार भारत में भी भरेगी उड़ान: 2028 में मिल सकता है नया हवाई सफर, कितने लोगों ने की बुकिंग?
जापान की स्काईड्राइव भारत में अपनी फ्लाइंग कार यानी ईवीटीओएल विमान को 2028 तक व्यावसायिक रूप से उतारने की तैयारी कर रही है। शुरुआत अंग प्रत्यारोपण के लिए जरूरी अंगों की तेज आवाजाही जैसे मेडिकल लॉजिस्टिक्स से हो सकती है। कंपनी ने एअर इंडिया और सुजुकी के साथ समझौता भी किया है। कंपनी को अबतक कितने ऑर्डर मिल चुके? क्या जल्द भारत में सड़क के ऊपर हवा में सफर शुरू होगा? आइए, सबकुछ विस्तार से जानते हैं...
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विस्तार
जापान की फ्लाइंग कार बनाने वाली कंपनी स्काईड्राइव भारत में अपने इलेक्ट्रिक वर्टिकल टेक-ऑफ एंड लैंडिंग यानी ईवीटीओएल विमान को व्यावसायिक रूप से उतारने की तैयारी कर रही है। कंपनी के संस्थापक और सीईओ तोमोहिरो फुकुजावा ने कहा है कि जापान के साथ भारत में भी 2028 तक इसका व्यावसायिक इस्तेमाल शुरू करने की योजना है। शुरुआत में इसका इस्तेमाल मेडिकल लॉजिस्टिक्स में किया जाएगा। खास तौर पर अंग प्रत्यारोपण के लिए जरूरी अंगों को जल्दी एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने में इसे इस्तेमाल करने की संभावना है।
भारत में फ्लाइंग कार का इस्तेमाल कैसे होगा?
स्काईड्राइव ने एअर इंडिया और सुजुकी के साथ भारत में ईवीटीओएल के इस्तेमाल की संभावनाएं तलाशने के लिए समझौता किया है। कंपनी के अनुसार, इसका शुरुआती इस्तेमाल मेडिकल लॉजिस्टिक्स में हो सकता है। खास तौर पर अस्पतालों के बीच अंगों को पहुंचाने के लिए पहले और आखिरी चरण की आवाजाही में इसका उपयोग किया जा सकता है। इसका मतलब यह है कि अस्पताल या किसी अन्य स्थान तक जरूरी मेडिकल सामग्री और अंगों को सड़क के बजाय हवाई रास्ते से तेजी से पहुंचाने की कोशिश की जाएगी।
कंपनी ने अब तक कितनी उड़ान परीक्षण किए?
कंपनी के सीईओ के मुताबिक स्काईड्राइव अपने ईवीटीओएल के 100 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार वाले 300 से ज्यादा उड़ान परीक्षण कर चुकी है। फिलहाल विमान प्रमाणन यानी सर्टिफिकेशन की प्रक्रिया से गुजर रहा है। कंपनी की योजना अगले दो वर्षों में प्रमाणन हासिल करने की है। इसके बाद जापान के साथ भारत में भी व्यावसायिक इस्तेमाल शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है। यानी 2028 तक यह तकनीक प्रयोग से निकलकर वास्तविक सेवा का रूप ले सकती है।
क्या भारत में भी बनेगी जापान की यह फ्लाइंग कार?
शुरुआत में स्काईड्राइव अपने ईवीटीओएल का उत्पादन जापान में करेगी। कंपनी ने जापान में इसके निर्माण के लिए सुजुकी के साथ समझौता किया है। हालांकि भविष्य में भारत में भी फैक्टरी लगाने की संभावना खुली रखी गई है। कंपनी के सीईओ ने कहा कि भारत उसके लिए बड़े बाजारों में से एक है और विमान के लिए जरूरी कुछ कलपुर्जों की आपूर्ति श्रृंखला पहले से भारत में मौजूद है। भारत में उत्पादन होने पर स्थानीय मांग पूरी करने के साथ मध्य-पूर्व और अफ्रीका जैसे बाजारों में निर्यात की संभावना भी बन सकती है।
कितने लोगों ने इस फ्लाइंग कार के लिए बुकिंग की है?
स्काईड्राइव को अपने ईवीटीओएल के लिए करीब 450 प्री-ऑर्डर मिल चुके हैं। इनमें लगभग 50 प्री-ऑर्डर भारत से हैं। कंपनी का मानना है कि शुरुआत में मेडिकल लॉजिस्टिक्स सबसे अहम उपयोग हो सकता है। इसके बाद यात्री एयर टैक्सी सेवा शुरू करने की योजना है। यानी भविष्य में इस विमान का इस्तेमाल सिर्फ अस्पतालों और मेडिकल जरूरतों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आम यात्रियों को एक जगह से दूसरी जगह ले जाने के लिए भी किया जा सकता है।
एयर टैक्सी के तौर पर इसका इस्तेमाल कैसे होगा?
कंपनी के अनुसार, ईवीटीओएल का इस्तेमाल एयर टैक्सी के रूप में अलग-अलग तरह से किया जा सकता है। एक विकल्प पर्यटन का है, जिसमें लोग हवा में उड़कर किसी स्थान का नजारा देख सकते हैं और उसी जगह वापस लौट सकते हैं। दूसरा विकल्प एक स्थान से दूसरे स्थान तक यात्रा करने का होगा। इस तरह की सेवा शुरू होने पर शहरों में कम दूरी की यात्रा के लिए सड़क यातायात के साथ एक नया हवाई विकल्प सामने आ सकता है।
क्या 2028 तक भारत में हवा में उड़ती कार दिखाई देगी?
स्काईड्राइव की योजना 2028 तक जापान और भारत में ईवीटीओएल का व्यावसायिक इस्तेमाल शुरू करने की है। हालांकि इसके लिए प्रमाणन की प्रक्रिया पूरी होना जरूरी है। कंपनी ने उड़ान परीक्षणों में प्रगति की है और भारत में एअर इंडिया तथा सुजुकी के साथ संभावित इस्तेमाल पर काम शुरू कर दिया है। शुरुआत मेडिकल सेवाओं से होने की उम्मीद है, जबकि आगे एयर टैक्सी का रास्ता खुल सकता है। अगर योजना तय समय के अनुसार आगे बढ़ती है तो भारत में तेज मेडिकल परिवहन के साथ भविष्य की हवाई टैक्सी सेवा की नींव भी पड़ सकती है।