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Speed: एक्सप्रेसवे पर 120 तो हाईवे पर 100 Km/h क्यों होती है स्पीड लिमिट? जानें इसके पीछे का वैज्ञानिक कारण

Thu, 13 Aug 2026 05:54 PM IST
Amar Sharma ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Amar Sharma Updated Thu, 13 Aug 2026 05:54 PM IST
सार

एक्सप्रेसवे और हाईवे के विस्तार ने लंबी दूरी का सफर पहले के मुकाबले काफी आसान बना दिया है।  लेकिन सड़क पर चलते समय एक बात अक्सर लोगों के मन में सवाल खड़ा करती है, कि आखिर सरकार अलग-अलग सड़कों के लिए अलग स्पीड लिमिट किस आधार पर तय करती है? इसके पीछे सिर्फ नियम बनाने की बात नहीं है। यहां जानिए इसके पीछे का पूरा विज्ञान। 

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Expressway vs National Highway Speed Limit: Why Speed Limits Vary Between 100 to 120 Kmph
Highway Speed Limit - फोटो : Amar Ujala
भारत में सड़कों का नेटवर्क पिछले कुछ वर्षों में तेजी से बेहतर हुआ है। भारत में एक्सप्रेसवे और नेशनल हाईवे का जाल बिछने से सफर बेहद आसान और तेज हो गया है। अक्सर देखा गया है कि दिल्ली-मुंबई या पूर्वांचल एक्सप्रेसवे पर कारों के लिए अधिकतम स्पीड लिमिट 120 किमी प्रति घंटा होती है। जबकि किसी साधारण नेशनल हाईवे पर यह घटकर 100 या 80 किमी प्रति घंटा रह जाती है।

अक्सर चालान कटने पर चालकों के मन में सवाल उठता है कि एक ही देश में रफ्तार के नियम अलग-अलग क्यों हैं? दरअसल, सरकार या ट्रैफिक पुलिस यह सीमा मनमर्जी से तय नहीं करती। बल्कि इसके पीछे सड़क की बनावट, सिविल इंजीनियरिंग और सुरक्षा से जुड़े ठोस वैज्ञानिक कारण होते हैं।
Expressway vs National Highway Speed Limit: Why Speed Limits Vary Between 100 to 120 Kmph
Lucknow-Kanpur Expressway - फोटो : Amar Ujala

सड़क का डिजाइन स्पीड लिमिट तय करने में क्या भूमिका निभाता है?

स्पीड लिमिट तय करने का सबसे पहला और मुख्य आधार सड़क की इंजीनियरिंग और उसकी बनावट यानी डिजाइन होता है:
  • एक्सप्रेसवे (Access-Controlled Roads): इन्हें एक्सेस-कंट्रोल डिजाइन के साथ बनाया जाता है। इसका मतलब है कि एक्सप्रेसवे पर हर कहीं से कोई वाहन या पैदल यात्री प्रवेश नहीं कर सकता। इसमें केवल निश्चित एंट्री और एग्जिट पॉइंट्स होते हैं, जिससे अचानक किसी जानवर या स्थानीय वाहन के सामने आने का खतरा लगभग शून्य रहता है। इसी वजह से यहां 120 किमी प्रति घंटा जैसी हाई स्पीड की इजाजत दी जाती है।
  • नेशनल और स्टेट हाईवे: इसके उलट, साधारण राजमार्गों पर गांव, कस्बे, चौराहे और कट बने होते हैं। यहां अचानक किसी वाहन या पैदल यात्री के सड़क पर आने का जोखिम बना रहता है। इसलिए दुर्घटनाओं को रोकने के लिए गति सीमा 100 या 80 किमी प्रति घंटा तक सीमित रखी जाती है।
Expressway vs National Highway Speed Limit: Why Speed Limits Vary Between 100 to 120 Kmph
Ganga Expressway - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विजिबिलिटी और मोड़ों का विज्ञान रफ्तार को कैसे प्रभावित करता है?

सड़क बनाते समय सिविल इंजीनियर्स इस बात का गणित लगाते हैं कि उस रास्ते पर गाड़ियां कितनी सुरक्षित तरीके से मुड़ सकती हैं:
  • सड़क की बैंकिंग (Camber Angle): तेज रफ्तार के लिए सड़क का मोड़ भी महत्वपूर्ण है। सड़क बनाते समय इंजीनियर यह तय करते हैं कि किसी खास गति पर वाहन कितनी सुरक्षित तरीके से मोड़ ले सकता है। तीखे मोड़ों पर सड़क को अंदर की तरफ थोड़ा झुकाया जाता है, ताकि वाहन का संतुलन बेहतर बना रहे।
  • एक्सप्रेसवे पर मोड़ आमतौर पर ज्यादा सहज होते हैं: इन सड़कों पर मोड़ों को इस तरह डिजाइन किया जाता है कि ड्राइवर को काफी पहले से आगे का रास्ता दिखाई देता रहे। इससे ज्यादा रफ्तार पर भी वाहन को नियंत्रित करना आसान होता है।
  • हादसों का जोखिम: तीखे मोड़ पर रफ्तार घटाना जरूरी होता है। सामान्य और पहाड़ी सड़कों पर कई जगह मोड़ ज्यादा तीखे हो सकते हैं। तेज रफ्तार में अचानक ब्रेक लगाने या मोड़ काटने पर वाहन के फिसलने या पलटने का खतरा बढ़ जाता है। यही कारण है कि मोड़, पुल और ढलान जैसे हिस्सों में स्पीड लिमिट कम रखी जाती है।
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Expressway vs National Highway Speed Limit: Why Speed Limits Vary Between 100 to 120 Kmph
दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे - फोटो : अमर उजाला

क्या गाड़ियों के प्रकार के हिसाब से भी स्पीड लिमिट अलग होती है?

हां, स्पीड लिमिट का नियम सिर्फ सड़क के प्रकार पर ही नहीं, बल्कि आप किस श्रेणी का वाहन चला रहे हैं, इस पर भी निर्भर करता है:
  • वाहन के अनुसार नियम: सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के नियमानुसार, एक्सप्रेसवे पर पैसेंजर कारों के लिए स्पीड लिमिट 120 किमी प्रति घंटा है। लेकिन भारी ट्रकों और बसों के लिए इसे 80 किमी प्रति घंटा तय किया गया है।
  • ब्रेकिंग डिस्टेंस का अंतर: भारी और वजनी वाहनों को रोकने के लिए ब्रेक लगाने पर अधिक दूरी की आवश्यकता होती है।
  • लेन और ट्रैफिक: जिन सड़कों पर लेन की संख्या अधिक होती है और ट्रैफिक का दबाव कम रहता है, वहां अधिक गति की अनुमति होती है। वहीं, दो-लेन या चार-लेन वाली व्यस्त सड़कों पर दुर्घटनाएं रोकने के लिए रफ्तार नियंत्रित रखी जाती है।
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Expressway vs National Highway Speed Limit: Why Speed Limits Vary Between 100 to 120 Kmph
Yamuna Expressway - फोटो : Adobe Stock

स्पीड लिमिट के साइन बोर्ड्स का पालन करना क्यों जरूरी है?

सड़क के किनारे लगे स्पीड लिमिट के बोर्ड केवल चालान काटने का जरिया नहीं हैं, बल्कि ये सड़क की क्षमता और मानवीय सुरक्षा के वैज्ञानिक पैमाने हैं। हाई-स्पीड में अचानक ब्रेक लगाने से गाड़ियां एक्वाप्लेनिंग (Aquaplaning) या असंतुलन का शिकार हो सकती हैं।

इसलिए अगली बार जब आप हाईवे या एक्सप्रेसवे पर सफर करें, तो स्पीड लिमिट के बोर्ड को महज एक नियम न समझें। यह उस सड़क की क्षमता और आपकी सुरक्षा को ध्यान में रखकर तय की गई सीमा है। सड़क की स्थिति और निर्धारित गति सीमा के मुताबिक वाहन चलाना ही सुरक्षित सफर का सबसे बेहतर तरीका है।
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