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Meta Layoffs 2026: AI बनता जा रहा टेक इंडस्ट्री का दुश्मन, बंपर मुनाफे के बावजूद मेटा निकालेगी 8 हजार कर्मचारी

टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Suyash Pandey Updated Sat, 18 Apr 2026 01:21 PM IST
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सार

Meta Layoffs 2026: रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, मेटा 20 मई को अपने वर्कफोर्स का एक बड़ा हिस्सा निकालने जा रही है। इसमें करीब 8 हजार कर्मचारियों की नौकरी जाना तय है। यह ग्लोबल वर्कफोर्स का 10% है। हैरानी की बात यह है कि कंपनी इस वक्त भारी मुनाफे में है, फिर भी छंटनी हो रही है। कंपनी ने यह फैसला आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की वजह से लिया है। मार्क जुकरबर्ग अपनी कंपनी के कामकाज को पूरी तरह से एआई पर शिफ्ट कर रहे हैं, ताकि कम लोगों के साथ काम हो सके।

Meta plans massive layoffs: 8,000 jobs cut as ai reshapes workforce
मेटा करने जा रही है अपनी 10% वर्कफोर्स की छंटनी (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : मेटा
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विस्तार

फेसबुक और इंस्टाग्राम की पैरेंट कंपनी मेटा एक बार फिर बड़े पैमाने पर छंटनी की तैयारी कर रही है। रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, 20 मई को कंपनी इस बड़ी छंटनी का पहला राउंड शुरू करने जा रही है। इसमें करीब 8 हजार कर्मचारियों को बाहर का रास्ता दिखाया जाएगा, जो कंपनी की कुल ग्लोबल वर्कफोर्स का लगभग 10% है। साथ ही आने वाले समय में और भी कर्मचारियों को निकाला जा सकता है। कंपनी क्यों ले रही है इतना बड़ा फैसला? आइए जानते हैं:

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क्या है कंपनी का प्लान?

इस छंटनी के पहले राउंड में मेटा अपने ग्लोबल वर्कफोर्स का लगभग 10% हिस्सा कम करने जा रही है। इसका सीधा असर करीब 8 हजार कर्मचारियों पर पड़ेगा। आपको बता दें कि 31 दिसंबर तक कंपनी में कुल 79 हजार कर्मचारी काम कर रहे थे। हालांकि, नौकरियों में कटौती का यह सिलसिला यहीं नहीं रुकेगा। सूत्रों के मुताबिक, साल के दूसरे हिस्से में भी छंटनी का दौर जारी रहेगा। 

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आगे और कितने लोगों को बाहर का रास्ता दिखाया जाएगा, ये अभी तय नहीं है। यह पूरी तरह से इस बात पर निर्भर करेगा कि कंपनी के कामकाज में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) कितनी तेजी से अपनी जगह बनाता है और इंसानी काम को संभालता है। गौरतलब है कि पिछले महीने ही रॉयटर्स की एक रिपोर्ट में मेटा के जरिए 20% से ज्यादा स्टाफ को निकाले जाने की बात सामने आई थी। लेकिन तब कंपनी ने आधिकारिक तौर पर इस पर कुछ भी टिप्पणी करने से इनकार कर दिया था।

एआई बन रहा है नौकरियों का दुश्मन?

मेटा के अंदर चल रही इस हलचल को देखकर यह सवाल उठना लाजमी है। दरअसल, कंपनी के सीईओ मार्क जुकरबर्ग इस समय एआई तकनीक पर अरबों डॉलर पानी की तरह बहा रहे हैं। उनका सीधा लक्ष्य कंपनी के काम करने के तरीके को पूरी तरह से एआई के इर्द-गिर्द ढालना है।


मैनेजमेंट का फोकस अब इस बात पर है कि कंपनी के स्तर कम किए जाएं और एआई की मदद से काम की रफ्तार को कई गुना बढ़ाया जाए। इसके लिए मेटा के भीतर कई बड़े ढांचागत बदलाव किए जा रहे हैं:

खुद कोडिंग करने वाले एआई एजेंट्स: 'रिएलिटी लैब्स' के कई इंजीनियरों को अब एक नए 'एप्लाइड एआई' ग्रुप में भेजा जा रहा है। इस टीम का मुख्य काम ऐसे स्मार्ट एआई एजेंट तैयार करना है जो खुद कोड लिख सकें और मुश्किल से मुश्किल काम बिना किसी इंसानी मदद के अपने आप निपटा सकें।

नई यूनिट्स में ट्रांसफर: छंटनी से पहले कंपनी अपने स्ट्रक्चर को व्यवस्थित कर रही है। इसी कड़ी में कुछ कर्मचारियों को हाल ही में बनाई गई नई यूनिट 'मेटा स्मॉल बिजनेस' में भी शिफ्ट किया जा रहा है।

कंपनी बंपर मुनाफे में है तो फिर छंटनी क्यों?

अगर आपको याद हो तो 2022 के अंत और 2023 की शुरुआत में मेटा ने अपना 'ईयर ऑफ एफिशिएंसी' अभियान चलाया था। उस दौरान कंपनी ने 21 हजार कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया था। तब इसके पीछे की मुख्य वजहें कोविड के दौरान की गई अंधाधुंध हायरिंग और शेयर बाजार में कंपनी का लगातार गिरता ग्राफ था।

लेकिन, इस बार की कहानी बिल्कुल अलग है। मेटा इस वक्त किसी आर्थिक संकट में नहीं है, बल्कि वित्तीय रूप से बेहद मजबूत स्थिति में है। आंकड़ों पर नजर डालें तो पिछले साल एआई इंफ्रास्ट्रक्चर पर बेतहाशा पैसा खर्च करने के बावजूद, कंपनी ने 200 अरब डॉलर से ज्यादा की कमाई और 60 अरब डॉलर का भारी-भरकम मुनाफा दर्ज किया था। इसके अलावा, इस साल की शुरुआत से ही मेटा के शेयरों में भी लगभग 3.68% की तेजी देखने को मिली है।

साफ शब्दों में कहें तो इस बार की छंटनी कंपनी के घाटे की भरपाई या पैसे बचाने के लिए नहीं हो रही है। बल्कि, इसका सीधा मकसद एआई के जरिए कामकाज को पूरी तरह से ऑटोमैटिक और 'स्मार्ट' बनाना है। ताकि भविष्य में कम इंसानों के साथ कंपनी का काम ज्यादा तेजी से हो सके।

पूरी टेक इंडस्ट्री में एआई के नाम पर जा रही हैं नौकरियां

यह सिर्फ मेटा की कहानी नहीं है। अमेरिका से लेकर दुनियाभर की कई बड़ी टेक कंपनियां अब एआई का हवाला देकर बड़े पैमाने पर छंटनी की राह पर चल पड़ी हैं:

अमेजन: ई-कॉमर्स दिग्गज अमेजन ने हाल के महीनों में अपने कॉर्पोरेट सेक्टर से करीब 30 हजार कर्मचारियों को बाहर का रास्ता दिखा दिया है। यह उनके कुल 'व्हाइट-कॉलर' वर्कफोर्स का लगभग 10% हिस्सा है।

ब्लॉक: मशहूर फिनटेक कंपनी ब्लॉक ने तो इसी साल फरवरी में अपने लगभग आधे स्टाफ की ही छंटनी कर दी।

क्या कहते हैं छंटनी के आंकड़े?

टेक सेक्टर में नौकरियों की कटौती पर नजर रखने वाली वेबसाइट Layoffs.fyi के आंकड़े स्थिति की गंभीरता को बयां करते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, इस साल अब तक 73,212 टेक कर्मचारी अपनी नौकरी गंवा चुके हैं। जबकि पूरे 2024 में यह आंकड़ा 1 लाख 53 हजार के करीब था।

इन सभी टेक कंपनियों का तर्क मेटा से बिल्कुल मिलता-जुलता है। उनका कहना है कि एआई की मदद से काम में एफिशिएंसी और तेजी आ रही है और चीजों को ऑटोमेट किया जा रहा है। इसलिए, कंपनी चलाने के लिए अब पहले जितने इंसानों की जरूरत नहीं रह गई है।

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