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Hindi News ›   Automobiles News ›   NHAI Revised Toll Collection Formula: How New Rules Will Make Highway Travel Cheaper

NHAI का नया टोल नियम समझिए: कैसे बदलेगी टोल गणना और क्यों सस्ता हो सकता है आपका हाईवे सफर?

Sat, 25 Jul 2026 08:28 PM IST
Amar Sharma ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Amar Sharma Updated Sat, 25 Jul 2026 08:28 PM IST
सार

राष्ट्रीय राजमार्गों पर यात्रा करने वाले वाहन चालकों के लिए एक बड़ी राहत भरी खबर आई है। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने पने सभी क्षेत्रीय कार्यालयों को नए संशोधित नियमों के तहत टोल अधिसूचनाओं और दरों के संशोधन पर काम शुरू करने का निर्देश दे दिया है। जानें क्या है पूरा नियम।

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NHAI Revised Toll Collection Formula: How New Rules Will Make Highway Travel Cheaper
Highway Travel Will Be Cheaper - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

अगर आप अक्सर राष्ट्रीय राजमार्ग (नेशनल हाईवे) पर सफर करते हैं और रास्ते में पुल, सुरंग, फ्लाईओवर या एलिवेटेड रोड वाले हिस्सों से गुजरते हैं, तो आने वाले समय में आपका टोल खर्च कम हो सकता है। दरअसल, भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने अपने सभी क्षेत्रीय कार्यालयों को निर्देश जारी कर दिए हैं कि वे संशोधित टोल नियमों के तहत टोल नोटिफिकेशन और शुल्क संशोधन की प्रक्रिया शुरू करें।

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यह फैसला 1 जुलाई को सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय द्वारा राष्ट्रीय राजमार्ग शुल्क (दरों का निर्धारण और संग्रहण) नियम, 2008 में किए गए संशोधन के बाद लिया गया है। नए नियम के तहत अब उन हाईवे सेक्शनों का टोल अलग तरीके से तय किया जाएगा, जिनमें एक या एक से अधिक स्वतंत्र पुल, सुरंग, फ्लाईओवर या एलिवेटेड हाईवे शामिल हैं। 

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आखिर NHAI ने टोल कैलकुलेशन का नियम क्यों बदला?

पहले ऐसे हाईवे सेक्शन, जहां पुल, सुरंग या एलिवेटेड रोड अधिक होती थी, वहां टोल की गणना मुख्य रूप से इन संरचनाओं की लंबाई के 10 गुना के आधार पर की जाती थी। ऐसा इसलिए किया गया था क्योंकि इनका निर्माण और रखरखाव सामान्य सड़क की तुलना में ज्यादा महंगा होता है।

अब नए नियम में एक अधिकतम सीमा तय कर दी गई है, ताकि टोल की गणना हमेशा कम दूरी वाले फॉर्मूले के आधार पर हो और यात्रियों पर अतिरिक्त बोझ न पड़े।


नया टोल कैलकुलेशन फॉर्मूला क्या है?

संशोधित नियम के अनुसार अब टोल योग्य दूरी निकालने के लिए दो अलग-अलग गणनाएं की जाएंगी और जिससे कम दूरी निकलेगी, उसी के आधार पर टोल वसूला जाएगा।

नया फॉर्मूला

फॉर्मूला-1

संरचनाओं (ब्रिज, टनल, फ्लाईओवर, एलिवेटेड हाईवे) की कुल लंबाई × 10 + बाकी सामान्य सड़क की लंबाई

इसका मतलब क्या है?

अगर किसी हाईवे का बड़ा हिस्सा पुल, सुरंग या एलिवेटेड रोड है, तो उनकी लंबाई को 10 गुना माना जाएगा। और फिर सामान्य सड़क की लंबाई उसमें जोड़ दी जाएगी।
 

फॉर्मूला-2

पूरे हाईवे सेक्शन की कुल लंबाई × 5

इसका मतलब क्या है?

इस फॉर्मूले में पूरे हाईवे की कुल दूरी को पांच गुना माना जाएगा, चाहे उसमें कितनी भी संरचनाएं क्यों न हों।

जिस फॉर्मूले से कम दूरी निकलेगी, उसी पर टोल तय होगा।

इसका फायदा क्या होगा?

यात्रियों से हमेशा कम टोल योग्य दूरी के आधार पर शुल्क लिया जाएगा। यानी पहले की तुलना में कई मामलों में टोल कम हो सकता है। 

क्या हर पुल और फ्लाईओवर इस नियम में शामिल होगा?

नहीं।

नए नियम के अनुसार 60 मीटर या उससे कम लंबाई वाले पुल, सुरंग, फ्लाईओवर या एलिवेटेड स्ट्रक्चर को इस गणना में अलग संरचना नहीं माना जाएगा।

इसका क्या मतलब है?

  • छोटे स्ट्रक्चर के कारण टोल कैलकुलेशन प्रभावित नहीं होगा।

  • यह नियम केवल बड़े और स्वतंत्र स्ट्रक्चर वाले हाईवे सेक्शन पर लागू होगा।


उदाहरण से समझिए नया टोल कैलकुलेशन कैसे काम करेगा?

सरकार की गजट अधिसूचना में इसे आसान उदाहरणों के जरिए समझाया गया है।

उदाहरण-1

मान लीजिए किसी हाईवे की कुल लंबाई 40 किलोमीटर है।

जिसमें-

  • 30 किमी पुल, टनल या एलिवेटेड रोड

  • 10 किमी सामान्य सड़क

अब दोनों फॉर्मूले लागू होंगे।

पहला फॉर्मूला

  • 30 × 10 = 300 किमी

  • +10 किमी सामान्य सड़क

  • कुल = 310 किमी

दूसरा फॉर्मूला

  • 40 × 5 = 200 किमी

कौन-सा लागू होगा?

क्योंकि 200 किमी, 310 किमी से कम है, इसलिए टोल की गणना 200 किमी के आधार पर होगी।

इसका मतलब क्या है?

पहले जहां टोल 310 किमी की गणना के आधार पर बन सकता था, अब उसी सेक्शन पर 200 किमी की गणना लागू होगी। इससे टोल शुल्क कम होने की संभावना है। 

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उदाहरण-2

अब मान लीजिए किसी 40 किमी हाईवे में-

  • 10 किमी स्ट्रक्चर

  • 30 किमी सामान्य सड़क

पहला फॉर्मूला

  • 10 × 10 = 100 किमी

  • +30 किमी

  • कुल = 130 किमी

दूसरा फॉर्मूला

  • 40 × 5 = 200 किमी

कौन-सा लागू होगा?

यहां 130 किमी कम है, इसलिए टोल की गणना 130 किमी के आधार पर होगी।

इसका मतलब क्या है?

इस स्थिति में भी कम दूरी वाला फॉर्मूला अपनाया जाएगा, जिससे टोल शुल्क तय होगा।

पूर्व NHAI अधिकारी ने नए नियम पर क्या कहा?

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, ITS इंडिया फोरम के वर्तमान अध्यक्ष और NHAI के पूर्व अधिकारी अखिलेश श्रीवास्तव का कहना है कि,

पहले ऐसे हाईवे, जहां अधिकांश हिस्सा पुल या सुरंग का होता था, वहां टोल की गणना संरचना की लंबाई के 10 गुना तक की जा सकती थी और इसकी कोई अधिकतम सीमा नहीं थी।

अब नए नियम में एक तय सीमा लागू कर दी गई है, जिससे हमेशा वही गणना अपनाई जाएगी जिससे टोल योग्य दूरी कम निकले।

इसका क्या असर होगा?

इस बदलाव से टोल कैलकुलेशन अधिक संतुलित होगा और कुछ हाईवे सेक्शनों पर यात्रियों को राहत मिल सकती है।


नए नियम कब से लागू होंगे?

संशोधित नियम सभी टोल प्लाजा पर एक साथ लागू नहीं होंगे। इन्हें अलग-अलग परिस्थितियों में लागू किया जाएगा।

सार्वजनिक फंड से बने टोल प्लाजा

  • अगली निर्धारित यूजर फीस रिवीजन से नया फॉर्मूला लागू होगा।

इसका मतलब क्या है?

मौजूदा सरकारी टोल प्लाजा पर अगली टोल दरों की समीक्षा के समय नया नियम लागू किया जाएगा।


कंसेशनायर द्वारा संचालित टोल प्लाजा

  • कंसेशन अवधि समाप्त होने के बाद, या

  • परियोजना वापस प्राधिकरण को सौंपे जाने के बाद नया फॉर्मूला लागू होगा।

इसका मतलब क्या है?

जो टोल प्लाजा निजी कंपनियों के संचालन में हैं, वहां नया नियम तुरंत लागू नहीं होगा।


नए शुरू होने वाले टोल प्लाजा

  • जिस दिन से टोल वसूली शुरू होगी, उसी दिन से नया फॉर्मूला लागू रहेगा।

इसका मतलब क्या है?

भविष्य में शुरू होने वाले नए टोल प्लाजा शुरुआत से ही संशोधित नियमों के अनुसार टोल वसूलेंगे।

एक नजर में नए NHAI टोल नियम की बड़ी बातें

  • NHAI ने संशोधित टोल नियमों के तहत नई प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश जारी किए हैं।

    • इसके तहत फील्ड कार्यालय नए नियमों के अनुसार टोल नोटिफिकेशन और शुल्क संशोधन की प्रक्रिया पूरी करेंगे।

  • अब टोल की गणना दो अलग-अलग फॉर्मूलों से होगी।

    • दोनों में से जिस गणना से कम टोल योग्य दूरी निकलेगी, उसी के आधार पर शुल्क तय किया जाएगा।

  • 60 मीटर या उससे छोटे स्ट्रक्चर अलग से नहीं गिने जाएंगे।

    • छोटे पुल या फ्लाईओवर टोल कैलकुलेशन को प्रभावित नहीं करेंगे।

  • पहले की तरह केवल 10 गुना लंबाई वाला नियम लागू नहीं रहेगा।

    • अब अधिकतम सीमा तय होने से कई मामलों में टोल कम होने की संभावना है।

  • नियम अलग-अलग टोल प्लाजा पर उनकी श्रेणी के अनुसार लागू होंगे।

    • सरकारी, कंसेशनायर संचालित और नए टोल प्लाजा के लिए लागू होने का समय अलग-अलग निर्धारित किया गया है।

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