EV: ईवी को कैसे मिले बढ़ावा? संसदीय समिति ने की इलेक्ट्रिक कारों पर सब्सिडी देने की सिफारिश
डिपार्टमेंट-रिलेटेड पार्लियामेंट्री स्टैंडिंग कमिटी ऑन इंडस्ट्री (राज्यसभा) ने इलेक्ट्रिक गाड़ियों (EV) और इंटरनल कम्बशन इंजन (ICE) गाड़ियों के बीच शुरुआती कीमत के अंतर को कम करने के लिए इलेक्ट्रिक फोर-व्हीलर्स के लिए कंज्यूमर सब्सिडी शुरू करने की सिफारिश की है।
विस्तार
संसदीय स्थायी समिति ने इलेक्ट्रिक कारों को बढ़ावा देने के लिए उपभोक्ताओं को सब्सिडी देने की सिफारिश की है। समिति का मानना है कि इलेक्ट्रिक वाहनों और पारंपरिक पेट्रोल-डीजल वाहनों के बीच शुरुआती कीमत का अंतर अभी भी काफी ज्यादा है। जिससे आम खरीदार इलेक्ट्रिक कार खरीदने से हिचकते हैं।
राज्यसभा की उद्योग संबंधी संसदीय स्थायी समिति, जिसकी अध्यक्षता तिरुचि शिवा कर रहे हैं, ने सुझाव दिया कि इस अंतर को कम करने के लिए उपभोक्ता सब्सिडी दी जानी चाहिए।
समिति के अनुसार अगर उपभोक्ता आधारित प्रोत्साहन नहीं दिए गए तो चार-पहिया इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर बदलाव विशेष रूप से मध्यम वर्ग और निजी खरीदारों के बीच धीमा रह सकता है।
क्या PM E-DRIVE योजना में इलेक्ट्रिक कारें शामिल नहीं हैं?
समिति ने चिंता जताई कि PM E-DRIVE Scheme (पीएम ई-ड्राइव योजना) के तहत इलेक्ट्रिक चार-पहिया वाहनों को शामिल नहीं किया गया है।
यह योजना मुख्य रूप से इलेक्ट्रिक दो-पहिया और तीन-पहिया वाहनों पर केंद्रित रही है। जबकि इलेक्ट्रिक कारों की शुरुआती कीमत अधिक होने के कारण उन्हें अतिरिक्त प्रोत्साहन की जरूरत है।समिति ने सुझाव दिया कि भारी उद्योग मंत्रालय को इलेक्ट्रिक कारों के लिए समयबद्ध और लक्षित प्रोत्साहन योजना शुरू करनी चाहिए।
इलेक्ट्रिक कारों के लिए किस तरह की सब्सिडी का सुझाव दिया गया?
समिति ने कहा कि प्रोत्साहन को संतुलित तरीके से डिजाइन किया जाना चाहिए ताकि सरकारी खर्च भी नियंत्रित रहे और उपभोक्ताओं को वास्तविक लाभ मिल सके।
इसके लिए सब्सिडी को निम्न आधारों से जोड़ा जा सकता है:
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बैटरी क्षमता
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वाहन की ऊर्जा दक्षता
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वाहन की अधिकतम कीमत की सीमा
इससे इलेक्ट्रिक और पारंपरिक वाहनों की कीमतों के बीच अंतर कम किया जा सकता है।
क्या PM E-DRIVE योजना का लाभ कुछ ही सेगमेंट तक सीमित है?
समिति ने यह भी बताया कि लगभग 10,900 करोड़ रुपये की इस योजना का लाभ मुख्य रूप से इलेक्ट्रिक दो-पहिया और तीन-पहिया वाहनों तक ही सीमित रहा है।
इसके विपरीत कई अन्य सेगमेंट में प्रगति बेहद धीमी रही है:
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इलेक्ट्रिक ट्रक - कोई उपलब्धि नहीं
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इलेक्ट्रिक बस - कोई उपलब्धि नहीं
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ई-रिक्शा / ई-कार्ट - लक्ष्य के मुकाबले बहुत कम यूनिट
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इलेक्ट्रिक एम्बुलेंस - शून्य प्रगति
क्या इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों के लिए प्रोत्साहन बढ़ाने की सलाह दी गई?
समिति ने सुझाव दिया कि इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों के लिए मांग प्रोत्साहन को 31 मार्च 2028 तक जारी रखा जाना चाहिए।
हालांकि इसे धीरे-धीरे कम करने की व्यवस्था भी होनी चाहिए, ताकि अचानक नीति बदलाव से बाजार पर नकारात्मक असर न पड़े।
क्या इलेक्ट्रिक कार निर्माण योजना की समीक्षा की जरूरत है?
समिति ने भारत में इलेक्ट्रिक पैसेंजर कारों के मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने की योजना की व्यापक समीक्षा करने की भी सिफारिश की है।
यह योजना विदेशी कंपनियों, खासकर एलन मस्क की कंपनी टेस्ला को भारत में निवेश के लिए आकर्षित करने के उद्देश्य से बनाई गई थी। लेकिन अभी तक इसमें खास रुचि नहीं दिखाई गई है।
समिति का मानना है कि निवेश सीमा, स्थानीय उत्पादन की शर्तें और प्रोत्साहन संरचना में बदलाव कर इसे अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है।
बैटरी निर्माण योजना की प्रगति क्यों धीमी है?
समिति ने एडवांस्ड केमिस्ट्री सेल बैटरी स्टोरेज के लिए PLI स्कीम की धीमी प्रगति पर भी चिंता जताई।
इस योजना का लक्ष्य 50 GWh बैटरी निर्माण क्षमता विकसित करना है। लेकिन अब तक केवल 40 GWh क्षमता ही आवंटित की गई है और सिर्फ 1 GWh उत्पादन शुरू हो पाया है।
योग्यता शर्तें पूरी न होने के कारण अभी तक किसी कंपनी को प्रोत्साहन राशि नहीं दी गई है।
समिति ने तीन महीने के भीतर विस्तृत समीक्षा रिपोर्ट पेश करने की सिफारिश की है।
क्या भारत की आयात निर्भरता भी चिंता का विषय है?
संसदीय समिति ने यह भी कहा कि इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए जरूरी कई महत्वपूर्ण खनिज और दुर्लभ धातुएं भारत में पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध नहीं हैं और उनका आयात करना पड़ता है।
वैश्विक स्तर पर इन संसाधनों की आपूर्ति में चीन का बड़ा हिस्सा है। हाल के समय में निर्यात प्रतिबंधों के कारण सप्लाई चेन में बाधाएं भी देखी गई हैं।
समिति ने जोर दिया कि बैटरी इलेक्ट्रिक वाहन की लागत का सबसे बड़ा हिस्सा होती है, इसलिए घरेलू बैटरी निर्माण क्षमता विकसित करना जरूरी है।
इलेक्ट्रिक वाहनों के विस्तार के लिए क्या जरूरी है?
समिति के अनुसार इलेक्ट्रिक कारों को बढ़ावा देने के लिए उपभोक्ता प्रोत्साहन, घरेलू बैटरी निर्माण और नीतिगत सुधार बेहद जरूरी हैं।
अगर इन क्षेत्रों में तेजी से कदम उठाए जाएं तो भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों की कीमतें कम हो सकती हैं। ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी और वैश्विक प्रतिस्पर्धा में भी देश की स्थिति बेहतर हो सकती है।
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