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CAFE III: छोटी कारों की परिभाषा बदलने पर बहस क्यों हो गई तेज? क्या यात्री कारों की सुरक्षा से हो रहा है समझौता
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अमर शर्मा
Updated Wed, 14 Jan 2026 04:00 PM IST
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सार
जैसे-जैसे छोटी कारों को फिर से परिभाषित करने पर बहस तेज हो रही है, टाटा मोटर्स ने चेतावनी दी है कि गाड़ी के वजन के आधार पर परिभाषा बदलने का कोई भी कदम अनजाने में भारतीय सड़कों पर असुरक्षित कारों को बढ़ावा दे सकता है। जानें आखिर क्या है वह खतरा...
Tata Punch Crash Test
- फोटो : Tata Motors
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विस्तार
भारत में छोटी कारों की परिभाषा को लेकर चल रही बहस के बीच Tata Motors (टाटा मोटर्स) ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि अगर छोटी कारों को वाहन के वजन के आधार पर परिभाषित किया गया, तो इससे सड़कों पर कमजोर और असुरक्षित कारों को बढ़ावा मिल सकता है। यह चेतावनी ऐसे समय पर आई है जब ब्यूरो ऑफ एनर्जी एफिशिएंसी (बीईई) द्वारा प्रस्तावित CAFE III (कॉरपोरेट एवरेज फ्यूल एफिशिएंसी) के ड्राफ्ट नियमों पर ऑटो इंडस्ट्री के भीतर गहरे मतभेद सामने आ चुके हैं।
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टाटा पंच की 5-स्टार रेटिंग इस बहस में क्यों अहम है?
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- टाटा मोटर्स का बयान उस दिन आया, जब कंपनी की कॉम्पैक्ट एसयूवी टाटा पंच ने Bharat NCAP (भारत एनसीएपी) के तहत सेगमेंट में पहली बार 5-स्टार क्रैश टेस्ट रेटिंग हासिल की।
- टाटा पंच का अनलेडन वजन करीब 1,000 से 1,050 किलोग्राम है।
- कंपनी का तर्क है कि बेहतर सेफ्टी स्ट्रक्चर आमतौर पर ज्यादा मजबूत बॉडी और वजन के साथ आता है।
- इस उपलब्धि को टाटा मोटर्स अपने उस पक्ष के उदाहरण के तौर पर पेश कर रही है, जिसमें सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाती है।
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CAFE III के प्रस्तावित नियम क्या कहते हैं?
अप्रैल 2027 से लागू होने वाले CAFE III ड्राफ्ट के तहत:
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अप्रैल 2027 से लागू होने वाले CAFE III ड्राफ्ट के तहत:
- पेट्रोल कारें जिनका वजन 909 किलोग्राम तक हो
- इंजन क्षमता 1.2 लीटर से ज्यादा न हो
- लंबाई 4 मीटर तक सीमित हो
- ऐसी कारों को अतिरिक्त रेगुलेटरी छूट देने का प्रस्ताव है।
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किन कंपनियों ने इन नियमों का समर्थन और विरोध किया है?
इस मुद्दे पर इंडस्ट्री साफ तौर पर बंटी हुई है।
समर्थन करने वाली कंपनियां:
विरोध करने वाली कंपनियां:
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इस मुद्दे पर इंडस्ट्री साफ तौर पर बंटी हुई है।
समर्थन करने वाली कंपनियां:
- मारुति सुजुकी
- होंडा
- रेनो
विरोध करने वाली कंपनियां:
- टाटा मोटर्स
- महिंद्रा एंड महिंद्रा
- ह्यूंदै
- जेएसडब्ल्यू एमजी मोटर
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टाटा मोटर्स ने सुरक्षा को लेकर क्या साफ कहा है?
टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स के एमडी शैलेश चंद्रा ने साफ शब्दों में कहा कि:
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टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स के एमडी शैलेश चंद्रा ने साफ शब्दों में कहा कि:
- छोटी और कॉम्पैक्ट कारों में सुरक्षा और भी ज्यादा जरूरी है
- क्योंकि इनमें पूरा परिवार सफर करता है
- कंपनी बिक्री या मार्केट शेयर बढ़ाने के लिए सुरक्षा से समझौता नहीं करेगी
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मारुति सुजुकी का रुख अलग क्यों है?
मार्केट लीडर मारुति सुजुकी वजन-आधारित परिभाषा की सबसे बड़ी समर्थक मानी जा रही है।
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मार्केट लीडर मारुति सुजुकी वजन-आधारित परिभाषा की सबसे बड़ी समर्थक मानी जा रही है।
- कंपनी के कई मॉडल 909 किलोग्राम से कम वजन वाले हैं
- इनमें WagonR, Celerio, Alto और Ignis शामिल हैं
- इसके टॉप-सेलिंग मॉडल Baleno और Swift भी इस सीमा के बेहद करीब हैं
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इंडस्ट्री के वरिष्ठ अधिकारी क्या चेतावनी दे रहे हैं?
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, भारत की चार सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनियों में से एक के वरिष्ठ अधिकारी ने चेतावनी दै हि कि CAFE III सिर्फ एक रेगुलेटरी नियम नहीं है। उन्होंने कहा-
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, भारत की चार सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनियों में से एक के वरिष्ठ अधिकारी ने चेतावनी दै हि कि CAFE III सिर्फ एक रेगुलेटरी नियम नहीं है। उन्होंने कहा-
- यह तय करेगा कि इंडस्ट्री सही दिशा में जाएगी या नहीं
- वाहन का वजन स्थिर नहीं रह सकता
- समय के साथ नए सेफ्टी फीचर्स और टेक्नोलॉजी जुड़ती रहती हैं
- इसलिए वजन को आधार बनाना भविष्य की जरूरतों के खिलाफ हो सकता है।
सरकार के सामने अब क्या चुनौती है?
इंडस्ट्री की शीर्ष संस्था सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफेक्चर्रस (SIAM) ने भी बीईई को सूचित किया है कि उसके सदस्यों के बीच वजन-आधारित CAFE III नियमों पर कोई सर्वसम्मति नहीं है।
अब सरकार के सामने यह फैसला लेने की चुनौती है कि:
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इंडस्ट्री की शीर्ष संस्था सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफेक्चर्रस (SIAM) ने भी बीईई को सूचित किया है कि उसके सदस्यों के बीच वजन-आधारित CAFE III नियमों पर कोई सर्वसम्मति नहीं है।
अब सरकार के सामने यह फैसला लेने की चुनौती है कि:
- वह फ्यूल एफिशिएंसी को प्राथमिकता दे
- या फिर सुरक्षा मानकों को कमजोर किए बिना संतुलन बनाए
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