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Bihar: BAU में करोड़ों के खेल का आरोप! CAG रिपोर्ट के बाद राजभवन तक मचा हड़कंप, FIR और जांच की उठी मांग
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भागलपुर
Published by: भागलपुर ब्यूरो
Updated Thu, 28 May 2026 12:54 PM IST
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सार
Bihar: बिहार कृषि विश्वविद्यालय (BAU), सबौर में CAG रिपोर्ट के आधार पर कथित वित्तीय अनियमितताओं और प्रशासनिक गड़बड़ियों को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। मामले में राज्यपाल, निगरानी विभाग और EOU तक शिकायत पहुंची है तथा दोषी अधिकारियों के खिलाफ FIR और उच्चस्तरीय जांच की मांग की गई है।
BAU विश्वविद्यालय
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
बिहार कृषि विश्वविद्यालय (BAU), सबौर एक बार फिर गंभीर विवादों के केंद्र में आ गया है। नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट में कथित वित्तीय अनियमितताओं और प्रशासनिक गड़बड़ियों को लेकर अब मामला राजभवन से लेकर निगरानी विभाग तथा आर्थिक अपराध इकाई (EOU) तक पहुंच गया है। विश्वविद्यालय प्रशासन पर सरकारी राशि के दुरुपयोग, वित्तीय अनुशासन की अनदेखी तथा नियम विरुद्ध भुगतान जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
राज्यपाल को भेजा गया विस्तृत आवेदन
इस संबंध में “डायनामिक इंडिया ग्रुप (ट्रस्ट), बांका” की ओर से राज्यपाल सह कुलाधिपति को एक विस्तृत आवेदन भेजते हुए उच्चस्तरीय जांच, प्राथमिकी दर्ज करने तथा दोषी अधिकारियों के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई की मांग की गई है। शिकायत की प्रतिलिपि राज्य और केंद्र सरकार के कई महत्वपूर्ण विभागों एवं एजेंसियों को भी भेजी गई है, जिससे विश्वविद्यालय प्रशासन में हलचल तेज हो गई है।
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CAG रिपोर्ट के हवाले से गंभीर आरोप
शिकायत में कहा गया है कि बिहार कृषि विश्वविद्यालय में वर्षों से वित्तीय नियमों की अनदेखी की जाती रही है। आवेदन में नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की ऑडिट रिपोर्ट का हवाला देते हुए दावा किया गया है कि रिपोर्ट में कई ऐसे तथ्य सामने आए हैं, जो विश्वविद्यालय प्रशासन की कार्यप्रणाली और वित्तीय पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं। पत्र में उल्लेख किया गया है कि भारत के संविधान के अनुच्छेद 148 से 151 के अंतर्गत CAG को सरकारी संस्थानों के वित्तीय कार्यों की जांच का संवैधानिक अधिकार प्राप्त है। ऐसे में यदि ऑडिट रिपोर्ट में फर्जी भुगतान, निविदा प्रक्रिया में गड़बड़ी, नियम विरुद्ध व्यय या सरकारी धन के दुरुपयोग जैसे मामले सामने आते हैं, तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC), भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम तथा बिहार वित्तीय नियमावली के तहत कार्रवाई अनिवार्य हो जाती है।
'प्रभावशाली अधिकारियों को बचाने की कोशिश'
शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि इतने गंभीर मामलों के बावजूद अब तक किसी भी स्तर पर पारदर्शी और प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई है। आवेदन में कहा गया है कि यदि CAG रिपोर्ट में उठाए गए सवालों पर समय रहते कार्रवाई नहीं होती है, तो इससे यह संदेश जाएगा कि प्रभावशाली अधिकारियों को संरक्षण दिया जा रहा है। पत्र में यह भी आरोप लगाया गया है कि कई मामलों में जिम्मेदारी तय करने के बजाय वित्तीय अनियमितताओं पर पर्दा डालने का प्रयास किया गया। शिकायतकर्ता ने मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी अथवा निगरानी विभाग से कराई जाए, ताकि वास्तविक तथ्यों का खुलासा हो सके।
इन बिंदुओं पर मांगी गई कार्रवाई
शिकायत में राज्यपाल एवं संबंधित विभागों से कई महत्वपूर्ण मांगें की गई हैं
CAG रिपोर्ट में उल्लिखित वित्तीय अनियमितताओं की उच्चस्तरीय जांच
दोषी अधिकारियों एवं कर्मचारियों के विरुद्ध FIR दर्ज करने की कार्रवाई
सरकारी राशि की वसूली सुनिश्चित करना
वित्तीय एवं प्रशासनिक जिम्मेदारी तय करना
विश्वविद्यालय की कार्यप्रणाली की विशेष ऑडिट कराना
भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत कानूनी कार्रवाई करना
कई बड़े विभागों को भेजी गई शिकायत की प्रतिलिपि
इन लोगों को भेजी गई शिकायत की प्रतिलिपि
मामले की गंभीरता को देखते हुए आवेदन की प्रतिलिपि राज्य एवं केंद्र सरकार के कई महत्वपूर्ण संवैधानिक और प्रशासनिक अधिकारियों को भी भेजी गई है। प्राप्त जानकारी के अनुसार शिकायत की प्रतिलिपि राज्यपाल सह कुलाधिपति, बिहार, मुख्यमंत्री, बिहार सरकार, मुख्य सचिव, बिहार सरकार, कृषि विभाग, बिहार सरकार, शिक्षा विभाग, बिहार सरकार, सतर्कता/निगरानी विभाग, आर्थिक अपराध इकाई (EOU), नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) कार्यालय, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC), संबंधित जिला प्रशासन एवं पुलिस प्रशासन बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर के कुलपति एवं संबंधित प्रशासनिक अधिकारी निम्नलिखित कार्यालयों को प्रेषित की गई है। शिकायतकर्ता का कहना है कि विभिन्न विभागों को प्रतिलिपि भेजने का उद्देश्य मामले की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करना और प्रशासनिक जवाबदेही तय कराना है।
विश्वविद्यालय प्रशासन की चुप्पी
पूरे मामले पर बिहार कृषि विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि विश्वविद्यालय से जुड़े सूत्रों का कहना है कि मामला राजभवन तक पहुंचने के बाद प्रशासनिक स्तर पर हलचल तेज हो गई है और कई फाइलों की समीक्षा शुरू कर दी गई है।
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विशेषज्ञों ने बताया गंभीर मामला
शिक्षा एवं प्रशासनिक मामलों के जानकारों का मानना है कि CAG रिपोर्ट से जुड़े मामलों को अत्यंत गंभीरता से लिया जाता है, क्योंकि यह सरकारी वित्तीय अनुशासन और पारदर्शिता से सीधे जुड़ा विषय है। विशेषज्ञों के अनुसार यदि रिपोर्ट में दर्ज आपत्तियों की निष्पक्ष जांच होती है, तो इससे न केवल दोषियों की जवाबदेही तय होगी, बल्कि सार्वजनिक संस्थानों में सुशासन और पारदर्शिता की व्यवस्था भी मजबूत होगी। अब निगाहें राजभवन, राज्य सरकार और संबंधित जांच एजेंसियों पर टिकी हैं कि वे इस मामले में क्या कदम उठाते हैं और क्या विश्वविद्यालय प्रशासन पर लगे आरोपों की स्वतंत्र जांच कराई जाती है या नहीं।