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Bihar: एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल पर रोहिणी आचार्य का मोदी सरकार पर हमला, पूछा- नुकसान का बोझ जनता क्यों उठाए?

Mon, 06 Jul 2026 02:47 PM IST
आदित्य आनंद न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना Published by: आदित्य आनंद Updated Mon, 06 Jul 2026 02:47 PM IST
सार

Ethanol Blended Petrol: एथेनॉल वाले पेट्रोल पर बिहार में सियासत शुरू हो गई है। अब पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव की बेटी ने इस मामले पर सरकार को घेरने की कोशिश की है। उन्होंने कई सवाल भी पूछे। कहा कि आखिर नीति के नाम पर जनता को प्रयोगशाला बनाने के पीछे सरकार की मंशा क्या है?

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Bihar: Rohini Acharya attacks Modi government over ethanol-blended petrol; RJD, NDA.
लालू की बेटी रोहिणी ने पीएम मोदी पर साधा निशाना। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

राष्ट्रीय जनता दल (राजद) की नेता रोहिणी आचार्य ने एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल के मुद्दे पर केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर निशाना साधा है। रोहिणी आचार्य ने सोशल मीडिया पर लिखा कि पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण की वजह से देशभर से गाड़ियों में मशीनी खराबी आने की शिकायतें सामने आ रही हैं। आम जनता के बीच इसको लेकर रोष भी बढ़ता दिख रहा है। बावजूद इसके, मोदी सरकार इस गंभीर मसले पर जवाबदेही से बचती और सवालों से कतराती नजर आ रही है।

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जनता के मन में अनेक सवाल हैं और उन सवालों का जवाब पाने का अधिकार भी देश की जनता को है। मोदी सरकार को बताना होगा कि आखिर किस नीति के नाम पर आम लोगों की गाड़ियों के साथ समझौता किया जा रहा है? जब वाहन निर्माता कंपनियां स्वयं एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल के इस्तेमाल में सावधानी बरतने की सलाह देती हैं, तो बिना पर्याप्त परीक्षण और तैयारी के इस नीति को लागू क्यों किया गया?

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जनता को प्रयोगशाला बनाने के पीछे सरकार की मंशा क्या है?
रोहिणी आचार्य ने सरकार से सवाल पूछा कि जनहित के नाम पर ऐसी नीति से होने वाले नुकसान का बोझ आखिर आम जनता क्यों उठाए? क्या मोदी सरकार यह बता सकती है कि एथेनॉल मिश्रण लागू करने से पहले हर प्रकार के वाहन की अनुकूलता सुनिश्चित की गई थी? क्या इस संबंध में आम जनता को भरोसे में लिया गया था? नीति के नाम पर जनता को प्रयोगशाला बनाने के पीछे सरकार की मंशा क्या है?

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सवालों का जवाब देने से क्यों परहेज कर रही है?
मोदी सरकार को यह समझना होगा कि वही नीति सफल होती है, जो जनता का विश्वास जीतती है। किसी भी नीति का मूल्यांकन और निर्धारण संवाद, विमर्श और तथ्यों के आधार पर होना चाहिए, न कि हड़बड़ी में लिए गए ऐसे एकतरफा फैसलों से, जिन पर 'किसी विशेष' को लाभ पहुंचाने का संदेह पैदा हो। ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि ईंधन नीति के मामले में पारदर्शिता क्यों नहीं बरती गई? एथेनॉल नीति पर सरकार की ओर से सभी तथ्य सार्वजनिक किए जाने चाहिए और जनता के सवालों का तार्किक व तथ्यात्मक जवाब दिया जाना चाहिए। आखिर सरकार इस मुद्दे पर देश की जनता के सामने तथ्य रखने और उठ रहे सवालों का जवाब देने से क्यों परहेज कर रही है?

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