Bihar: 'एक देश में दो विधान, दो प्रधान और दो निशान नहीं चलेंगे', CM सम्राट ने ऐसा कह किस बलिदान की दिलाई याद?
डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के बलिदान दिवस पर भाजपा प्रदेश कार्यालय में कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कारण में भाजपा के वरिष्ठ नेता और मंत्री समेत सैकड़ों कार्यकर्ता शामिल हुए। आइये जानते हैं किसने क्या कहा?
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भारतीय जनसंघ के संस्थापक और प्रखर राष्ट्रवादी नेता डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के बलिदान दिवस पर सोमवार को भाजपा प्रदेश कार्यालय स्थित अटल सभागार में श्रद्धांजलि कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, बिहार सरकार के मंत्री एवं भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डॉ. दिलीप जायसवाल, प्रदेश उपाध्यक्ष हरिभूषण ठाकुर बचौल समेत पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं ने उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किए।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि आज हमलोगों ने मां भारती के अनन्य उपासक, प्रखर राष्ट्रवादी चिंतक, शिक्षाविद् एवं भारतीय जनसंघ के संस्थापक परमश्रद्धेय डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी के बलिदान दिवस पर भाजपा प्रदेश कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम में उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किया। साथ ही उनके महान जीवन, त्याग, संघर्ष और अद्वितीय राष्ट्रभक्ति पर अपने विचार साझा किए। सीएम ने कहा कि डॉ. मुखर्जी ने अखंड भारत, राष्ट्रीय एकता और "एक देश में दो विधान, दो प्रधान और दो निशान नहीं चलेंगे" के संकल्प को लेकर अपना सम्पूर्ण जीवन राष्ट्रसेवा को समर्पित कर दिया। उनके बलिदान को भूला नहीं जा सकता है। पीएम नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में उनकी दूरदर्शी सोच और संकल्पों को साकार किया जा रहा है। जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 और 35A की समाप्ति, एक भारत-श्रेष्ठ भारत की अवधारणा को सशक्त करने की दिशा में डॉ. मुखर्जी के सपनों को साकार करने वाला ऐतिहासिक कदम है।
'राष्ट्रीय हितों से जुड़े मुद्दों पर हमेशा स्पष्ट और दृढ़ राय रखी'
मंत्री डॉ. दिलीप जायसवाल ने कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने देश की एकता और अखंडता के लिए अपने प्राणों का बलिदान दिया। जम्मू-कश्मीर के पूर्ण एकीकरण और देश की संप्रभुता के लिए दिया गया उनका सर्वोच्च बलिदान हर देशवासी को सदैव राष्ट्रसेवा के लिए प्रेरित करता रहेगा। उन्होंने कहा कि डॉ. मुखर्जी केवल एक राजनेता ही नहीं, बल्कि दूरदर्शी चिंतक, प्रखर शिक्षाविद् और राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने वाले व्यक्तित्व थे। डॉ. जायसवाल ने कहा कि डॉ. मुखर्जी ने अपना पूरा जीवन राष्ट्र की एकता, अखंडता और सांस्कृतिक अस्मिता की रक्षा के लिए समर्पित कर दिया। उन्होंने याद दिलाया कि बहुत कम उम्र में कलकत्ता विश्वविद्यालय के कुलपति बनकर उन्होंने अपनी असाधारण प्रतिभा का परिचय दिया था। स्वतंत्र भारत में भी उन्होंने राष्ट्रीय हितों से जुड़े मुद्दों पर हमेशा स्पष्ट और दृढ़ राय रखी।
डॉ. मुखर्जी का संघर्ष आज भी त्याग का अनुपम उदाहरण है
वहीं भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष हरिभूषण ठाकुर बचौल ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में अलग विधान, अलग निशान और अलग प्रधान के विरोध में डॉ. मुखर्जी का संघर्ष आज भी राष्ट्रभक्ति और त्याग का अनुपम उदाहरण है। उन्होंने कहा कि "एक देश में दो विधान, दो प्रधान और दो निशान नहीं चलेंगे" का उनका नारा राष्ट्रीय एकीकरण के प्रति उनकी अटूट प्रतिबद्धता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि आज आवश्यकता है कि हम उनके आदर्शों, राष्ट्रसेवा की भावना और कर्तव्यनिष्ठा को अपने जीवन में उतारें। यही उनके प्रति हमारी सच्ची श्रद्धांजलि होगी।