Bihar : पटना के रेस्टोरेंट में आग से खेलने की कैसी है तैयारी; जहां होटल हुआ था खाक, आज कैसा है हाल
Bihar : पाल होटल में लगी भीषण आग में 6 लोगों की मौत हुई थी। मरने वालों में युवतियां भी थीं। उस हादसे के तो कई कारण थे, लेकिन आश्चर्य की बात यह है कि वहां आसपास के रेस्टोरेंट और होटल आज भी उस घटना से कुछ भी सीख नहीं पाए।
विस्तार
उस भयानक घटना के 2 साल गुजर गए, लेकिन लोगों को वह मंजर आज भी याद है। यह अलग बात है कि लोगों ने उस भयानक घटना से कुछ सीख नहीं ली। घटना राजधानी पटना की है, जहां जंक्शन के ठीक सामने स्थित बहुमंजिल पाल होटल में आग लग गई थी। देखते ही देखते आग ने पूरे पाल होटल को अपने आगोश में ले लिया। इस घटना में 6 लोगों की मौत गुई थी।
पतली और संकरी सीढ़ी भी बनी मौत की वजह
आज भी उस दिन को याद कर लोग सिहर उठते हैं। घटनास्थल पर के दुकानदारों ने बताया कि वह मनहूस दिन था 25 अप्रैल 2024, गुरूवार का दिन था। सुबह करीब साढ़े 10 बज रहे थे। तभी अचानक शोर शुरू हुआ..भागो-भागो आग लग गई। देखते ही देखते आग पाल होटल के निचले हिस्से को पूरी तरह से अपने आगोश में ले लिया था। सिलिंडर भी चूल्हे में लगा हुआ था और देखते ही देखते आग की तेज लपटें अब संकरी सीढ़ी से होते हुए उपर के मंजिलों की ओर जाने लगी। इधर अफरातफरी का माहौल बना हुआ था। लगभग आधे घंटे के अंदर पूरी बिल्डिंग आग और धुएं से भर गई। होटल के बगल वाली बिल्डिंग में भी आग पहुंच गई और दोनों बिल्डिंग से सिर्फ आग और धुआं ही दिखा। इससे सटे पटना किराना को भी आग से खतरा था, लेकिन हवा विपरीत दिशा में बह रही थी इसलिए आग किराना दूकान को अपनी जद में नहीं ले सका। इस पूरी घटना में महिला समेत 6 लोगों की जान चली गई।
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लापरवाही अब भी है जारी
आज 'अमर उजाला' इस पड़ताल में उसी पाल होटल के पास पहुंचा कि उस जले हुए बहुमंजिल पाल होटल के आसपास के दूकानदारों और होटल वालों ने उन वीभत्स घटना से क्या सीखा। अमर उजाला पास के एक होटल में प्रवेश किया जिसमें पतली, संकरी और बेतरतीब सीढ़ियां थीं। हाथ में माइक आई डी देखकर रेस्टोरेंट के रसोई से निकलने वाले शख्स से पूछा गया कि यह रेस्टोरेंट है या होटल? वह शख्स घबड़ा सा गया था। उसने जवाब दिया कि यह होटल नहीं है। उससे फिर सवाल पूछा गया कि खाना खिलाते हो? मुझे खाना खाना है। शख्स ने कहा कि यहां कुछ नहीं होता। आप नीचे जाईए। लेकिन अमर उजाला ने उस रसोई केबिन का वीडियो बनाने लगा तो शख्स ने डर से रसोई का गेट बंद कर दिया। इसी तरह की पतली, संकरी और बेतरतीब सीढ़ियों को पार करता हुआ एक होटल में पहुंचा तो पाया कि उसमें अलग-अलग कमरे नहीं थे, बल्कि अलग-अलग बेड लगे हुए थे। लगभग सभी बेड पर ग्राहक भी थे। 'अमर उजाला' ने आग को लेकर सेफ्टी के बारे में पूछा तो बताया गया कि अभी एनओसी नहीं मिला है। आप मालिक से बात कीजिए।
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आमलोगों की जान के साथ हो रहा है खिलवाड़
पास में साइकिल की एक दुकान है। उस दुकान के मालिक नरेन्द्र सिंह ने बताया कि मुझे वह खौफनाक दिन आज भी याद है। वह बहुत ही भयानक मंजर था। उन्होंने कहा कि होटल वाले छोटे-छोटे कमरे बनाकर खूब रुपये कमाते हैं, लेकिन आग लगने की संकट को दूर करने के उपाय नहीं करते। उन्होंने बताया कि होटल वाले लोगों की जान के साथ सौदा करते हैं। इसके लिए सरकार, पुलिस, प्रशासन और सिस्टम को उचित कार्रवाई करने की मांग की। वहीं एक अन्य दुकानदार ने बताया कि जब मैं दुकान खोलने आया तब तक आग और भगदड़ दिख रहा था। पुलिस प्रशासन ने दूकान खोलने से मना कर दिया था।
अग्निशमन दस्ता हैं पूरी तरह तैयार
इस संबंध में जिला अग्निशमन पदाधिकारी रितेश कुमार पांडेय ने कहा कि भीषण ग्रीष्म लहर और प्रतिकूल जलवायु परिस्थिति कोदेखते हुए बिहार अग्निशमन सेवा इस तरह की घटनाओं से निबटने के लिए सक्षम है। विभाग ने प्रतिरोध, प्रशिक्षण और प्रवर्तन की त्रिसूत्रीय रणनीति अपनाते हुए पटना जिले को अग्नि-विपदाओं से सुरक्षित रखने के लिए व्यापक कदम उठाए हैं। आज की तारीख में आग की बड़ी घटनाओं से निबटने के लिए 6 सहायक जिला अग्निशमन पदाधिकारी, 4 अनुमंडल अग्निशमन पदाधिकारी हैं। वहीं परिचालन दस्ता के रूप में 38 उप-अधिकारी, 77 प्रधान अग्निक, 247 अग्निक एवं 92 अग्निक चालकों की टीम हैं, जो 24 घंटे तैयार रहते हैं। इसके अलावे 22 वाटर टेंडर एवं 3 उच्च क्षमता वाले वाटर बाउजर भी मौजूद हैं। विशेष आपदा निवारण यानी विद्युत् और केमिकल आग से निबटने के लिए 5 फोम टेंडर एवं उच्च-स्तरीय बचाव कार्यों के लिए 5 हाइड्रोलिक प्लेटफॉर्म की व्यवस्था कि गई है। शहरी एवं संकरी क्षेत्र के लिए 39 मिस्ट टेक्नोलॉजी वाहन एवं 10 एम.टी. बुलेट्स की भी उपलब्धता है, जो जल संरक्षण के साथ त्वरित आग बुझाने में सक्षम हैं। इस संबंध में जिला अग्निशमन पदाधिकारी रितेश कुमार पांडेय ने कहा कि हमारी प्राथमिकता न केवल आग पर नियंत्रण पाना है, बल्कि जन-भागीदारी के माध्यम से आग लगने की घटनाओं को शून्य करना भी है।

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