Bihar: एक साथ दो सरकारी नौकरियां, दो जगह से वेतन! औरंगाबाद में लिपिक सस्पेंड, जांच में खुला बड़ा खेल
बिहार के औरंगाबाद में एक सरकारी लिपिक के एक ही समय में बिहार और झारखंड के दो अलग-अलग सरकारी संस्थानों में नौकरी कर दोनों जगह से वेतन लेने का मामला सामने आया है।
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बिहार के औरंगाबाद जिले में एक सरकारी कर्मचारी द्वारा एक ही अवधि में बिहार और झारखंड के दो अलग-अलग संस्थानों में नौकरी कर दोनों जगहों से वेतन लेने का मामला सामने आया है। जांच में आरोप प्रथम दृष्टया सही पाए जाने के बाद जिलाधिकारी अभिलाषा शर्मा ने सिविल सर्जन कार्यालय में कार्यरत लिपिक कृष्ण प्रसाद वर्मा को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। मामले ने प्रशासनिक महकमे में हलचल मचा दी है।
पूर्व सांसद की शिकायत के बाद शुरू हुई जांच
मामले की शुरुआत तब हुई जब औरंगाबाद के पूर्व सांसद सुशील कुमार सिंह ने जिलाधिकारी से शिकायत की कि कृष्ण प्रसाद वर्मा दो अलग-अलग सरकारी संस्थानों में सेवा देकर वेतन प्राप्त कर रहे हैं। शिकायत मिलने के बाद जिलाधिकारी ने सिविल सर्जन को मामले की जांच कर आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश दिया।
पहली जांच में मिले विरोधाभास
डीएम के निर्देश पर सिविल सर्जन ने तीन सदस्यीय जांच समिति गठित की। समिति ने सेवा पुस्तिका, सेवा अभिलेखों और भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (बीसीसीएल) के दस्तावेजों की जांच की। जांच में कई विरोधाभास सामने आए और यह संकेत मिला कि संबंधित कर्मचारी एक ही अवधि में दो संस्थानों से वेतन प्राप्त कर रहा था।
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डीएम ने कराई विस्तृत जांच
प्रारंभिक रिपोर्ट के बाद जिलाधिकारी ने मामले की गहराई से जांच के लिए एक और तीन सदस्यीय संयुक्त जांच दल बनाया। इसमें जिला स्थापना शाखा, जिला पंचायत राज कार्यालय और सदर अस्पताल के अधिकारियों को शामिल किया गया संयुक्त जांच में पाया गया कि कृष्ण प्रसाद वर्मा 6 जुलाई 2005 से औरंगाबाद सिविल सर्जन कार्यालय में लिपिक के पद पर कार्यरत हैं और नियमित वेतन ले रहे हैं।
वहीं बीसीसीएल, पूर्वी झरिया क्षेत्र के रिकॉर्ड के अनुसार वह 24 नवंबर 2008 से 12 मार्च 2017 तक जूनियर ओवरमैन के पद पर भी कार्यरत रहे और वहां से भी वेतन प्राप्त करते रहे। जांच दल ने यह भी पुष्टि की कि दोनों संस्थानों में दर्ज व्यक्तिगत और सेवा संबंधी दस्तावेज एक ही व्यक्ति से जुड़े हैं। रिपोर्ट में इसे बिहार सरकारी सेवक आचार नियमावली, 1976 के नियम-16 का उल्लंघन माना गया और विभागीय व कानूनी कार्रवाई की अनुशंसा की गई।
नोटिस का नहीं मिला संतोषजनक जवाब
प्रशासन ने कर्मचारी को दो बार कारण बताओ नोटिस जारी कर अपना पक्ष रखने का अवसर दिया। हालांकि, जांच के दौरान आरोपों को खारिज करने के लिए कोई ठोस साक्ष्य या संतोषजनक जवाब प्रस्तुत नहीं किया गया।
तत्काल प्रभाव से निलंबित, विभागीय कार्रवाई शुरू
संयुक्त जांच रिपोर्ट और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर जिलाधिकारी ने कृष्ण प्रसाद वर्मा को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। निलंबन अवधि में उनका मुख्यालय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, गोह निर्धारित किया गया है। उन्हें नियमानुसार जीवन-यापन भत्ता मिलेगा। साथ ही विभागीय कार्रवाई शुरू कर दी गई है। सिविल सर्जन को संचालन पदाधिकारी और जिला स्थापना उप समाहर्ता को उपस्थापन पदाधिकारी नियुक्त किया गया है। जिलाधिकारी ने पूरे मामले की निष्पक्ष, पारदर्शी और समयबद्ध जांच सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।