Bihar : जेल के लिए आवंटित जमीन पर स्वास्थ्य विभाग ने बिना एनओसी शुरू कराया निर्माण, अधिवक्ताओं ने जताई आपत्ति
सुपौल जिले के निर्मली अनुमंडलीय अस्पताल परिसर से सटी जमीन पर चल रहे 50 बेड के आपातकालीन भवन निर्माण को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। अधिवक्ताओं का आरोप है कि कारा (जेल) के लिए आवंटित भूमि पर बिना अनापत्ति प्रमाण पत्र के निर्माण कराया जा रहा है।
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सुपौल जिले के निर्मली अनुमंडलीय अस्पताल परिसर से सटी जमीन पर चल रहे निर्माण कार्य को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। आरोप है कि कारा (जेल) निर्माण के लिए आवंटित भूमि पर बिना अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) के ही बिहार मेडिकल सर्विसेज एंड इंफ्रास्ट्रक्चर कॉरपोरेशन लिमिटेड (बीएमएसआईसीएल) द्वारा 50 बेड का तीन मंजिला आपातकालीन भवन बनाया जा रहा है।
इसको लेकर अधिवक्ताओं ने जिलाधिकारी, जिला एवं सत्र न्यायाधीश और सिविल सर्जन से निर्माण कार्य पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है। साथ ही चेतावनी दी है कि यदि निर्माण कार्य नहीं रोका गया, तो वे हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे।
दरअसल, पिछले कुछ दिनों से निर्मली अनुमंडलीय अस्पताल से सटी जमीन की घेराबंदी कर निर्माण कार्य किया जा रहा है। हैरानी की बात यह है कि निर्माण स्थल पर योजना से संबंधित कोई बोर्ड भी नहीं लगाया गया है। अधिवक्ताओं का कहना है कि बीएमएसआईसीएल द्वारा करीब 10 करोड़ रुपये की लागत से इस भवन का निर्माण कराया जा रहा है। इसी को लेकर विधिज्ञ संघ के महासचिव भोला प्रसाद यादव ने अनुमंडलीय अस्पताल के उपाधीक्षक को ज्ञापन सौंपकर निर्माण कार्य रोकने की मांग की है।
बताया जा रहा है कि 21 दिसंबर 2021 को राज्य के तत्कालीन कारा महानिरीक्षक मिथिलेश मिश्रा के नेतृत्व में एक टीम निर्मली पहुंची थी। टीम ने यहां 400 कैदियों की क्षमता वाली जेल, कारा उपाधीक्षक के आवास, कार्यालय और पहुंच पथ के लिए जमीन का चयन किया था। इस दौरान करीब तीन घंटे तक रुककर अंचल अमीन से जमीन का सीमांकन भी कराया गया था। आरोप है कि इसी जमीन के हिस्से में कारा उपाधीक्षक कार्यालय और आवास के लिए चिह्नित लगभग एक एकड़ भूमि पर स्वास्थ्य विभाग ने बिना अनापत्ति के ही आनन-फानन में 50 बेड का बहुमंजिला आपातकालीन भवन निर्माण शुरू करा दिया।
कृषि विभाग की जमीन पर बना है अनुमंडलीय अस्पताल
वरिष्ठ अधिवक्ता रामलखन प्रसाद यादव ने बताया कि निर्मली में कृषि विभाग की कुल 25 एकड़ जमीन में से 20 एकड़ 21 डिसमिल भूमि 14 अगस्त 2007 को राज्य कैबिनेट की मंजूरी के बाद अनुमंडल कार्यालय, व्यवहार न्यायालय, जेल और अधिकारी-कर्मचारियों के आवास के लिए स्थानांतरित की गई थी। इसी भूमि पर अनुमंडल कार्यालय, 15 कोर्ट रूम, 12 न्यायाधीशों के आवास, इम्युनिटी भवन, 180 कैदियों की हाजत, न्यायालय तक पहुंच मार्ग और चहारदीवारी का निर्माण कराया गया है।
उन्होंने कहा कि अनुमंडलीय अस्पताल जिस जमीन पर बना है, वह मूल रूप से कृषि विभाग की है और उसके लिए भी अनापत्ति नहीं ली गई थी। हालांकि अस्पताल बनने से स्थानीय लोगों को सुविधा जरूर मिली है। स्थानांतरित भूमि में 12 एकड़ कारा निर्माण, 5 एकड़ 81 डिसमिल अनुमंडल कार्यालय व अधिकारी-कर्मचारियों के आवास, 2 एकड़ 81 डिसमिल कोर्ट और न्यायाधीश आवास तथा 1 एकड़ 20 डिसमिल एसडीपीओ कार्यालय व आवास के लिए आवंटित थी। अब नए निर्माण से कारा निर्माण का कार्य अधर में लटकने की आशंका जताई जा रही है।
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दो बार हाईकोर्ट गए अधिवक्ता
अधिवक्ताओं का कहना है कि जमीन स्थानांतरण के बावजूद वर्षों तक निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका। इसके बाद विधिज्ञ संघ निर्मली की ओर से अधिवक्ता रामलखन प्रसाद यादव ने वर्ष 2016 में सीडब्ल्यूजेसी संख्या 16148/2016 दायर किया। इस मामले में वर्ष 2017 में तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश राजेंद्र मेनन और न्यायमूर्ति अनिल कुमार उपाध्याय की पीठ ने सुपौल डीएम को अनुमंडल कार्यालय, कोर्ट और कारा निर्माण का आदेश दिया था। बावजूद इसके, पांच वर्षों तक निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका।
इसके बाद वर्ष 2022 में एमजेसी संख्या 1235/2022 दायर की गई। इस पर हाईकोर्ट की दो सदस्यीय पीठ ने 4 अप्रैल 2024 को अंतिम आदेश पारित करते हुए सरकार और संबंधित विभाग को 18 महीने के भीतर, यानी 31 दिसंबर 2025 तक भवन निर्माण कार्य पूरा करने का निर्देश दिया। इसके बाद कारा को छोड़कर अन्य सभी भवनों का निर्माण पूरा कर लिया गया है और जल्द ही कोर्ट संचालन की उम्मीद है।
कारा निर्माण के लिए 54 करोड़ का डीपीआर तैयार
अधिवक्ताओं ने बताया कि वर्ष 2017 के आदेश के बाद कारा के लिए आवंटित 12 एकड़ भूमि में से करीब तीन एकड़ जमीन कोर्ट और न्यायाधीश आवास के लिए उपयोग में ली गई। इसके बाद आवश्यक भूमि उपलब्ध हो सकी। दिसंबर 2021 में कारा महानिरीक्षक की मौजूदगी में सीमांकन कराया गया और वर्ष 2022 में ही कारा निर्माण के लिए 54 करोड़ रुपये का डीपीआर तैयार कर लिया गया था।
अधिवक्ताओं की चिंता है कि यदि कारा के लिए आवंटित जमीन पर इसी तरह अतिक्रमण होता रहा, तो बाद में अधिग्रहण कर निर्माण कराना लंबी और जटिल प्रक्रिया बन जाएगी, जिससे जेल निर्माण की राह में गंभीर बाधा उत्पन्न हो सकती है।
प्रभारी जिलाधिकारी मो तारिक ने क्या कहा?
प्रभारी जिलाधिकारी मो तारिक ने बताया कि निर्मली एसडीएम को जमीन से संबंधित दस्तावेजों की जांच के आदेश दिए गए हैं। मंगलवार को जमीन की मापी भी कराई जाएगी। अगर जमीन स्वास्थ्य विभाग की नहीं है तो निर्माण कार्य पर रोक लगेगी। अगर जमीन स्वास्थ्य विभाग की हुई तो योजना बोर्ड भी लगाया जाएगा। मापी में अन्य विभागों को आवंटित जमीन का भी सीमांकन सुनिश्चित किया जाएगा, ताकि भविष्य में भी कोई समस्या न हो।