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Bihar News: बिहार के इस जिले में लगता है भूतों का मेला, यूपी, बंगाल और नेपाल से आते हैं लोग

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गोपालगंज Published by: सारण ब्यूरो Updated Wed, 25 Mar 2026 01:58 PM IST
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सार

Bihar News: गोपालगंज के लक्षवार धाम में नवरात्र के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु प्रेतबाधा से मुक्ति की आस्था लेकर पहुंचते हैं। यहां भूत-प्रेत से जुड़ी मान्यताओं के बीच लोग अजीबोगरीब व्यवहार करते नजर आते हैं, जिसे एक ओर लोग चमत्कार मानते हैं, तो वहीं चिकित्सा विशेषज्ञ इसे मानसिक स्थिति से जोड़कर देखते हैं।

gathering of ghosts is organised during Navratri in Lakshwar Gopalganj Bihar
लक्षवार धाम - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

बिहार के गोपालगंज जिले में शारदीय नवरात्र के अवसर पर एक ऐसा नजारा देखने को मिलता है, जो आधुनिक युग में भी प्राचीन मान्यताओं और गहरे अंधविश्वास की याद दिलाता है। जिला मुख्यालय से करीब 12 किलोमीटर दूर स्थित लक्षवार गांव का लक्षवार धाम इन दिनों चर्चा का केंद्र बना हुआ है। इसे स्थानीय लोग प्रेतबाधा से मुक्ति का धाम मानते हैं, जहां नवरात्र के दौरान हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है।

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कई राज्यों तक फैला है प्रभाव
लक्षवार धाम की प्रसिद्धि केवल बिहार तक सीमित नहीं है। यहां उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल और पड़ोसी देश नेपाल से भी बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं। मंदिर परिसर में लगभग एक महीने तक श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है। मान्यता है कि यहां की मिट्टी के स्पर्श मात्र से शरीर के भीतर मौजूद बुरी आत्माएं भाग जाती हैं। इसके अतिरिक्त यहां ललका बाबा द्वारा दी जाने वाली भभूत का भी विशेष महत्व माना जाता है।
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नवरात्र में दिखते हैं विचलित करने वाले दृश्य
शारदीय नवरात्र के मौके पर मंदिर परिसर में कई विचलित करने वाले दृश्य देखने को मिलते हैं। कहीं महिलाएं जोर-जोर से सिर हिलाती नजर आती हैं, तो कहीं पुरुष जमीन पर लोटकर अजीबोगरीब हरकतें करते दिखते हैं। अंधविश्वास का आलम यह है कि यहां आने वाले लोग इन गतिविधियों को इंसानी रूप में मौजूद भूत-प्रेत मानते हैं। पीड़ा से मुक्ति पाने की चाह में लोग मर्यादा और लोक-लाज की परवाह किए बिना घंटों तक इन क्रियाओं में लीन रहते हैं।

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शक्तिपीठ से शिवधाम तक का सफर
मंदिर के पुजारी के अनुसार, इस परंपरा की जड़ें दशकों पुरानी हैं। वर्ष 1972 में माता के आदेश पर लक्षवार शक्तिपीठ से पिंड का कुछ अंश लाकर कुचायकोट के जलालपुर बाजार में शिवधाम की स्थापना की गई थी। इसके बाद से ही यहां तांत्रिकों द्वारा भूत-प्रेत भगाने और मानसिक रोगों के उपचार का दावा करने का सिलसिला शुरू हुआ, जो आज एक विशाल मेले का रूप ले चुका है। जहां एक ओर श्रद्धालु इसे दैवीय चमत्कार मानते हैं, वहीं चिकित्सा जगत इसे मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या और सामाजिक धारणा के रूप में देखता है।

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