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Satta ka Sangram Live: सुपौल पहुंचा चुनावी रथ, युवाओं ने चाय की चर्चा पर बताया क्या है उनके मुद्दे?

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सुपौल Published by: आशुतोष प्रताप सिंह Updated Tue, 28 Oct 2025 09:55 AM IST
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सार

Bihar Vidhan Sabha Chunav 2025: बिहार में विधानसभा चुनाव के लिए 6 और 11 नवंबर को मतदान होना है। चुनाव नजदीक आते ही माहौल पूरी तरह चुनावी हो गया है। इसी के तहत, अमर उजाला का चुनावी रथ ‘सत्ता का संग्राम’ सुपौल पहुंचा।
 

Bihar Election 2025 Satta ka Sangram Supaul Youth share their issues and political opinions in Bihar elections
सत्ता का संग्राम - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

अब बिहार की चुनावी बयार सुपौल तक पहुंच चुकी है।  इस ऐतिहासिक धरती पर राजनीति केवल मंचों और भाषणों में नहीं, बल्कि लोगों के दिलों की धड़कन में बसती है। अमर उजाला का चुनावी रथ ‘सत्ता का संग्राम’ आज सुपौल जिले में पहुंचा, जहां हर गली, चौक और चौपाल पर चुनावी चर्चाएं जोरों पर हैं। लोगों की जुबान पर बस एक ही सवाल है, “इस बार जनता किसे देगी सत्ता की चाबी?” सुबह की चाय से लेकर शाम की बैठकों तक, मतदाताओं की उम्मीदें और मुद्दे मिलकर बिहार की नई राजनीतिक तस्वीर गढ़ रहे हैं।
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सुपौल के स्थानीय निवासी मोहम्मद हैदर ने कहा, “सुपौल में विकास सबसे बड़ा मुद्दा है। यहां काफी काम हुआ है। सड़क, बिजली, पानी जैसी जरूरी सुविधाएं अब लगभग पूरी हो चुकी हैं। हमें लगता है कि पुराने और अनुभवी नेता ही इस विकास को आगे बढ़ा पाएंगे।”
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मोहम्मद रज़ा हुसैन ने बताया, “विजेंद्र प्रसाद यादव 1990 से सुपौल के विधायक हैं। उनके रहते यहां कभी किसी की हिम्मत नहीं हुई कि कोई रंगदारी मांग सके। जितना विकास सुपौल में हुआ है, उतना कम समय में कहीं और नहीं हुआ। उनकी उम्र ज़रूर बढ़ी है, लेकिन सोच आज भी एक युवा जैसी है। पलायन की समस्या भी अब काफी हद तक कम हुई है।”

सद्दाम हुसैन ने कहा, “यहां रोजगार की बहुत कमी है। मैं पिछले 35  वर्षो  से अस्पताल में काम कर रहा हूं, लेकिन हालात अब भी वैसे ही हैं। अगर कोई मरीज आता है तो उसे तुरंत दरभंगा रेफर कर दिया जाता है, क्योंकि यहां इलाज की ठीक व्यवस्था नहीं है।”

एजाज़ ने बताया, “यहां कोई बड़ा विकास नहीं हुआ है। हाल ही में आई बाढ़ में लोग बांध पर रह रहे थे। मैंने आज तक अपने विधायक को इलाके में नहीं देखा। उनके आसपास के लोग बस उनकी तारीफ करते रहते हैं, लेकिन ज़मीनी हकीकत कुछ और है।”

मोहम्मद शहाबुद्दीन ने कहा, “यहां विकास सिर्फ उन्हीं लोगों का हुआ है जो विधायक के करीबी हैं। बाकी लोग जैसे थे वैसे ही हैं। हमारे बच्चों के लिए नए स्कूल बनने चाहिए क्योंकि पढ़ाई की सही सुविधा नहीं है।”  मोहम्मद सलाउद्दीन ने कहा, “सुपौल में पिछले कुछ  वर्षो ों में काफी विकास हुआ है। यहां नए स्कूल बने हैं और कई स्कूलों को 10+2 में अपग्रेड किया गया है। अब बच्चों के लिए पढ़ाई की अच्छी सुविधा है। सुपौल में माहौल शांत और आपसी सौहार्द वाला है। यहां अपराध बहुत कम हुआ है। जो लोग आज सवाल उठा रहे हैं, उन्हें 30  वर्षो  पहले के हालात याद करने चाहिए और आज के बदलाव को देखना चाहिए।”
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