{"_id":"6a61ab55891b1096030a24df","slug":"mithila-sanskrit-research-institute-to-partner-with-oxford-university-bihar-government-grants-approval-2026-07-23","type":"story","status":"publish","title_hn":"Bihar: ऑक्सफोर्ड से जुड़ेगा मिथिला संस्कृत शोध संस्थान! सरकार ने दी मंजूरी, संजय झा ने बताया ऐतिहासिक","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Bihar: ऑक्सफोर्ड से जुड़ेगा मिथिला संस्कृत शोध संस्थान! सरकार ने दी मंजूरी, संजय झा ने बताया ऐतिहासिक
Thu, 23 Jul 2026 11:21 AM IST
पटना ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना
Published by: पटना ब्यूरो
Updated Thu, 23 Jul 2026 11:21 AM IST
सार
Bihar News: जदयू के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद संजय झा ने बताया कि बिहार सरकार ने मिथिला संस्कृत शोध संस्थान, दरभंगा और ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की ऑक्सफोर्ड संस्कृत टेक्स्ट सोसाइटी के बीच संस्थागत सहयोग को मंजूरी दे दी है। इस करार से दुर्लभ पांडुलिपियों के संरक्षण, डिजिटलीकरण, शोध और वैश्विक स्तर पर प्रकाशन का रास्ता खुलेगा।
विज्ञापन
संजय झा
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
जनता दल यूनाइटेड के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद संजय झा ने कहा कि बिहार सरकार ने मिथिला संस्कृत शोध संस्थान, दरभंगा और इंग्लैंड स्थित ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की ऑक्सफोर्ड संस्कृत टेक्स्ट सोसाइटी के बीच संस्थागत सहयोग के प्रस्ताव को औपचारिक मंजूरी दे दी है। उन्होंने इसे मिथिला और ऑक्सफोर्ड के बीच ज्ञान की ऐतिहासिक साझेदारी की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया।
उच्च शिक्षा विभाग ने प्रस्ताव को दी औपचारिक सहमति
संजय झा ने कहा कि बिहार सरकार के उच्च शिक्षा विभाग ने मिथिला संस्कृत शोध संस्थान, दरभंगा के साथ संस्थागत सहयोग के लिए ऑक्सफोर्ड संस्कृत टेक्स्ट सोसाइटी से मिले प्रस्ताव का स्वागत करते हुए औपचारिक सहमति प्रदान कर दी है। उनके अनुसार यह फैसला बिहार की शैक्षणिक और सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक मंच तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाएगा।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से मुलाकात के बाद बढ़ी प्रक्रिया
संजय झा ने बताया कि उन्होंने 7 जुलाई को पटना में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से मुलाकात कर मिथिला संस्कृत शोध संस्थान और ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की ऑक्सफोर्ड संस्कृत टेक्स्ट सोसाइटी के बीच संस्थागत करार का अनुरोध किया था। इस दौरान उन्होंने करार के महत्व की विस्तृत जानकारी दी और ऑक्सफोर्ड संस्कृत टेक्स्ट सोसाइटी से प्राप्त औपचारिक प्रस्ताव की प्रति भी मुख्यमंत्री को सौंपी। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने प्रस्ताव की सराहना करते हुए उसी समय उच्च शिक्षा विभाग के अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए थे।
विज्ञापन
दुर्लभ पांडुलिपियों के संरक्षण और वैश्विक शोध को मिलेगा बढ़ावा
संजय झा ने विश्वास जताया कि यह अंतरराष्ट्रीय संस्थागत करार मिथिला समेत पूरे बिहार की बौद्धिक विरासत को पुनर्जीवित करने और उसे वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में ऐतिहासिक साबित होगा। उन्होंने कहा कि इससे मिथिला संस्कृत शोध संस्थान, दरभंगा में संरक्षित हजारों प्राचीन और दुर्लभ पांडुलिपियों का वैज्ञानिक सूचीकरण, डिजिटलीकरण, शोध तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर समालोचनात्मक संस्करणों का प्रकाशन संभव हो सकेगा। साथ ही संस्थान को फिर से ज्ञान के वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करने और बिहार के शोधार्थियों को अंतरराष्ट्रीय परियोजनाओं, फेलोशिप तथा प्रशिक्षण से जुड़ने के नए अवसर मिलेंगे।
'ज्ञान भारतम् मिशन' को भी मिलेगी नई मजबूती
संजय झा ने कहा कि यह करार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में शुरू किए गए 'ज्ञान भारतम् मिशन' को भी नई मजबूती प्रदान करेगा। उनका कहना है कि इस पहल से भारतीय ज्ञान परंपरा और संस्कृत साहित्य के संरक्षण एवं वैश्विक प्रसार को गति मिलेगी।
यह भी पढ़ें: पत्थर कहां से आए, किसके मैसेज पर बना प्लान? पटना पुलिस अब कई सवालों का जवाब तलाश रही
57 करोड़ रुपये से चल रहा है संस्थान के जीर्णोद्धार का काम
उन्होंने बताया कि इससे पहले जनवरी 2025 में 'प्रगति यात्रा' के दौरान तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की घोषणा के अनुरूप फरवरी 2025 में राज्य मंत्रिमंडल ने मिथिला संस्कृत शोध संस्थान, दरभंगा के जीर्णोद्धार और पांडुलिपियों के संरक्षण के लिए करीब 57 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी थी। इस योजना के तहत वर्तमान में कार्य जारी है।
विज्ञापन
उच्च शिक्षा विभाग ने प्रस्ताव को दी औपचारिक सहमति
संजय झा ने कहा कि बिहार सरकार के उच्च शिक्षा विभाग ने मिथिला संस्कृत शोध संस्थान, दरभंगा के साथ संस्थागत सहयोग के लिए ऑक्सफोर्ड संस्कृत टेक्स्ट सोसाइटी से मिले प्रस्ताव का स्वागत करते हुए औपचारिक सहमति प्रदान कर दी है। उनके अनुसार यह फैसला बिहार की शैक्षणिक और सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक मंच तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाएगा।
विज्ञापन
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से मुलाकात के बाद बढ़ी प्रक्रिया
संजय झा ने बताया कि उन्होंने 7 जुलाई को पटना में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से मुलाकात कर मिथिला संस्कृत शोध संस्थान और ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की ऑक्सफोर्ड संस्कृत टेक्स्ट सोसाइटी के बीच संस्थागत करार का अनुरोध किया था। इस दौरान उन्होंने करार के महत्व की विस्तृत जानकारी दी और ऑक्सफोर्ड संस्कृत टेक्स्ट सोसाइटी से प्राप्त औपचारिक प्रस्ताव की प्रति भी मुख्यमंत्री को सौंपी। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने प्रस्ताव की सराहना करते हुए उसी समय उच्च शिक्षा विभाग के अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए थे।
विज्ञापन
दुर्लभ पांडुलिपियों के संरक्षण और वैश्विक शोध को मिलेगा बढ़ावा
संजय झा ने विश्वास जताया कि यह अंतरराष्ट्रीय संस्थागत करार मिथिला समेत पूरे बिहार की बौद्धिक विरासत को पुनर्जीवित करने और उसे वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में ऐतिहासिक साबित होगा। उन्होंने कहा कि इससे मिथिला संस्कृत शोध संस्थान, दरभंगा में संरक्षित हजारों प्राचीन और दुर्लभ पांडुलिपियों का वैज्ञानिक सूचीकरण, डिजिटलीकरण, शोध तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर समालोचनात्मक संस्करणों का प्रकाशन संभव हो सकेगा। साथ ही संस्थान को फिर से ज्ञान के वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करने और बिहार के शोधार्थियों को अंतरराष्ट्रीय परियोजनाओं, फेलोशिप तथा प्रशिक्षण से जुड़ने के नए अवसर मिलेंगे।
'ज्ञान भारतम् मिशन' को भी मिलेगी नई मजबूती
संजय झा ने कहा कि यह करार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में शुरू किए गए 'ज्ञान भारतम् मिशन' को भी नई मजबूती प्रदान करेगा। उनका कहना है कि इस पहल से भारतीय ज्ञान परंपरा और संस्कृत साहित्य के संरक्षण एवं वैश्विक प्रसार को गति मिलेगी।
यह भी पढ़ें: पत्थर कहां से आए, किसके मैसेज पर बना प्लान? पटना पुलिस अब कई सवालों का जवाब तलाश रही
57 करोड़ रुपये से चल रहा है संस्थान के जीर्णोद्धार का काम
उन्होंने बताया कि इससे पहले जनवरी 2025 में 'प्रगति यात्रा' के दौरान तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की घोषणा के अनुरूप फरवरी 2025 में राज्य मंत्रिमंडल ने मिथिला संस्कृत शोध संस्थान, दरभंगा के जीर्णोद्धार और पांडुलिपियों के संरक्षण के लिए करीब 57 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी थी। इस योजना के तहत वर्तमान में कार्य जारी है।