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Bihar: मां का छूटा साथ, पिता कमाने गए बेंगलुरु, अब फंदे से झूलती मिली 15 साल की ‘नाजुक’; गांव में पसरा मातम
Wed, 20 May 2026 10:49 PM IST
मुंगेर ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखीसराय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखीसराय
Published by: मुंगेर ब्यूरो
Updated Wed, 20 May 2026 10:49 PM IST
सार
लखीसराय के सूर्यगढ़ा थाना क्षेत्र के रामपुर गांव में 15 वर्षीय नाजुक कुमारी का शव कमरे में फंदे से लटका मिला। बचपन में मां को खो चुकी किशोरी को पिता के दोस्त ने पाला था। कुछ दिनों से वह मानसिक तनाव में थी। घटना के बाद गांव में मातम पसरा है।
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मामले की जांच में जुटी पुलिस
- फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
लखीसराय जिले के सूर्यगढ़ा थाना क्षेत्र अंतर्गत रामपुर गांव से एक बेहद दर्दनाक और भावुक कर देने वाली घटना सामने आई है। यहां 15 वर्षीय किशोरी नाजुक कुमारी का शव उसके कमरे में फंदे से लटका मिलने के बाद पूरे गांव में मातम पसरा हुआ है। जिस बच्ची ने बचपन से संघर्षों के बीच जिंदगी बिताई, उसकी अचानक मौत ने हर किसी को झकझोर कर रख दिया है। पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी हुई है।
25 दिन की उम्र में सिर से उठ गया था मां का साया
नाजुक कुमारी की जिंदगी की शुरुआत ही दर्द से हुई थी। जन्म के महज 25 दिन बाद उसकी मां का निधन हो गया था। परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। इसके बाद उसके पिता दीपक कुमार रोजगार की तलाश में बेंगलुरु चले गए, जहां वे मजदूरी कर परिवार का पालन-पोषण कर रहे थे। पिता की गैरमौजूदगी में उनके मित्र जगदीश सिंह के पुत्र रंजीत सिंह और उनकी पत्नी ने नाजुक को अपनी बेटी की तरह पाला-पोसा। उन्होंने उसकी पढ़ाई, देखभाल और हर जरूरत का जिम्मा उठाया। गांव में लोग भी नाजुक को बेहद शांत, संस्कारी और समझदार लड़की के रूप में जानते थे।
बंद कमरे ने बढ़ाई आशंका
बुधवार दोपहर जब काफी देर तक नाजुक के कमरे का दरवाजा नहीं खुला तो परिजनों को चिंता हुई। कई बार आवाज देने के बावजूद अंदर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली। इसके बाद जब दरवाजा खोला गया तो अंदर का दृश्य देखकर सभी के होश उड़ गए। कमरे में नाजुक का शव फंदे से लटका हुआ था। यह देखते ही परिवार में चीख-पुकार मच गई। कुछ ही देर में आसपास के ग्रामीण भी मौके पर पहुंच गए। पूरे गांव में शोक और सन्नाटा पसर गया।
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कुछ दिनों से गुमसुम रहती थी किशोरी
ग्रामीणों और परिजनों के अनुसार नाजुक पिछले कुछ समय से काफी चुप-चुप रहने लगी थी। वह मानसिक रूप से परेशान दिखाई देती थी और पहले की तरह किसी से ज्यादा बातचीत नहीं करती थी। आशंका जताई जा रही है कि किसी मानसिक तनाव के कारण उसने यह आत्मघाती कदम उठाया। हालांकि, घटना के पीछे की वास्तविक वजह क्या है, इसका खुलासा पुलिस जांच के बाद ही हो सकेगा।
प्रतिपालक का रो-रोकर बुरा हाल
घटना के बाद प्रतिपालक रंजीत सिंह गहरे सदमे में हैं। वहीं प्रतिपालक मां नाबालिग के शव से लिपटकर बार-बार बेहोश हो जा रही थीं। गांव की महिलाएं उन्हें संभालने की कोशिश करती रहीं। परिवार की हालत देखकर हर किसी की आंखें नम हो गईं।
ये भी पढ़ें- Bihar News: विक्रमशिला सेतु पर कब से दौड़ेंगे वाहन? प्रशासन ने बता दी बेली ब्रिज की फाइनल डेट
बेंगलुरु में मजदूरी कर रहे पिता को मिली बेटी की मौत की खबर
नाजुक के पिता दीपक कुमार जब बेंगलुरु में मजदूरी कर रहे थे, तभी उन्हें बेटी की मौत की सूचना मिली। खबर सुनते ही वे स्तब्ध रह गए। परिवार के अन्य सदस्यों का भी रो-रोकर बुरा हाल है।
पुलिस हर पहलू से कर रही जांच
सूर्यगढ़ा थानाध्यक्ष रोहित सिंह ने बताया कि सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची थी। फिलहाल परिजनों की ओर से कोई लिखित शिकायत नहीं दी गई है। शिकायत मिलने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। पुलिस पूरे मामले की हर पहलू से जांच कर रही है।
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25 दिन की उम्र में सिर से उठ गया था मां का साया
नाजुक कुमारी की जिंदगी की शुरुआत ही दर्द से हुई थी। जन्म के महज 25 दिन बाद उसकी मां का निधन हो गया था। परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। इसके बाद उसके पिता दीपक कुमार रोजगार की तलाश में बेंगलुरु चले गए, जहां वे मजदूरी कर परिवार का पालन-पोषण कर रहे थे। पिता की गैरमौजूदगी में उनके मित्र जगदीश सिंह के पुत्र रंजीत सिंह और उनकी पत्नी ने नाजुक को अपनी बेटी की तरह पाला-पोसा। उन्होंने उसकी पढ़ाई, देखभाल और हर जरूरत का जिम्मा उठाया। गांव में लोग भी नाजुक को बेहद शांत, संस्कारी और समझदार लड़की के रूप में जानते थे।
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बंद कमरे ने बढ़ाई आशंका
बुधवार दोपहर जब काफी देर तक नाजुक के कमरे का दरवाजा नहीं खुला तो परिजनों को चिंता हुई। कई बार आवाज देने के बावजूद अंदर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली। इसके बाद जब दरवाजा खोला गया तो अंदर का दृश्य देखकर सभी के होश उड़ गए। कमरे में नाजुक का शव फंदे से लटका हुआ था। यह देखते ही परिवार में चीख-पुकार मच गई। कुछ ही देर में आसपास के ग्रामीण भी मौके पर पहुंच गए। पूरे गांव में शोक और सन्नाटा पसर गया।
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कुछ दिनों से गुमसुम रहती थी किशोरी
ग्रामीणों और परिजनों के अनुसार नाजुक पिछले कुछ समय से काफी चुप-चुप रहने लगी थी। वह मानसिक रूप से परेशान दिखाई देती थी और पहले की तरह किसी से ज्यादा बातचीत नहीं करती थी। आशंका जताई जा रही है कि किसी मानसिक तनाव के कारण उसने यह आत्मघाती कदम उठाया। हालांकि, घटना के पीछे की वास्तविक वजह क्या है, इसका खुलासा पुलिस जांच के बाद ही हो सकेगा।
प्रतिपालक का रो-रोकर बुरा हाल
घटना के बाद प्रतिपालक रंजीत सिंह गहरे सदमे में हैं। वहीं प्रतिपालक मां नाबालिग के शव से लिपटकर बार-बार बेहोश हो जा रही थीं। गांव की महिलाएं उन्हें संभालने की कोशिश करती रहीं। परिवार की हालत देखकर हर किसी की आंखें नम हो गईं।
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बेंगलुरु में मजदूरी कर रहे पिता को मिली बेटी की मौत की खबर
नाजुक के पिता दीपक कुमार जब बेंगलुरु में मजदूरी कर रहे थे, तभी उन्हें बेटी की मौत की सूचना मिली। खबर सुनते ही वे स्तब्ध रह गए। परिवार के अन्य सदस्यों का भी रो-रोकर बुरा हाल है।
पुलिस हर पहलू से कर रही जांच
सूर्यगढ़ा थानाध्यक्ष रोहित सिंह ने बताया कि सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची थी। फिलहाल परिजनों की ओर से कोई लिखित शिकायत नहीं दी गई है। शिकायत मिलने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। पुलिस पूरे मामले की हर पहलू से जांच कर रही है।