{"_id":"6a0dcfd8ead19be66308b983","slug":"bihar-kargil-war-hero-parmanand-singh-cremated-with-full-military-honours-2026-05-20","type":"story","status":"publish","title_hn":"Bihar: कारगिल के वीर सपूत नायक परमानंद सिंह का निधन, सैन्य सम्मान के साथ दी गई अंतिम विदाई","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Bihar: कारगिल के वीर सपूत नायक परमानंद सिंह का निधन, सैन्य सम्मान के साथ दी गई अंतिम विदाई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, खगड़िया
Published by: मुंगेर ब्यूरो
Updated Wed, 20 May 2026 08:44 PM IST
विज्ञापन
सार
कारगिल युद्ध के वीर योद्धा और भारतीय सेना के पूर्व नायक परमानंद सिंह का लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। खगड़िया के पसराहा निवासी परमानंद सिंह को अगुवानी घाट पर पूरे सैन्य सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी जाएगी। इलाके में शोक की लहर है।
सैन्य सम्मान के साथ दी गई अंतिम विदाई
- फोटो : Amar Ujala
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
विस्तार
खगड़िया की धरती बुधवार को शोक और गर्व, दोनों भावनाओं से भर उठी। कारगिल युद्ध के वीर योद्धा और भारतीय सेना के पूर्व नायक परमानंद सिंह के निधन से पूरे इलाके में मातम पसरा हुआ है। लंबी बीमारी के बाद उन्होंने लखनऊ के कमांड हॉस्पिटल में अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर मिलते ही गांव से लेकर शहर तक लोगों की आंखें नम हो गईं।
दुश्मनों के खिलाफ हर मोर्चे पर डटकर लड़ी लड़ाई
गांधीनगर पसराहा निवासी नायक परमानंद सिंह सिर्फ एक सैनिक नहीं, बल्कि देशभक्ति, साहस और कर्तव्यनिष्ठा की मिसाल माने जाते थे। कारगिल युद्ध के दौरान उन्होंने दुश्मनों के खिलाफ मोर्चे पर डटकर लड़ाई लड़ी और भारतीय सेना का गौरव बढ़ाया। कठिन परिस्थितियों और बर्फीली चोटियों के बीच उन्होंने अदम्य साहस का परिचय देते हुए दुश्मनों के मंसूबों को नाकाम करने में अहम भूमिका निभाई थी।
युवाओं के लिए प्रेरणा स्रोत बने
सेना में सेवा के दौरान उनका जीवन अनुशासन, सादगी और राष्ट्रसेवा को समर्पित रहा। सेवानिवृत्ति के बाद भी वे युवाओं के लिए प्रेरणा स्रोत बने रहे। गांव और समाज में लोग उन्हें गर्व और सम्मान के साथ याद करते थे। उनका परिवार भी देशसेवा की परंपरा को आगे बढ़ा रहा है। बड़े पुत्र राजीव रंजन भारतीय सेना से सेवानिवृत्त हो चुके हैं, जबकि दूसरे पुत्र धीरज कुमार सॉफ्टवेयर इंजीनियर के रूप में कार्यरत हैं। परिवार के छोटे भाई और पूर्व सूबेदार धनिक लाल सिंह ने कहा कि उनका परिवार हमेशा राष्ट्रसेवा को सर्वोपरि मानता आया है। वहीं बड़े भाई अधिक लाल सिंह ने कहा कि परमानंद सिंह ने अपना पूरा जीवन मातृभूमि की सेवा में समर्पित कर दिया।
विज्ञापन
ये भी पढ़ें- Bihar: बिहार में हाईवे किनारे अतिक्रमण और अवैध पार्किंग पर बड़ा एक्शन, 20 दिन में हटेंगे ढाबे-होटल
बुधवार को उनके पार्थिव शरीर को अगुवानी घाट लाया गया, जहां उन्हें पूरे सैन्य सम्मान के साथ गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। अंतिम दर्शन के लिए बड़ी संख्या में लोगों पहुंचे। नायक परमानंद सिंह का निधन केवल उनके परिवार ही नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए अपूरणीय क्षति माना जा रहा है। उनकी वीरगाथा आने वाली पीढ़ियों को हमेशा देशभक्ति और राष्ट्रसेवा की प्रेरणा देती रहेगी।
दुश्मनों के खिलाफ हर मोर्चे पर डटकर लड़ी लड़ाई
गांधीनगर पसराहा निवासी नायक परमानंद सिंह सिर्फ एक सैनिक नहीं, बल्कि देशभक्ति, साहस और कर्तव्यनिष्ठा की मिसाल माने जाते थे। कारगिल युद्ध के दौरान उन्होंने दुश्मनों के खिलाफ मोर्चे पर डटकर लड़ाई लड़ी और भारतीय सेना का गौरव बढ़ाया। कठिन परिस्थितियों और बर्फीली चोटियों के बीच उन्होंने अदम्य साहस का परिचय देते हुए दुश्मनों के मंसूबों को नाकाम करने में अहम भूमिका निभाई थी।
विज्ञापन
विज्ञापन
युवाओं के लिए प्रेरणा स्रोत बने
सेना में सेवा के दौरान उनका जीवन अनुशासन, सादगी और राष्ट्रसेवा को समर्पित रहा। सेवानिवृत्ति के बाद भी वे युवाओं के लिए प्रेरणा स्रोत बने रहे। गांव और समाज में लोग उन्हें गर्व और सम्मान के साथ याद करते थे। उनका परिवार भी देशसेवा की परंपरा को आगे बढ़ा रहा है। बड़े पुत्र राजीव रंजन भारतीय सेना से सेवानिवृत्त हो चुके हैं, जबकि दूसरे पुत्र धीरज कुमार सॉफ्टवेयर इंजीनियर के रूप में कार्यरत हैं। परिवार के छोटे भाई और पूर्व सूबेदार धनिक लाल सिंह ने कहा कि उनका परिवार हमेशा राष्ट्रसेवा को सर्वोपरि मानता आया है। वहीं बड़े भाई अधिक लाल सिंह ने कहा कि परमानंद सिंह ने अपना पूरा जीवन मातृभूमि की सेवा में समर्पित कर दिया।
Trending Videos
ये भी पढ़ें- Bihar: बिहार में हाईवे किनारे अतिक्रमण और अवैध पार्किंग पर बड़ा एक्शन, 20 दिन में हटेंगे ढाबे-होटल
बुधवार को उनके पार्थिव शरीर को अगुवानी घाट लाया गया, जहां उन्हें पूरे सैन्य सम्मान के साथ गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। अंतिम दर्शन के लिए बड़ी संख्या में लोगों पहुंचे। नायक परमानंद सिंह का निधन केवल उनके परिवार ही नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए अपूरणीय क्षति माना जा रहा है। उनकी वीरगाथा आने वाली पीढ़ियों को हमेशा देशभक्ति और राष्ट्रसेवा की प्रेरणा देती रहेगी।