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Bihar: 26 हाथियों के झुंड का सफल प्रबंधन, एक माह तक चला अभियान; बिना क्षति के सुरक्षित झारखंड भेजा गया
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जमुई
Published by: मुंगेर ब्यूरो
Updated Fri, 27 Mar 2026 08:57 PM IST
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सार
जमुई वन प्रमंडल की सतर्कता और समन्वित प्रयासों से जिले में भटके 26 हाथियों के झुंड को सुरक्षित रूप से झारखंड के जंगलों में वापस भेज दिया गया। करीब एक महीने तक चले इस अभियान में न तो किसी मानव को नुकसान हुआ और न ही किसी हाथी को।
हाथियों के झुंड को सुरक्षित रूप से झारखंड के जंगलों में वापस भेज दिया गया।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
बिहार के जमुई वन प्रमंडल की सूझबूझ, सतर्कता और समन्वित प्रयासों का एक उत्कृष्ट उदाहरण सामने आया है, जहां भटक कर जिले में पहुंचे 26 हाथियों के झुंड को सफलतापूर्वक उनके प्राकृतिक आवास झारखंड के वन क्षेत्रों में वापस भेज दिया गया। करीब एक महीने तक जिले के विभिन्न वन क्षेत्रों में विचरण करने के बावजूद इस पूरे अभियान के दौरान किसी भी मानव या हाथी को कोई नुकसान नहीं हुआ।
जानकारी के अनुसार, हाथियों का यह झुंड 24 फरवरी 2026 को नवादा जिले के कौआकोल जंगल से जमुई के हरखाड़, जन्मस्थान और गरही के वन क्षेत्रों में प्रवेश किया था। इस झुंड में पांच छोटे बच्चे भी शामिल थे, जिनमें एक नवजात होने के कारण स्थिति और भी संवेदनशील हो गई थी। पूरे प्रवास के दौरान हाथियों का मूवमेंट मुख्य रूप से गिद्धेश्वर पहाड़ी और पाठकचक डैम के आसपास के क्षेत्रों में बना रहा।
ट्रैकिंग की व्यवस्था की गई
वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, एशियाई हाथी भोजन और पानी की तलाश में लंबी दूरी तय करते हैं। प्राकृतिक वन क्षेत्रों में चारे की कमी होने पर वे आसपास के खेतों की ओर आकर्षित हो जाते हैं, जहां गेहूं, गन्ना और मक्का जैसी फसलें उन्हें खींचती हैं। ऐसे में मानव-हाथी संघर्ष की संभावना बढ़ जाती है, जिसे नियंत्रित करना बड़ी चुनौती होती है।
इस चुनौतीपूर्ण स्थिति से निपटने के लिए वन प्रमंडल द्वारा 24 घंटे निगरानी और ट्रैकिंग की व्यवस्था की गई। रात के समय हाथियों की सटीक लोकेशन जानने के लिए थर्मल ड्रोन का सहारा लिया गया। वहीं, झुंड को सुरक्षित दिशा में आगे बढ़ाने के लिए ध्वनि, मशाल और सीमित पटाखों का नियंत्रित उपयोग किया गया, ताकि उन्हें बिना उत्तेजित किए उनके प्राकृतिक मार्ग की ओर मोड़ा जा सके।
ये भी पढ़ें- Bihar Crime: चाचा ने की एक ही परिवार के तीन बच्चों की निर्मम हत्या, खुद पर भी किया हमला, मचा कोहराम
इसके अलावा, विद्युत विभाग के साथ समन्वय स्थापित कर संवेदनशील क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति अस्थायी रूप से बंद कराई गई, जिससे किसी प्रकार की दुर्घटना की आशंका को खत्म किया जा सके। वन विभाग की इस सजग और संवेदनशील कार्यप्रणाली के कारण यह पूरा अभियान पूरी तरह सफल रहा और मानव-वन्यजीव सहअस्तित्व का एक सकारात्मक उदाहरण प्रस्तुत हुआ।
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जानकारी के अनुसार, हाथियों का यह झुंड 24 फरवरी 2026 को नवादा जिले के कौआकोल जंगल से जमुई के हरखाड़, जन्मस्थान और गरही के वन क्षेत्रों में प्रवेश किया था। इस झुंड में पांच छोटे बच्चे भी शामिल थे, जिनमें एक नवजात होने के कारण स्थिति और भी संवेदनशील हो गई थी। पूरे प्रवास के दौरान हाथियों का मूवमेंट मुख्य रूप से गिद्धेश्वर पहाड़ी और पाठकचक डैम के आसपास के क्षेत्रों में बना रहा।
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ट्रैकिंग की व्यवस्था की गई
वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, एशियाई हाथी भोजन और पानी की तलाश में लंबी दूरी तय करते हैं। प्राकृतिक वन क्षेत्रों में चारे की कमी होने पर वे आसपास के खेतों की ओर आकर्षित हो जाते हैं, जहां गेहूं, गन्ना और मक्का जैसी फसलें उन्हें खींचती हैं। ऐसे में मानव-हाथी संघर्ष की संभावना बढ़ जाती है, जिसे नियंत्रित करना बड़ी चुनौती होती है।
इस चुनौतीपूर्ण स्थिति से निपटने के लिए वन प्रमंडल द्वारा 24 घंटे निगरानी और ट्रैकिंग की व्यवस्था की गई। रात के समय हाथियों की सटीक लोकेशन जानने के लिए थर्मल ड्रोन का सहारा लिया गया। वहीं, झुंड को सुरक्षित दिशा में आगे बढ़ाने के लिए ध्वनि, मशाल और सीमित पटाखों का नियंत्रित उपयोग किया गया, ताकि उन्हें बिना उत्तेजित किए उनके प्राकृतिक मार्ग की ओर मोड़ा जा सके।
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इसके अलावा, विद्युत विभाग के साथ समन्वय स्थापित कर संवेदनशील क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति अस्थायी रूप से बंद कराई गई, जिससे किसी प्रकार की दुर्घटना की आशंका को खत्म किया जा सके। वन विभाग की इस सजग और संवेदनशील कार्यप्रणाली के कारण यह पूरा अभियान पूरी तरह सफल रहा और मानव-वन्यजीव सहअस्तित्व का एक सकारात्मक उदाहरण प्रस्तुत हुआ।