सब्सक्राइब करें

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
Hindi News ›   Bihar ›   Mp Mla Court historical decision bahubali ex mp surajbhan singh in Begusarai Bihar

Bihar: 30 साल पुराने मर्डर केस में बड़ा फैसला! सूरजभान सिंह को कोर्ट से मिली क्लीन चिट

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बेगूसराय Published by: मुंगेर ब्यूरो Updated Thu, 23 Apr 2026 02:09 PM IST
विज्ञापन
सार

Bihar: बेगूसराय एमपी-एमएलए कोर्ट ने 1996 के रंजीत सिंह हत्या मामले में सबूतों के अभाव में पूर्व सांसद सूरजभान सिंह और अन्य आरोपियों को बरी कर दिया। अदालत ने पाया कि अभियोजन पक्ष ठोस साक्ष्य पेश करने में विफल रहा और अधिकांश गवाह भी अपने बयान से मुकर गए, जिसके चलते 30 साल पुराना यह मामला समाप्त हो गया।

Mp Mla Court historical decision bahubali ex mp surajbhan singh in Begusarai Bihar
पूर्व सांसद सूरजभान सिंह - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार

बिहार की राजनीति में कभी बाहुबली छवि से पहचान बनाने वाले पूर्व सांसद सूरजभान सिंह के खिलाफ चल रहे पुराने आपराधिक मामलों में अब एक-एक कर न्यायिक मुहर लग रही है। तीन दशक पुराने चर्चित हत्या मामले में बेगूसराय की एमपी-एमएलए कोर्ट ने सबूतों के अभाव में पूर्व सांसद समेत अन्य आरोपियों को बरी कर दिया है। इस फैसले ने बेगूसराय में पुराने दौर की राजनीति और अपराध के गठजोड़ को लेकर एक बार फिर चर्चा छेड़ दी है।

Trending Videos


कोर्ट की टिप्पणी और सबूतों की कमी
बेगूसराय व्यवहार न्यायालय के विशेष न्यायाधीश ब्रजेश कुमार सिंह की अदालत ने 1996 के इस चर्चित हत्याकांड में स्पष्ट कहा कि अभियोजन पक्ष ठोस साक्ष्य प्रस्तुत करने में विफल रहा। अदालत में पेश किए गए सात गवाहों में से किसी ने भी घटना का समर्थन नहीं किया। इसी आधार पर कोर्ट ने पूर्व सांसद सूरजभान सिंह और सह-आरोपी अजीत सिंह को बरी करने का आदेश दिया।
विज्ञापन
विज्ञापन


पूरा मामला क्या था?
29 जुलाई 1996 को बरौनी थाना क्षेत्र के बिहट गांव में दिनदहाड़े रंजीत सिंह की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। शुरुआती एफआईआर में पूर्व सांसद सूरजभान सिंह का नाम शामिल नहीं था, लेकिन बाद में जांच के दौरान केस डायरी में उनका नाम जोड़ा गया। बचाव पक्ष के वकील मो. मंसूर आलम ने अदालत में दलील दी कि बाद में नाम जोड़े जाने से पूरे मामले की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े होते हैं। सुनवाई के दौरान कई गवाह अपने बयान से मुकर गए या उन्होंने घटना देखने से इनकार कर दिया। कुछ गवाहों को पक्षद्रोही घोषित किया गया, जबकि वादी की पहले ही मृत्यु हो चुकी थी। ऐसे में अभियोजन पक्ष का पूरा मामला अदालत में कमजोर पड़ गया।

सूरजभान सिंह के लिए बड़ी राहत
कभी अपराध की दुनिया से निकलकर राजनीति के शीर्ष तक पहुंचने वाले सूरजभान सिंह के लिए यह फैसला बड़ी राहत माना जा रहा है। लगातार पुराने मामलों में मिल रहे ऐसे फैसले यह संकेत दे रहे हैं कि उनके खिलाफ लंबित मामले धीरे-धीरे समाप्ति की ओर बढ़ रहे हैं।

ये भी पढ़ें: आधी रात प्रेमिका से मिलने आया प्रेमी, ग्रामीणों ने करा दी शादी, अब वीडियो हुआ वायरल

न्याय व्यवस्था और लंबी प्रक्रिया पर सवाल
यह मामला एक बार फिर इस सवाल को भी सामने लाता है कि क्या समय के साथ सबूत कमजोर पड़ जाते हैं, या फिर न्यायिक प्रक्रिया इतनी लंबी हो जाती है कि सच्चाई धुंधली पड़ने लगती है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

एप में पढ़ें

Followed