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Bihar News: जमुई में 14-15 फरवरी को ‘माटी का बल दंगल’, उपमुख्यमंत्री करेंगे उद्घाटन; श्रेयसी सिंह भी रहेंगी

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जमुई Published by: मुंगेर ब्यूरो Updated Fri, 13 Feb 2026 06:23 PM IST
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सार

खेल विभाग, बिहार एवं बिहार राज्य खेल प्राधिकरण के संयुक्त तत्वावधान में 14-15 फरवरी को श्रीकृष्ण सिंह स्टेडियम, जमुई में ‘माटी का बल दंगल’ प्रतियोगिता आयोजित होगी। कार्यक्रम का उद्घाटन उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी करेंगे। खेल मंत्री श्रेयसी सिंह मुख्य अतिथि होंगी।

Bihar News: jamui mati ka bal dangal 14-15 february 2026 in jamui news
दंगल - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

जमुई की धरती पर कुश्ती प्रेमियों के लिए बड़ा खेल आयोजन होने जा रहा है। 14 और 15 फरवरी को जिला मुख्यालय स्थित श्रीकृष्ण सिंह स्टेडियम में “माटी का बल दंगल” प्रतियोगिता का आयोजन किया जाएगा। दो दिवसीय इस प्रतियोगिता को लेकर प्रशासनिक एवं खेल विभागीय तैयारियां अंतिम चरण में हैं।

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शुक्रवार को समाहरणालय परिसर से डीएम नवीन और एसपी विश्वजीत दयाल ने प्रचार-प्रसार के लिए प्रदर्शनी रथ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। डीएम ने बताया कि यह दंगल प्रतियोगिता जिले ही नहीं, बल्कि पूरे राज्य के पहलवानों के लिए अपनी प्रतिभा दिखाने का महत्वपूर्ण मंच साबित होगी। प्रतियोगिता का उद्देश्य पारंपरिक मिट्टी की कुश्ती को बढ़ावा देना और ग्रामीण प्रतिभाओं को अवसर प्रदान करना है।
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कार्यक्रम के उद्घाटनकर्ता के रूप में बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी उपस्थित रहेंगे। मुख्य अतिथि के तौर पर खेल विभाग की मंत्री श्रेयसी सिंह शिरकत करेंगी, जबकि विशिष्ट अतिथि के रूप में बिहार कुश्ती संघ के अध्यक्ष विशाल सिंह मौजूद रहेंगे। 

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डीएम ने जानकारी दी कि राज्यभर के पहलवानों के लिए ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से निबंधन की व्यवस्था की गई है। सुरक्षा, चिकित्सा, दर्शक दीर्घा और अखाड़ा व्यवस्था को लेकर प्रशासन द्वारा व्यापक इंतजाम किए जा रहे हैं। बिहार में “माटी का बल दंगल” पारंपरिक कुश्ती की एक लोकप्रिय परंपरा रही है, जिसमें पहलवान मिट्टी के अखाड़े में शक्ति, तकनीक और सहनशीलता का प्रदर्शन करते हैं।

यह प्रतियोगिता ग्रामीण संस्कृति और लोक परंपरा को सशक्त बनाने का माध्यम मानी जाती है। दंगल युवाओं में अनुशासन, परिश्रम और खेल भावना का विकास करता है। इस परंपरा को बढ़ावा देने में विश्वनाथ सिंह का नाम भी प्रमुख रूप से जुड़ा रहा है। वे ग्रामीण अखाड़ा संस्कृति के संरक्षण और दंगल आयोजन को सामाजिक एकता के मंच के रूप में स्थापित करने के प्रयासों के लिए जाने जाते हैं। आयोजकों को उम्मीद है कि यह प्रतियोगिता जमुई में खेल संस्कृति को नई पहचान देगी।

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