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Bihar News: गहरी नींद से जागा सिस्टम; जमुई में दो जर्जर पुल किए बंद, 100 से अधिक गांव प्रभावित

Wed, 06 May 2026 06:14 PM IST
मुंगेर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जमुई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जमुई Published by: मुंगेर ब्यूरो Updated Wed, 06 May 2026 06:14 PM IST
सार

Bihar News: जमुई में जर्जर नरियाना और मांगोबंदर पुलों को एहतियातन बंद कर दिया गया है। इससे दर्जनों गांवों का संपर्क प्रभावित हुआ है और लोगों को 60 किमी अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ रही है। प्रशासन ने सुरक्षा का हवाला दिया, ग्रामीणों ने स्थायी समाधान की मांग की। पढ़ें पूरी खबर...

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System Wakes from Deep Slumber Two Dilapidated Bridges Closed in Jamui, Over 100 Villages Affected
दो जर्जर पुल हुए बंद - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

बिहार के भागलपुर में विक्रमशिला सेतु के क्षतिग्रस्त होने की घटना के बाद अब जमुई जिला प्रशासन सतर्क मोड में नजर आ रहा है। संभावित खतरे को देखते हुए प्रशासन ने खैरा–सोनो मुख्य मार्ग पर स्थित नरियाना और मांगोबंदर पुलों को एहतियातन बंद कर दिया है। बुधवार से इन पुलों पर छोटे और बड़े सभी प्रकार के वाहनों की आवाजाही पूरी तरह प्रतिबंधित कर दी गई है।
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पिछले पांच वर्षों से जर्जर हालत में पुल
प्रशासन के अनुसार, ये दोनों पुल पिछले करीब पांच वर्षों से जर्जर स्थिति में थे और कभी भी बड़ा हादसा हो सकता था। इसी को ध्यान में रखते हुए सख्त कदम उठाते हुए पुलों के दोनों ओर जेसीबी मशीन से गड्ढे खोद दिए गए हैं, ताकि कोई भी वाहन जबरन पार न कर सके। हालांकि, स्थानीय लोगों की सुविधा के लिए नदी के रास्ते अस्थायी डायवर्सन बनाया गया है, जिससे किसी तरह आवागमन जारी रखा जा सके। इस फैसले का सीधा असर खैरा प्रखंड के कई गांवों पर पड़ा है। नरियाना, चाचो, हरदी मोह, मांगोबंदर, बाघाखाड़, निजुआरा और मौरा समेत दर्जनों गांवों का जिला मुख्यालय से संपर्क लगभग कट गया है। खासकर मांगोबंदर पुल बंद होने के कारण लोगों को अब गिद्धौर और झाझा होकर करीब 60 किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ रही है, जिससे समय के साथ-साथ यात्रा खर्च भी बढ़ गया है।
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आमजन की सुरक्षा को देखते हुए लिया फैसला
ग्रामीणों की चिंता आने वाले मानसून को लेकर और बढ़ गई है। उनका कहना है कि नदी में जलस्तर बढ़ने पर यह अस्थायी डायवर्सन बह सकता है, जिससे संपर्क पूरी तरह समाप्त हो जाएगा और हालात और गंभीर हो सकते हैं। खैरा प्रखंड विकास पदाधिकारी शेखर सुमन ने बताया कि वर्ष 2021-22 में ही इन पुलों को जर्जर घोषित कर दिया गया था। उन्होंने कहा कि आमजन की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए यह निर्णय लिया गया है। वहीं, ग्रामीणों का मानना है कि प्रशासन ने यह कदम भले ही देर से उठाया हो, लेकिन अब यह जरूरी हो गया था। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि जल्द से जल्द स्थायी समाधान निकाला जाए और नए पुलों का निर्माण कराया जाए, ताकि भविष्य में ऐसी परेशानी का सामना न करना पड़े।
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