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Bihar: रक्षा मंत्री ने क्यों लिया संजीव डोम का नाम? बिहार के इस अगड़े ने सरनेम बदलकर दलितों के नाम किया जीवन

Tue, 28 Jan 2025 05:36 PM IST
हिमांशु प्रियदर्शी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, खगड़िया
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, खगड़िया Published by: हिमांशु प्रियदर्शी Updated Tue, 28 Jan 2025 05:36 PM IST
सार

Sanjeev Dom: दिल्ली में आरएसएस की पत्रिका के लोकार्पण के दौरान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने समाजसेवी संजीव डोम का नाम लिया, जिसके बाद से हर ओर संजीव डोम पर चर्चा शुरू हो गई। इस खबर में जानें कि आखिर संजीव 'डोम' कैसे बने और उन्होंने क्या काम किए?

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Khagaria News: Rajnath Singh mentioned Sanjeev Dom, upper caste man changed surname, dedicated life to Dalits
दलितों और पिछड़ों के उत्थान के काम में जुटे संजीव डोम - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

देश के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने जब राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की पत्रिका ‘सेवा समर्पण’ के लोकार्पण कार्यक्रम में खगड़िया के संजीव डोम का जिक्र किया, तो यह नाम पूरे देश में चर्चा का विषय बन गया। उन्होंने संजीव डोम के कार्यों को न केवल सराहा, बल्कि समाज में बदलाव के उनके प्रयासों की भी प्रशंसा की। रक्षा मंत्री का यह वक्तव्य वायरल हुआ और अब हर कोई जानना चाहता है कि आखिर कौन हैं संजीव डोम, जिन्होंने अपनी ऊंची जाति को त्यागकर वंचितों और दलितों के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया।

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जातिगत भेदभाव के खिलाफ छेड़ी मुहिम
जानकारी के मुताबिक, संजीव डोम का जन्म एक अगड़ी जाति के परिवार में हुआ। लेकिन उन्होंने समाज में व्याप्त जातिगत भेदभाव को करीब से देखा। 2006 में उन्होंने अपना जीवन दलित, वंचित और विशेष रूप से डोम समुदाय के उत्थान के लिए समर्पित कर दिया। संजीव ने सबसे पहले मैला ढोने और जूठी पत्तलों को साफ करने की प्रथा के खिलाफ अभियान शुरू किया।
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संजीव का कहना है कि जब सभी मनुष्यों की जननी एक है, तो समाज को जाति और समुदाय में क्यों बांटा गया है? जो लोग हमारी गंदगी साफ करते हैं, उनके प्रति समाज में सम्मान होना चाहिए। उनके इस विचार ने न केवल डोम समुदाय को नई दिशा दी, बल्कि समाज में बदलाव का बीज भी बोया।
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सरनेम बदला और बना लिया डोम
संजीव डोम ने ऊंची जाति में जन्म लेने के बावजूद अपने सरनेम को बदलकर ‘डोम’ कर लिया। उन्होंने ऐसा निर्णय तब लिया जब उन्होंने गरीब और वंचित समुदाय के लोगों को जूठी पत्तलें चाटते और मैला उठाते देखा। संजीव कहते हैं कि जब तक मैं खुद इस जाति का हिस्सा नहीं बनूंगा, तब तक समाज में कोई बदलाव संभव नहीं होगा। उनके इस कदम ने उन्हें दलित समुदाय के बीच एक आदर्श बना दिया। वे भेदभाव और छुआछूत के खिलाफ एक आंदोलन का चेहरा बन गए।
 
राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित
संजीव डोम के कार्यों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहा गया। उन्हें कई प्रतिष्ठित सम्मान मिल चुके हैं, जिनमें शामिल हैं:

  • फणीश्वर नाथ रेणु पुरस्कार (झारखंड)
  • आंबेडकर सम्मान (उत्तर प्रदेश)
  • लोकबंध उपाधि (नालंदा यूनिवर्सिटी)
  • उपराष्ट्रपति द्वारा सम्मान (2020)
  • यूएन संस्था का गोल्ड मेडल (2019 और 2023)

इसके अलावा अभिनेता आमिर खान के ‘सत्यमेव जयते’ कार्यक्रम में भी वे शामिल हो चुके हैं। उनके जीवन पर कई डॉक्यूमेंट्री और शॉर्ट फिल्में बनाई गई हैं। मशहूर फिल्म डायरेक्टर प्रकाश झा ने भी उनके जीवन पर आधारित एक शॉर्ट फिल्म बनाई है।
 
रक्षा मंत्री ने की भावुक प्रशंसा
दिल्ली में आरएसएस की पत्रिका के लोकार्पण के दौरान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने संजीव डोम का जिक्र करते हुए कहा कि संजीव जैसे लोग समाज को प्रेरणा देते हैं। उन्होंने न केवल अपने सरनेम को बदला, बल्कि अपना जीवन भी उन लोगों की सेवा में लगा दिया, जिनकी ओर समाज ध्यान नहीं देता। उनके दिल में नारायण का वास है। राजनाथ सिंह के इस बयान के बाद संजीव डोम के कार्यों की चर्चा हर ओर होने लगी। यह सम्मान न केवल संजीव के जीवन की उपलब्धियों को मान्यता देता है, बल्कि यह समाज के लिए एक प्रेरणा का स्रोत भी बनता है।


 
दलित उत्थान के लिए जारी है संघर्ष
संजीव डोम का कहना है कि उनका संघर्ष तब तक जारी रहेगा, जब तक समाज में दलित, वंचित और डोम समुदाय को उनका हक और सम्मान नहीं मिल जाता। उनका उद्देश्य सिर्फ उत्थान नहीं, बल्कि समाज के भीतर भेदभाव को जड़ से खत्म करना है।

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