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Bihar News: गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड की ओर बिहार, 10 से 28 फरवरी तक चलेगा फाइलेरिया उन्मूलन एमडीए अभियान

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंगेर Published by: मुंगेर ब्यूरो Updated Thu, 05 Feb 2026 09:10 PM IST
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सार

Patna News: बिहार में फाइलेरिया उन्मूलन को लेकर 10 से 28 फरवरी तक एमडीए अभियान चलेगा। करीब डेढ़ करोड़ लोगों को दवा दी जाएगी। स्वास्थ्य विभाग का लक्ष्य 2030 तक जिलों को फाइलेरिया मुक्त बनाना और गिनीज रिकॉर्ड दर्ज कराना है।

Bihar towards Guinness World Record, Filariasis Elimination MDA campaign to run from February 10 to 28
जानकारी देते स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

फाइलेरिया उन्मूलन के लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में बिहार का स्वास्थ्य विभाग एक बड़े अभियान की शुरुआत करने जा रहा है। गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड में नाम दर्ज कराने के उद्देश्य से राज्यभर में 10 फरवरी से 28 फरवरी तक एमडीए यानी मास ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन अभियान चलाया जाएगा। इस दौरान करीब डेढ़ करोड़ लोगों को फाइलेरिया से बचाव की दवा खिलाई जाएगी।

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मीडिया उन्मुखीकरण कार्यक्रम में दी गई जानकारी
अभियान की तैयारी और इसके महत्व को लेकर सदर अस्पताल के सभागार में एकदिवसीय मीडिया उन्मुखीकरण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में सिविल सर्जन डॉ. संजय कुमार, अपर मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. अशोक सिंह सहित स्वास्थ्य विभाग के कई अधिकारी और कर्मी मौजूद रहे।
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जानकारी देते स्वागत विभाग के अधिकारी
 
शेखपुरा समेत सभी जिलों में होगा एमडीए अभियान
अपर मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. अशोक सिंह ने बताया कि एमडीए अभियान शेखपुरा सहित बिहार के सभी जिलों में 10 फरवरी से 28 फरवरी तक चलाया जाएगा। शेखपुरा जिले में अब तक 858 फाइलेरिया मरीज चिन्हित किए गए हैं, जिनका उपचार किया जा रहा है।
 
जिले में दवा वितरण की विस्तृत तैयारी
डॉ. अशोक सिंह के अनुसार शेखपुरा जिले में एमडीए अभियान के तहत 6,92,209 लोगों को दवा खिलाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके लिए कुल 358 टीमों का गठन किया गया है। प्रखंड और जिला स्तर पर मॉनिटरिंग टीम बनाई गई है, जो बूथ स्तर पर कार्यरत कर्मियों की निगरानी करेगी। वरीय अधिकारी भी विभिन्न क्षेत्रों में जाकर अभियान का निरीक्षण करेंगे।

जानकारी देते स्वागत विभाग के अधिकारी

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फाइलेरिया के लक्षण और जांच की प्रक्रिया
उन्होंने बताया कि फाइलेरिया के शुरुआती चरण में कोई विशेष लक्षण दिखाई नहीं देता, लेकिन लगभग पांच वर्षों के बाद पैरों और हाथों में सूजन, हाथीपांव, हाइड्रोसील, बुखार और दर्द जैसे लक्षण उभरने लगते हैं। अभियान से पहले जिले के विभिन्न क्षेत्रों में नाइट ब्लड सर्वे भी कराया जाता है।
 
मच्छर से फैलने वाला रोग और दवा का महत्व
फाइलेरिया मादा क्यूलेक्स मच्छर के काटने से फैलने वाला संक्रामक रोग है। इससे बचाव के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा एक साथ तीन प्रकार की दवाओं का सेवन कराया जाता है। दवा लेने के बाद कुछ लोगों में सिरदर्द, बदन दर्द, बुखार, उल्टी या खुजली जैसी हल्की प्रतिक्रियाएं हो सकती हैं, जिन्हें सामान्य बताया गया है।
 
2030 तक फाइलेरिया मुक्त जिला बनाने का लक्ष्य
स्वास्थ्य विभाग का लक्ष्य वर्ष 2030 तक जिले को फाइलेरिया मुक्त बनाना है। उल्लेखनीय है कि राज्य के सभी जिलों में सरकार की ओर से हर वर्ष एक बार घर-घर जाकर एमडीए अभियान के तहत दवा खिलाई जाती है।

 

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