Bihar news: मौसी की शादी से पहले उजड़ गया घर का चिराग, कार्ड बांटकर लौट रहे इंटर छात्र की नहर में डूबने से मौत
Betttiah news : 25 फरवरी को घर में शहनाई बजनी थी। मौसी की शादी की तैयारियों में पूरा परिवार जुटा था। खुशियों के बीच 19 वर्षीय अभिषेक कुमार अपनी मौसी का न्योता बांटने मामा के साथ निकला था।
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25 फरवरी को जिस घर में शहनाई बजनी थी, वहां अब मातम पसरा है। मौसी की शादी की तैयारियों में जुटा परिवार खुशियों में डूबा था। 19 वर्षीय अभिषेक कुमार अपनी मौसी का न्योता बांटने मामा के साथ निकला था। किसी ने कल्पना भी नहीं की थी कि यह सफर उसकी जिंदगी का आखिरी सफर साबित होगा।
पश्चिमी चंपारण जिले के बगहा पुलिस जिला अंतर्गत रामनगर-भैरोगंज मुख्य पथ पर मोतीपुर पुल के समीप तेज रफ्तार ट्रैक्टर ने उसकी बाइक में जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण थी कि बाइक अनियंत्रित होकर त्रिवेणी नहर की उपवितरणी सायफन में जा गिरी। सायफन पर न रेलिंग है और न ही कोई चेतावनी बोर्ड—यह लापरवाही एक और घर की खुशियां छीन ले गई।
बाइक पर सवार उसका मामा शहबाग चंद्रवंशी किसी तरह तैरकर बाहर निकल आया, लेकिन अभिषेक गहरे पानी में समा गया। काफी खोजबीन और मशक्कत के बाद उसका शव बाहर निकाला गया। मृतक की पहचान नौतन थाना क्षेत्र के धूमनगर कुर्मी टोला निवासी भरत राउत के पुत्र अभिषेक कुमार के रूप में हुई है। वह इंटर द्वितीय वर्ष का छात्र था और भाई-बहनों में सबसे बड़ा था। घर की उम्मीद, मां-बाप का सहारा और बहनों का अभिमान एक पल में खत्म हो गया।
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प्रत्यक्षदर्शी मामा ने बताया कि वे परसौनी गांव से कार्ड बांटकर लौट रहे थे, तभी सामने से आ रहे ट्रैक्टर ने बाइक में टक्कर मार दी। वह खुद तो किसी तरह तैरकर बाहर निकल आया, लेकिन अपनी भगिनी को नहीं बचा सका। उसकी आवाज में दर्द साफ झलक रहा था।
घटना की सूचना मिलते ही परिजन और ग्रामीण मौके पर पहुंच गए। सायफन पर रेलिंग नहीं होने को लेकर लोगों में आक्रोश फैल गया। ग्रामीणों ने सड़क जाम कर मुआवजे और सुरक्षा इंतजाम की मांग की। उनका कहना है कि इस स्थान पर पहले भी कई हादसे हो चुके हैं, लेकिन संबंधित विभागों ने कभी गंभीरता नहीं दिखाई। करीब तीन घंटे तक जाम की स्थिति बनी रही। बाद में प्रशासनिक अधिकारियों के समझाने-बुझाने पर मामला शांत हुआ। शव को पोस्टमार्टम के लिए अनुमंडलीय अस्पताल बगहा भेज दिया गया।
मोतीपुर के पास स्थित इस सायफन पर सुरक्षा के कोई पुख्ता इंतजाम नहीं हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि कई शिकायतों के बावजूद न तो आरडब्ल्यूडी और न ही सिंचाई विभाग ने ठोस कदम उठाया। अभिषेक की मौत ने एक बार फिर विभागीय लापरवाही को उजागर कर दिया है, जिसकी कीमत मासूम जिंदगियां चुका रही हैं। अब 25 फरवरी को जब शहनाई बजेगी, तो उसमें एक मां की सिसकियां और सूना आंगन भी शामिल होंगे। खुशियों का न्योता बांटने निकला बेटा, खुद ही दुनिया से रुख्सत हो गया।