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Bihar News : तिरंगे के साथ शहीद रमेश कुमार का पार्थिव शरीर पैतृक गांव पहुंचा, दर्शन करने उमड़ा जनसैलाब

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वैशाली Published by: तिरहुत-मुजफ्फरपुर ब्यूरो Updated Tue, 27 Jan 2026 02:07 PM IST
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सार

जम्मू-कश्मीर में ड्यूटी के दौरान शहीद हुए सहदेई बुजुर्ग प्रखंड की मुरौवतपुर पंचायत के सीआरपीएफ जवान का पार्थिव शरीर जैसे ही पैतृक गांव पहुंचा, माहौल शोक और गर्व दोनों से भर गया। हजारों लोग अंतिम दर्शन के लिए उमड़ पड़े।

Bihar News: Martyr Ramesh Kumar’s body reaches village draped in tricolour, crowd pays tribute
शहीद जवान को श्रद्धांजलि देते परिजन
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विस्तार
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वैशाली जिले के महनार अनुमंडल क्षेत्र अंतर्गत सहदेई बुजुर्ग प्रखंड की मुरौवतपुर पंचायत (वार्ड संख्या-5) निवासी सीआरपीएफ जवान रमेश कुमार ड्यूटी के दौरान जम्मू-कश्मीर के उड़ी सेक्टर में शहीद हो गए। शहादत की खबर मिलते ही मुरौवतपुर गांव समेत पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई।
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सोमवार को जैसे ही शहीद जवान का पार्थिव शरीर उनके पैतृक गांव पहुंचा, तिरंगे में लिपटे शव के अंतिम दर्शन के लिए लोगों का सैलाब उमड़ पड़ा। अंतिम दर्शन करने पहुंचे लोगों की आंखें नम हो गईं। स्वजनों की चीख-पुकार देख वहां मौजूद हर व्यक्ति भावुक हो उठा।
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शहीद रमेश कुमार स्वर्गीय राम इकबाल राय और स्वर्गीय मन्ती देवी के पुत्र थे। वे राष्ट्रीय राइफल्स की 62 आरआर बटालियन में नायक के पद पर तैनात थे। उन्होंने वर्ष 2013 में राष्ट्रीय राइफल्स जॉइन किया था और उनका प्रशिक्षण रुड़की में हुआ था। वर्तमान में वे जम्मू-कश्मीर के उड़ी सेक्टर में देश सेवा में तैनात थे, जहां ड्यूटी के दौरान उन्होंने मातृभूमि के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया।

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रमेश कुमार नौ भाई-बहनों में सबसे छोटे थे। शहादत की सूचना दूरभाष के माध्यम से मिलते ही परिजनों में कोहराम मच गया। पत्नी प्रियंका देवी, बड़े भाई विनोद राय सहित अन्य स्वजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। शहीद अपने पीछे पत्नी के अलावा 10 वर्षीय पुत्र ईशान और 8 वर्षीय पुत्री इशानी को छोड़ गए हैं। ग्रामीणों के अनुसार रमेश कुमार करीब छह माह पूर्व अपनी भतीजी की शादी में शामिल होने के लिए घर आए थे। किसी ने नहीं सोचा था कि वही मुलाकात उनकी आखिरी होगी।

शवयात्रा के दौरान ग्रामीणों, जनप्रतिनिधियों और युवाओं ने हाथों में तिरंगा लेकर शहीद रमेश कुमार अमर रहें और भारत माता की जय के गगनभेदी नारे लगाए। पूरा गांव गमगीन माहौल में डूबा रहा लेकिन हर चेहरे पर देश के लिए बलिदान देने वाले वीर सपूत पर गर्व भी साफ झलक रहा था। शहीद रमेश कुमार की शहादत को महनार अनुमंडल क्षेत्र के लोग हमेशा याद रखेंगे। उनका बलिदान न केवल क्षेत्र बल्कि पूरे देश की आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनेगा।

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