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Muzaffarpur: अवैध जमाबंदी पर DM का सख्त एक्शन: तत्कालीन सीओ पर निलंबन की सिफारिश, राजस्व कर्मचारी निलंबित

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुजफ्फरपुर Published by: तिरहुत-मुजफ्फरपुर ब्यूरो Updated Wed, 14 Jan 2026 10:41 AM IST
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सार

मुजफ्फरपुर के मोतीपुर अंचल में बियाडा की 16.86 एकड़ सरकारी भूमि की अवैध जमाबंदी कर उसे निजी व्यक्तियों के नाम स्थानांतरित किए जाने के मामले में जिलाधिकारी सुब्रत सेन ने त्वरित और कड़ा एक्शन लिया।

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मुजफ्फरपुर में सरकारी जमीन की अवैध जमाबंदी पर डीएम का कड़ा एक्शन - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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मुजफ्फरपुर जिले के मोतीपुर अंचल अंतर्गत बियाडा की 16.86 एकड़ सरकारी भूमि की अवैध जमाबंदी कर उसे निजी व्यक्तियों के नाम स्थानांतरित करने के गंभीर मामले में जिलाधिकारी सुब्रत सेन ने कड़ा एक्शन लिया है। सरकारी भूमि के साथ की गई अनियमितता की जांच के बाद तत्कालीन अंचलाधिकारी श्रीमती रुचि कुमारी के निलंबन की अनुशंसा संबंधित विभाग को भेजी गई है। वहीं राजस्व कर्मचारी नागेंद्र प्रसाद ठाकुर को निलंबित कर दिया गया और उनके विभागीय कार्रवाई संचालित करने का आदेश जारी किया गया। निलंबन अवधि के दौरान इनका मुख्यालय अंचल कार्यालय, अंडाई में निर्धारित किया गया है।
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जमाबंदी में अनियमितता का खुलासा

रिपोर्ट के अनुसार, 7 मई 2025 को ऑनलाइन परिमार्जन प्लस प्रणाली के माध्यम से एक निजी व्यक्ति के नाम से मौजा बरियारपुर के खाता और खेसरा से 9.56 एकड़ भूमि की जमाबंदी सृजित की गई थी। यह जमाबंदी राजस्व कर्मचारी नागेंद्र ठाकुर की अनुशंसा के आधार पर तत्कालीन अंचलाधिकारी मोतीपुर द्वारा ऑनलाइन स्वीकृत की गई थी। जांच में यह भी स्पष्ट हुआ कि इस जमाबंदी के संबंध में अंचल कार्यालय में कोई वैध ऑफलाइन अभिलेख या दस्तावेज उपलब्ध नहीं थे।
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बिना वैध दस्तावेज निजीकरण

अर्थात बिना किसी ठोस आधार और वैधानिक प्रक्रिया का पालन किए बियाडा को हस्तांतरित सरकारी भूमि को निजी व्यक्तियों के पक्ष में ऑनलाइन जमाबंदी कर दी गई। मोतीपुर अंतर्गत अंचल के मौजा बरियारपुर में कुल 61.33 एकड़ भूमि मोतीपुर शुगर फैक्ट्री के नाम से दर्ज थी, जिसे नियमानुसार बियाडा को हस्तांतरित किया गया। इसमें से 7.98 एकड़ भूमि का दाखिल-खारिज बियाडा के पक्ष में पूर्ण हो चुका है, जबकि शेष 53.35 एकड़ भूमि के दाखिल-खारिज के लिए बियाडा द्वारा आवेदन किया गया था।

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इसी प्रक्रिया के दौरान 16.86 एकड़ भूमि की अवैध जमाबंदी निजी व्यक्तियों के नाम कर दी गई। जांच में यह भी सामने आया कि एक व्यक्ति के नाम से 9.56 एकड़ और उसी मौजा में दूसरे व्यक्ति के नाम 7.30 एकड़ भूमि की जमाबंदी की गई। ये सभी जमाबंदियां ऑनलाइन परिमार्जन प्लस के माध्यम से की गईं, जबकि इनके पक्ष में कोई वैध दस्तावेज या पूर्व स्वीकृत प्रक्रिया मौजूद नहीं थी।

डीएम ने की त्वरित और कठोर कार्रवाई

जमीन से जुड़े जनहित के मामलों को संवेदनशील मानते हुए डीएम सुब्रत सेन ने पूरी तत्परता के साथ त्वरित और कठोर कार्रवाई की है। जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि इस प्रकार की लापरवाही को कभी स्वीकार नहीं किया जाएगा। इससे पहले सरकारी जमीन को गलत तरीके से हस्तांतरित करने के मामले में कांटी अंचल की अंचल अधिकारी पर कार्रवाई हो चुकी है।

इस मामले में मोतीपुर की तत्कालीन अंचल अधिकारी के खिलाफ विभागीय कारवाई के प्रपत्र जारी कर दिए गए हैं। इसके अलावा, इस गलत कृत्य में शामिल मोतीपुर के राजस्व कर्मचारी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। जिलाधिकारी ने कहा कि कोई भी पदाधिकारी या कर्मचारी सरकारी नियमों की अवहेलना करता है या अपने दायित्वों का ईमानदारी से पालन नहीं करता है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। साथ ही जिले के सभी अंचल अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे अपने सरकारी आवास में ही रहें। शिकायत मिलने और जांच के उपरांत आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

 

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