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Bihar: जिंदा भी है या नहीं, खबर नहीं; विदेशी जेल में बंद हैं मर्चेंट नेवी अफसर, बेबस मां ने लगाई मदद की गुहार
Tue, 04 Aug 2026 10:32 AM IST
तिरहुत-मुजफ्फरपुर ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुजफ्फरपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुजफ्फरपुर
Published by: तिरहुत-मुजफ्फरपुर ब्यूरो
Updated Tue, 04 Aug 2026 10:32 AM IST
सार
25 वर्षीय मुजफ्फरपुर निवासी यश सिंह पिछले पांच महीने से चीन के शंघाई स्थित जियांग्सू डिटेंशन सेंटर में बंद है। उसकी मां सीमा सिंह ने डीएम और एसएसपी से बेटे की सुरक्षित वापसी और उससे एक बार बात कराने की गुहार लगाई है। परिवार का कहना है कि गिरफ्तारी के बाद से अब तक कोई संपर्क नहीं हो सका है।
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शंघाई की जेल में बंद है बिहार का बेटा
- फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
मुजफ्फरपुर जिले का एक युवक चीन के शंघाई स्थित जेल में बंद है। मामले को लेकर उसकी मां ने अब जिलाधिकारी (डीएम) और वरीय पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) से मदद की गुहार लगाई है।
मेरा बेटा जिंदा है या नहीं
अपने दिए गए आवेदन में पीड़िता सीमा सिंह ने कहा, 'मेरा बेटा जिंदा है या नहीं और वह अभी किस हाल में है, इसकी भी जानकारी नहीं है। पिछले पांच महीने से उसकी आवाज तक नहीं सुनी है। बस एक बार उससे बात करा दीजिए।' यह कहते-कहते उनकी आंखें भर आती हैं।
शंघाई की जेल में पांच महीने से बंद है बेटा
पीड़िता ने बताया कि उनका इकलौता बेटा यश सिंह (25 वर्ष) पिछले पांच महीने से चीन के शंघाई स्थित जियांग्सू डिटेंशन सेंटर में बंद है। पीड़िता मां का कहना है कि इस दौरान न तो बेटे की कोई तस्वीर मिली, न वीडियो कॉल हो सकी और न ही एक बार उससे बात हो पाई। उन्होंने मुजफ्फरपुर के डीएम कुमार गौरव और वरीय पुलिस अधीक्षक कांतेश कुमार मिश्र को ज्ञापन सौंपकर बेटे की सुरक्षित भारत वापसी के लिए हस्तक्षेप करने की मांग की है। सीमा सिंह ने बताया कि वह पहले ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, विदेश मंत्रालय, भारतीय काउंसलेट, डीजी शिपिंग समेत कई सरकारी संस्थानों को इस मामले से अवगत करा चुकी हैं। इसके अलावा जिले के सांसद एवं केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. राजभूषण चौधरी से भी उन्होंने मदद की अपील की है। लेकिन पांच महीने बीत जाने के बावजूद बेटे की रिहाई की दिशा में कोई ठोस परिणाम सामने नहीं आया है।
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पता नहीं मेरा बेटा किस हालत में है
सीमा सिंह ने कहा, 'पांच महीने में एक बार भी बेटे की आवाज नहीं सुन पाई हूं। यही मेरी सबसे बड़ी चिंता है। मुझे यह भी नहीं पता कि वह किस हालत में है। बताया जा रहा है कि वह बीमार और घायल है। उसका मोबाइल भी चीनी पुलिस ने जब्त कर लिया है। बेटे की आवाज सुने बिना अब जीना मुश्किल हो गया है। मैं तलाकशुदा महिला हूं और मेरा बेटा ही मेरा एकमात्र सहारा है।'
28 फरवरी को आखिरी बार हुई थी बात
सीमा सिंह के अनुसार, उनकी बेटे से आखिरी बार 28 फरवरी 2026 को बात हुई थी। उस समय यश सिंह ने बताया था कि उसका जहाज मरम्मत के लिए चीन के शंघाई स्थित जियांग्सू पोर्ट पर रुका हुआ है। उसी दिन उसे अपनी पुरानी कंपनी से कुछ बकाया भुगतान मिला था। उसने बताया था कि उसके साथ पाकिस्तान, बांग्लादेश और अन्य देशों के कई साथी काम करते हैं और सभी पार्टी की बात कर रहे हैं। यश ने कहा था कि शाम को वह सभी को पार्टी देगा। इसके बाद दोनों की बातचीत समाप्त हो गई।
ये भी पढ़ें- बेउर जेल में बड़ा प्रशासनिक विवाद, प्रभार सौंपने पहुंचे पांच निलंबित अधिकारियों पर FIR दर्ज
ई-मेल के माध्यम से बेटे की गिरफ्तारी की जानकारी मिली
परिजनों के अनुसार, उसी शाम यश अपने कुछ विदेशी सहयोगियों के साथ शंघाई शहर के एक रेस्टोरेंट गया था। वहीं किसी स्थानीय व्यक्ति से उसका विवाद हो गया। विवाद किस कारण हुआ, इसकी जानकारी परिवार को आज तक नहीं मिल सकी है। इसी घटना के बाद चीनी पुलिस ने यश को हिरासत में ले लिया। सीमा सिंह ने बताया कि 3 मार्च 2026 को मुंबई स्थित कंपनी कार्यालय से ई-मेल के माध्यम से बेटे की गिरफ्तारी की सूचना मिली। तब से परिवार लगातार उसकी रिहाई के प्रयास में जुटा हुआ है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2025 के सितंबर में यश सिंह ने नई शिपिंग कंपनी एमएससी (MSC) ज्वाइन की थी, जहां वह अधिकारी के रूप में कार्यरत था। वह MSC Sheffield-II जहाज पर तैनात था। फरवरी 2026 में तकनीकी खराबी के कारण जहाज चीन के जियांग्सू बंदरगाह पर मरम्मत के लिए रुका था। इसके बाद हुई घटना के बाद से परिवार की उससे कोई बातचीत नहीं हो सकी है।
सीमा सिंह ने भावुक होकर कहा, 'हमारी सिर्फ इतनी ही मांग है कि सरकार या कंपनी किसी तरह हमारी बेटे से एक बार बात करा दे और उसे सुरक्षित भारत वापस लाने में मदद करें।'
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मेरा बेटा जिंदा है या नहीं
अपने दिए गए आवेदन में पीड़िता सीमा सिंह ने कहा, 'मेरा बेटा जिंदा है या नहीं और वह अभी किस हाल में है, इसकी भी जानकारी नहीं है। पिछले पांच महीने से उसकी आवाज तक नहीं सुनी है। बस एक बार उससे बात करा दीजिए।' यह कहते-कहते उनकी आंखें भर आती हैं।
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शंघाई की जेल में पांच महीने से बंद है बेटा
पीड़िता ने बताया कि उनका इकलौता बेटा यश सिंह (25 वर्ष) पिछले पांच महीने से चीन के शंघाई स्थित जियांग्सू डिटेंशन सेंटर में बंद है। पीड़िता मां का कहना है कि इस दौरान न तो बेटे की कोई तस्वीर मिली, न वीडियो कॉल हो सकी और न ही एक बार उससे बात हो पाई। उन्होंने मुजफ्फरपुर के डीएम कुमार गौरव और वरीय पुलिस अधीक्षक कांतेश कुमार मिश्र को ज्ञापन सौंपकर बेटे की सुरक्षित भारत वापसी के लिए हस्तक्षेप करने की मांग की है। सीमा सिंह ने बताया कि वह पहले ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, विदेश मंत्रालय, भारतीय काउंसलेट, डीजी शिपिंग समेत कई सरकारी संस्थानों को इस मामले से अवगत करा चुकी हैं। इसके अलावा जिले के सांसद एवं केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. राजभूषण चौधरी से भी उन्होंने मदद की अपील की है। लेकिन पांच महीने बीत जाने के बावजूद बेटे की रिहाई की दिशा में कोई ठोस परिणाम सामने नहीं आया है।
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पता नहीं मेरा बेटा किस हालत में है
सीमा सिंह ने कहा, 'पांच महीने में एक बार भी बेटे की आवाज नहीं सुन पाई हूं। यही मेरी सबसे बड़ी चिंता है। मुझे यह भी नहीं पता कि वह किस हालत में है। बताया जा रहा है कि वह बीमार और घायल है। उसका मोबाइल भी चीनी पुलिस ने जब्त कर लिया है। बेटे की आवाज सुने बिना अब जीना मुश्किल हो गया है। मैं तलाकशुदा महिला हूं और मेरा बेटा ही मेरा एकमात्र सहारा है।'
28 फरवरी को आखिरी बार हुई थी बात
सीमा सिंह के अनुसार, उनकी बेटे से आखिरी बार 28 फरवरी 2026 को बात हुई थी। उस समय यश सिंह ने बताया था कि उसका जहाज मरम्मत के लिए चीन के शंघाई स्थित जियांग्सू पोर्ट पर रुका हुआ है। उसी दिन उसे अपनी पुरानी कंपनी से कुछ बकाया भुगतान मिला था। उसने बताया था कि उसके साथ पाकिस्तान, बांग्लादेश और अन्य देशों के कई साथी काम करते हैं और सभी पार्टी की बात कर रहे हैं। यश ने कहा था कि शाम को वह सभी को पार्टी देगा। इसके बाद दोनों की बातचीत समाप्त हो गई।
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ई-मेल के माध्यम से बेटे की गिरफ्तारी की जानकारी मिली
परिजनों के अनुसार, उसी शाम यश अपने कुछ विदेशी सहयोगियों के साथ शंघाई शहर के एक रेस्टोरेंट गया था। वहीं किसी स्थानीय व्यक्ति से उसका विवाद हो गया। विवाद किस कारण हुआ, इसकी जानकारी परिवार को आज तक नहीं मिल सकी है। इसी घटना के बाद चीनी पुलिस ने यश को हिरासत में ले लिया। सीमा सिंह ने बताया कि 3 मार्च 2026 को मुंबई स्थित कंपनी कार्यालय से ई-मेल के माध्यम से बेटे की गिरफ्तारी की सूचना मिली। तब से परिवार लगातार उसकी रिहाई के प्रयास में जुटा हुआ है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2025 के सितंबर में यश सिंह ने नई शिपिंग कंपनी एमएससी (MSC) ज्वाइन की थी, जहां वह अधिकारी के रूप में कार्यरत था। वह MSC Sheffield-II जहाज पर तैनात था। फरवरी 2026 में तकनीकी खराबी के कारण जहाज चीन के जियांग्सू बंदरगाह पर मरम्मत के लिए रुका था। इसके बाद हुई घटना के बाद से परिवार की उससे कोई बातचीत नहीं हो सकी है।
सीमा सिंह ने भावुक होकर कहा, 'हमारी सिर्फ इतनी ही मांग है कि सरकार या कंपनी किसी तरह हमारी बेटे से एक बार बात करा दे और उसे सुरक्षित भारत वापस लाने में मदद करें।'