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Bihar: पटना हाईकोर्ट ने सरकार को दिया आदेश, नाबालिग को मिले 5 लाख का मुआवजा; पुलिस और मजिस्ट्रेट पर गंभीर आरोप

न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, पटना Published by: कृष्ण बल्लभ नारायण Updated Mon, 12 Jan 2026 10:24 PM IST
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सार

Bihar : बिहार के डीजीपी ने अपने पुलिस महकमा में स्पष्ट रूप से कहा कि अगर किसी वर्दीधारी पर गुंडई करने के आरोप साबित हुए तो न सिर्फ उनकी नौकरी जाएगी बल्कि वह 15 दिन के अंदर जेल भी जायेंगे। अब पटना उच्च न्यायालय ने सरकार को आदेश जारी किया है।

Bihar: High Court ordered bihar government provide five lakh rupee compensation minor madhepura bihar police
पटना हाई कोर्ट - फोटो : अमर उजाला डिजिटल
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विस्तार
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पटना उच्च न्यायालय ने आज बिहार पुलिस की लापरवाही और कानून के साथ खिलवाड़ करने पर कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने बिहार सरकार को निर्देश दिया है कि एक नाबालिग लड़के को, जिसे चोरी के झूठे आरोप में दो महीने से अधिक समय तक गैरकानूनी रूप से जेल में रखा गया, उसे 5 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाए। अदालत ने स्पष्ट रूप से कहा कि पुलिस और मजिस्ट्रेट की लापरवाही के कारण एक किशोर का जीवन और स्वतंत्रता का अधिकार छीना गया है।

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क्या था पूरा मामला?
 मामला मधेपुरा जिले के पुरैनी थाना क्षेत्र का है। पिछले साल 11 जुलाई को एक भूमि विवाद के दौरान पंचायत की बैठक में एक पक्ष ने दुसरे पक्ष पर मारपीट करने और गहनों की लूट करने का आरोप लगाया था। इस मामले में 16 वर्षीय किशोर सहित 14 लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई थी। प्राथमिकी दर्ज होने के बाद जांच के दौरान 14 में से 10 आरोपियों के खिलाफ कोई सबूत नहीं मिले थे। उन आरोपियों में नाबालिग भी शामिल था। लेकिन, सबूत न होने के बावजूद, कोशी रेंज के डीआईजी के निर्देश पर पुलिस ने आरोपों को सत्य मानते हुए गिरफ्तारियां शुरू कर दीं। इस मामले में अन्य आरोपियों सहित नाबालिग को भी 25 अक्टूबर को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया, जहां वह करीब ढाई महीने तक रहा।
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पुलिस और मजिस्ट्रेट की कार्यप्रणाली पर कोर्ट गंभीर 
न्यायमूर्ति राजीव रंजन प्रसाद और न्यायमूर्ति रितेश कुमार की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए घटना के जांच अधिकारी की कड़ी आलोचना की। कोर्ट ने कहा कि ठोस सबूत न होने के बावजूद आईओ ने नाबालिग को वयस्क बताकर गिरफ्तार किया। वहीं, निचली अदालत के मजिस्ट्रेट पर टिप्पणी करते हुए पीठ ने कहा कि उन्होंने भी बिना विवेक का इस्तेमाल किए याचिकाकर्ता को जेल भेजने का आदेश दे दिया।
 

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