Bihar News:पूर्णिया, सारण समेत पांच जिले यातायात प्रबंधन में सबसे आगे, जानिए, किन जिलों का प्रदर्शन खराब रहा?
बिहार सरकार सड़क दुर्घटना के आंकड़ों को वर्ष 2030 तक आधा करने के उदेश्य से ट्रैफिक प्रबंधन में बेहतरीन कार्य करने वाले टॉप-5 और खराब प्रदर्शन वाले 5 जिलों की सूची जारी की। जिलों की ट्रैफिक व्यवस्था को 10 अलग-अलग मानकों की कसौटी पर परखा गया। इसी आधार पर इनकी रैंकिंग तय की गई।
विस्तार
बिहार के 40 पुलिस जिलों में बेहतर यातायात प्रबंधन और सुचारू ट्रैफिक बहाल करने से संबंधित मानकों को लागू किया गया है। इससे संबंधित 10 मानक निर्धारित किए गए हैं। इन अलग-अलग मानकों में बेहतरीन प्रदर्शन करने वाले जिलों को उनके प्रदर्शन के हिसाब से अंक दिए जाते हैं। इस तरह से वर्ष 2025 में बेहतरीन प्रदर्शन करने वाले टॉप-5 जिलों का चयन किया गया है। इसमें पूर्णिया, सारण, लखीसराय, कटिहार और शेखपुरा शामिल हैं। वहीं खराब प्रदर्शन करने वाले 5 जिलों में सहरसा, मधुबनी, जहानाबाद, नालंदा और नवगछिया शामिल हैं। खराब प्रदर्शन करने वाले जिलों को सभी निर्धारित मानकों में अपनी स्थिति को बेहतर करने के निर्देश दिए गए हैं। सभी जिलों को बेहतर ट्रैफिक व्यवस्था लागू करने के लिए एक्शन प्लान तैयार करके लागू करने के लिए कहा गया है।
किस जिले को कितने अंक मिले?
यातायात पुलिस के अनुसार, सभी जिलों और शहरों में चोक प्वाइंट हटाना ट्रैफिक महकमा के समक्ष सबसे बड़ी चुनौती है। परंतु इसे हटाने में किसी जिले ने बहुत अधिक रूचि नहीं दिखाई है। इसलिए सभी जिलों को इस मानक के अंतर्गत 5 में शून्य अंक मिले हैं। इसके अलावा ट्रैफिक को लेकर आम लोगों के बीच संचार और जागरूकता फैलाने में भी जिलों की स्थिति बहुत अच्छी नहीं है। अधिकांश जिलों को शून्य या दशमलव में अंक मिले हैं। दो-तीन जिलों को एक या डेढ़ के आसपास अंक मिले हैं। सिर्फ एक जिला कटिहार को सबसे ज्यादा 2.4 अंक मिले हैं। मुजफ्फरपुर को 1.6, समस्तीपुर को 1.2, गया को 1 अंक मिले हैं। अन्य जिलों को 1 से कम या शून्य अंक मिले हैं। ट्रैफिक की इस व्यवस्था को लागू करने से पहले सभी जिलों में तैनात ट्रैफिक महकमा के पदाधिकारियों से लेकर सभी स्तर से पुलिस कर्मियों को समुचित ट्रेनिंग दी गई है। इसके लिए तैयार एक्शन प्लान से जुड़े सभी मानकों और इनके तथ्यों की जानकारी दी गई है। इस वजह से इस मद में सभी जिलों को 5 में 5 अंक मिले हैं। सड़क दुर्घटना में मृत्यु की दर को कम करने में कुछ जिलों का प्रदर्शन बेहतरीन रहा है, जिसमें पूर्णिया, सारण, लखीसराय, अररिया, खगड़िया, पूर्वी चंपारण, अरवल, खगड़िया समेत अन्य शामिल हैं।
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जानिए 10 मानकों के बारे में
बिहार में औसतन प्रतिवर्ष 11 हजार से अधिक सड़क दुर्घटनाएं होती हैं। इनमें 9 से साढ़े 9 हजार लोगों की मौत हो जाती है। इन आंकड़ों में प्रतिवर्ष कम से कम 10 फीसदी की कमी लाने के उदेश्य से राज्य के सभी जिलों में बेहतर ट्रैफिक प्रबंधन के लिए बिहार पुलिस की ओर से रैंकिंग की पहल की गई। इसके लिए 10 मानक बनाए गए हैं। ट्रैफिक नियमों और कायदों से जुड़े 10 मानकों पर परखते हुए उनका मूल्यांकन किया गया है और इसके आधार पर रैंकिंग की गई है। इन मानकों के लिए अलग-अलग अंक भी निर्धारित किए गए हैं। इस तरह कुल 100 में जितने अंक जिस जिले को मिले, उनकी रैंकिंग उसके आधार पर तय की गई। सड़क दुर्घटना में मृत्यु दर में 10 फीसदी की कमी, इस मानक के लिए 10 अंक रखे गए हैं। इसी तरह सड़क दुर्घटना के कांड़ों का वैज्ञानिक अनुसंधान और मुआवजा भुगतान में 15 अंक, यातायात बल में रिक्ति का भरा जाना (10 अंक), ट्रेनिंग के लिए 5 अंक, प्रभावी प्रवर्तन मद में 20 अंक, चोक प्वाइंट से निजात दिलाने के लिए 5 अंक, आई-रैड या ई-डीएआर में डाटा अपलोड करने में 5 अंक, आई-आरएडी या ई-डीएआर दुर्घटना आधारित डाटा अपलोड करने में 5 अंक, एफओ स्तर पर पूर्ण करने में 5 अंक तथा जन संचार और जागरूकता फैलाने के लिए 10 अंक निर्धारित किए गए हैं।
क्या कहा एडीजी सुधांशु कुमार ने?
यातायात के एडीजी सुधांशु कुमार ने कहा कि बेहतर प्रदर्शन करने वाले जिलों को प्रोत्साहित किया जा रहा है। पीछे रहने वाले जिलों को प्रदर्शन सुधारने के लिए लगातार प्रोत्साहित किया जा रहा है। जिलों को बेहतर करने की होड़ करने के लिए सड़क सुरक्षा, यातायात व्यवस्था एवं नियंत्रण को बेहतर करने पर खासतौर से फोकस करना होगा। इससे ट्रैफिक व्यवस्था को सुधारने में काफी मददगार साबित हो सकती है।
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