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BSEB Result: गरीबी के बीच उभरी प्रतिभा, साधारण परिवारों के बच्चों ने मैट्रिक में मचाई धूम, टॉप 10 में बनाई जगह
न्यूज डेस्क, अमर उजाला,नालंदा
Published by: Ashutosh Pratap Singh
Updated Sun, 29 Mar 2026 03:29 PM IST
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सार
नालंदा जिले के साधारण परिवारों के छात्रों ने बिहार मैट्रिक परीक्षा में शानदार प्रदर्शन कर राज्य की मेरिट लिस्ट में नाम बनाया। आनंद कुमार ने 482 अंक (96.4%) से नौवां स्थान हासिल किया, सत्य राज ने 481 अंक से दसवां स्थान, और दिव्या कुमारी ने 481 अंक (96.2%) से दसवां स्थान साझा किया।
नालंदा के होनहार छात्र-छात्राओं ने मैट्रिक परीक्षा में दिखाया दम
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
बिहार विद्यालय परीक्षा समिति द्वारा आयोजित मैट्रिक परीक्षा के परिणामों ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि प्रतिभा किसी सुख-सुविधा की मोहताज नहीं होती। नालंदा जिले के साधारण परिवारों से आने वाले विद्यार्थियों ने अपनी मेधा और मेहनत के दम पर राज्य की मेरिट लिस्ट में जगह बनाकर पूरे क्षेत्र का नाम रोशन किया है।
अंतिम अंक और टॉपर्स
इस सफलता की कहानी में सबसे ऊपर नाम आता है नगरनौसा हाई स्कूल रामपुर के छात्र आनंद कुमार का। आनंद ने 482 अंक (96.4 प्रतिशत) हासिल कर राज्य में नौवां स्थान प्राप्त किया है। मूल रूप से रहुई ब्लॉक के सुसंडी गांव के रहने वाले आनंद का परिवार फिलहाल बमपुर गांव में किराए के मकान में रहता है। उनके पिता रविकांत कुमार पंडित टाइल्स मिस्त्री हैं और मां सरिता देवी कपड़ों की सिलाई का काम करती हैं। आनंद ने आर्थिक चुनौतियों के बीच पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित रखा और अब उनका लक्ष्य इंजीनियर बनकर तकनीकी क्षेत्र में योगदान देना है। उन्होंने अपनी सफलता के लिए माता-पिता के साथ-साथ शिक्षक शिप्पू भैया और आलोक सर का आभार व्यक्त किया।
सत्य राज की उपलब्धि
इसी कड़ी में नाम आता है सत्य राज का, जिन्होंने 481 अंक प्राप्त कर सूबे में दसवां स्थान हासिल किया। सत्य राज के पिता दिलीप कुमार पेशे से दर्जी हैं और सिलाई मशीन के पहिए घुमाकर अपने परिवार का भरण-पोषण करते हैं। सत्य की इस उपलब्धि पर उनके घर और आसपास जश्न का माहौल है। लोग मिठाइयां बांटकर उन्हें बधाई दे रहे हैं। सत्य राज ने अपनी सफलता का श्रेय अपने पिता और शिक्षक सुबोध सर को दिया। भविष्य में वे आईएएस अधिकारी बनकर देश की सेवा करना चाहते हैं। अनुशासन और लगन के धनी सत्य ने बताया कि उन्होंने सोशल मीडिया से दूरी बनाकर रखी और केवल पढ़ाई के लिए गूगल और चैटजीपीटी जैसे डिजिटल माध्यमों का सहारा लिया।
ये भी पढ़ें: मैट्रिक 2026 में सिमुलतला की वापसी, पुष्पांजलि कुमारी बनीं स्टेट टॉपर
छात्राओं ने भी दिखाई ताकत
बेटियों ने भी इस गौरवमयी सूची में अपनी उपस्थिति मजबूती से दर्ज कराई है। हरनौत प्रखंड के प्रोजेक्ट गर्ल्स हाई स्कूल की छात्रा दिव्या कुमारी ने 481 अंक (96.2 प्रतिशत) प्राप्त कर राज्य में दसवां स्थान साझा किया। दिव्या की इस सफलता ने यह स्पष्ट कर दिया है कि ग्रामीण परिवेश की छात्राएं भी अवसर मिलने पर आसमान छू सकती हैं।
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इस सफलता की कहानी में सबसे ऊपर नाम आता है नगरनौसा हाई स्कूल रामपुर के छात्र आनंद कुमार का। आनंद ने 482 अंक (96.4 प्रतिशत) हासिल कर राज्य में नौवां स्थान प्राप्त किया है। मूल रूप से रहुई ब्लॉक के सुसंडी गांव के रहने वाले आनंद का परिवार फिलहाल बमपुर गांव में किराए के मकान में रहता है। उनके पिता रविकांत कुमार पंडित टाइल्स मिस्त्री हैं और मां सरिता देवी कपड़ों की सिलाई का काम करती हैं। आनंद ने आर्थिक चुनौतियों के बीच पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित रखा और अब उनका लक्ष्य इंजीनियर बनकर तकनीकी क्षेत्र में योगदान देना है। उन्होंने अपनी सफलता के लिए माता-पिता के साथ-साथ शिक्षक शिप्पू भैया और आलोक सर का आभार व्यक्त किया।
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सत्य राज की उपलब्धि
इसी कड़ी में नाम आता है सत्य राज का, जिन्होंने 481 अंक प्राप्त कर सूबे में दसवां स्थान हासिल किया। सत्य राज के पिता दिलीप कुमार पेशे से दर्जी हैं और सिलाई मशीन के पहिए घुमाकर अपने परिवार का भरण-पोषण करते हैं। सत्य की इस उपलब्धि पर उनके घर और आसपास जश्न का माहौल है। लोग मिठाइयां बांटकर उन्हें बधाई दे रहे हैं। सत्य राज ने अपनी सफलता का श्रेय अपने पिता और शिक्षक सुबोध सर को दिया। भविष्य में वे आईएएस अधिकारी बनकर देश की सेवा करना चाहते हैं। अनुशासन और लगन के धनी सत्य ने बताया कि उन्होंने सोशल मीडिया से दूरी बनाकर रखी और केवल पढ़ाई के लिए गूगल और चैटजीपीटी जैसे डिजिटल माध्यमों का सहारा लिया।
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छात्राओं ने भी दिखाई ताकत
बेटियों ने भी इस गौरवमयी सूची में अपनी उपस्थिति मजबूती से दर्ज कराई है। हरनौत प्रखंड के प्रोजेक्ट गर्ल्स हाई स्कूल की छात्रा दिव्या कुमारी ने 481 अंक (96.2 प्रतिशत) प्राप्त कर राज्य में दसवां स्थान साझा किया। दिव्या की इस सफलता ने यह स्पष्ट कर दिया है कि ग्रामीण परिवेश की छात्राएं भी अवसर मिलने पर आसमान छू सकती हैं।