Bihar Stampede: मंदिरों में नहीं जाएगी जान, धार्मिक न्यास बोर्ड अध्यक्ष ने बताई तैयारी; भगदड़ को लेकर क्या कहा
Bihar News : बिहार के नालंदा में भगदड़ में हुई मौतों के बाद अब धार्मिक न्यास बोर्ड बड़े बदलाव की तैयारी में है। हर मंदिर में। 'अमर उजाला' से खास बातचीत में न्यास बोर्ड के अध्यक्ष रणवीर नंदन ने भगदड़ की वजह और समाधान को लेकर जवाब दिए।
विस्तार
बिहार के नालंदा में मंगलवार को भगदड़ के दौरान आठ महिलाओं सहित नौ की मौत हो गई थी। इसके पहले, जहानाबाद में भी इसी तरह की भगदड़ में मौतें हुई थीं। नालंदा भगदड़ में प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया था कि पुलिस-प्रशासन की व्यवस्था दुरुस्त नहीं थी और मंदिर प्रबंधन के लोग पैसे लेकर एग्जिट गेट से एंट्री करवा रहे थे। ऐसे में धार्मिक न्यास बोर्ड का पक्ष आना जरूरी थी। बोर्ड अध्यक्ष रणवीर नंदन ने घटनास्थल के निरीक्षण के बाद 'अमर उजाला' से बातचीत में घटना के कारण से लेकर आगे के समाधान तक पर बात की।
अमर उजला: नालंदा के मघड़ा शीतला माता मंदिर की घटना को लेकर कई तरह की बातें हो रही हैं, आपका इस पर क्या कहना है?
- धार्मिक न्यास बोर्ड के अध्यक्ष: देखिए, जो भी नकारात्मक बातें हो रही हैं, वे पूरी तरह बेबुनियाद हैं। धार्मिक न्यास परिषद का मुख्य कार्य सनातन धर्म को जोड़ना है, न कि आलोचनाओं में उलझना। जहां तक मघड़ा की घटना का सवाल है, अध्यक्ष के नाते मैंने खुद वहां का दौरा किया। हमने अस्पताल जाकर पीड़ितों से मुलाकात की। यह एक अचानक आई प्राकृतिक आपदा जैसी स्थिति थी। सच तो यह है कि मघड़ा में आज तक इतनी बड़ी संख्या में श्रद्धालु कभी नहीं आए थे। देश और राज्य में बदले हुए धार्मिक माहौल के कारण मंदिरों में श्रद्धालुओं, खासकर युवाओं की संख्या तेजी से बढ़ी है। उन्होंने प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री द्वारा किए गए मंदिरों के जीर्णोद्धार कार्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि अब युवा पिकनिक मनाने के बजाय मंदिरों में दर्शन करने पहुंच रहे हैं। हालांकि, भीड़ बढ़ रही है, तो मंदिर प्रबंधन को पहले से योजना बनानी चाहिए कि 200, 500 या 1000 लोगों की भीड़ को कैसे नियंत्रित किया जाए।
अमर उजला: आपके अनुमान के अनुसार वहां कितनी भीड़ रही होगी? कहां चूक हुई?
- धार्मिक न्यास बोर्ड के अध्यक्ष: सटीक संख्या तो अभी नहीं बताई जा सकती, लेकिन यह मंदिर की क्षमता से कहीं अधिक थी। शीतला माता का मंदिर बहुत सिद्ध है और आज तक वहां कोई अप्रिय घटना नहीं हुई थी। अंतिम मंगलवार होने के कारण अचानक भीड़ बढ़ गई। किसी को कोई अनुमान नहीं था कि भीड़ इतनी बढ़ जायेगी। भीड़ बढ़ने से प्रबंधन में कुछ कमी रह गई। इस घटना में हुई चूक को नकारा नहीं जा सकता, लेकिन मेरा मानना है कि वहां की स्थानीय समिति को सुरक्षा, भोग-प्रसाद और दर्शन प्रबंधन के लिए अलग-अलग विभाग बनाने चाहिए थे। समिति को 8-10 विभाग बनाना चाहिए था। तालमेल की कमी के कारण अव्यवस्था फैली और यह दुखद घटना हुई। आयोजकों को अपनी प्रबंधन क्षमता दिखानी चाहिए थी।
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अमर उजला: भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों, इसके लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं?
- धार्मिक न्यास बोर्ड के अध्यक्ष: हमने मृतकों को श्रद्धांजलि दी है और उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की है। भविष्य के लिए हमने बैठक कर जरूरी निर्देश जारी किए हैं। हम विचार कर रहे हैं कि इस मंदिर को धार्मिक न्यास के अंतर्गत पंजीकृत कर एक सुव्यवस्थित कमेटी बनाई जाए। ऐसी कमेटी आयोजन से पहले ही बैठकर प्रबंधन की रूपरेखा तैयार कर लेती है। अब भविष्य में कैसे हम प्रबंधन बनाएं, उसके लिए हमने बैठक की, उसके लिए निर्देश किया। और हमने यह भी कहा की भविष्य में इस मंदिर को जो है धार्मिक न्यास के अंतर्गत पंजीकृत कर दिया जाए और एक अच्छी कमेटी बन जाए और सुचारू ढंग से वहां का प्रबंधन देखे।इस हादसे के बाद अब मंदिर के संचालन और प्रबंधन को बेहतर बनाने के लिए ठोस निर्णय लिए जाएंगे। अब स्थानीय लोगों और धार्मिक न्यास बोर्ड के सहयोग से ऐसा प्रबंध किया जाएगा, जिससे भविष्य में किसी भी श्रद्धालु को अपनी जान न गंवानी पड़े।
अमर उजला: श्रद्धालुओं का आरोप है कि पुलिसकर्मी वहां मौजूद नहीं थे और पूरी फोर्स राष्ट्रपति की सुरक्षा में लगी थी?
- धार्मिक न्यास बोर्ड के अध्यक्ष: आरोप लगाना आसान है, लेकिन हमारा ध्यान समाधान पर है। अगर किसी जगह अचानक क्षमता से दस गुना भीड़ आ जाए, तो व्यवस्था संभालना कठिन हो जाता है। पुलिस के आने तक हादसा हो सकता है। मान लीजिए हम गर्दनीबाग ठाकुरबाड़ी के अध्यक्ष हैं, तो वहां एकाएक यदि आज 10,000 भीड़ आ जाए तो हम भी तो हतप्रभ हो जाएंगे न। उस समय पुलिस को बुलाते-बुलाते कोई घटना हो जाएगी तो क्या करेंगे? मंदिर प्रबंधन को भी चाहिए कि वह समय रहते प्रशासन को लिखित सूचना दें। अक्सर लोग घटना होने के बाद कमियां निकालते हैं, लेकिन स्थानीय जागरूक नागरिकों को भी आयोजन से पहले सुरक्षा की मांग उठानी चाहिए।
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अमर उजला: क्या बिहार के सिद्ध मंदिरों में भी बाहर के राज्यों की तरह 'वीआईपी दर्शन' या रसीद की व्यवस्था लागू की जाएगी?
- धार्मिक न्यास बोर्ड के अध्यक्ष: हम समय-समय पर निर्देश जारी करते हैं, लेकिन यह आस्था का विषय है। हम कोई भी फैसला स्थानीय समिति और जनता की सहमति के बिना नहीं थोपना चाहते। अगर स्थानीय लोग मंदिर के विकास के लिए शुल्क लगाने पर सहमत होते हैं, तभी इसे लागू किया जाना चाहिए ताकि समाज में संतुलन बना रहे।
अमर उजला: सुरक्षा को लेकर आपका क्या आश्वासन है? क्या पुलिस बल की तैनाती बढ़ाई जाएगी?
- धार्मिक न्यास बोर्ड के अध्यक्ष: केवल पुलिस के भरोसे पूरा प्रबंधन नहीं छोड़ा जा सकता। इतने पुलिस बल पर हमारे पास नहीं हैं जो हर मंदिर में सुरक्षा दे पाए। हमने बड़े मंदिरों को निर्देश दिया है कि वे अपनी आर्थिक क्षमता के अनुसार निजी सुरक्षा गार्ड (प्राइवेट गार्ड) रखें। धार्मिक न्यास अब पहले से कहीं अधिक सक्रिय है। पहले ऐसी घटनाओं पर जिम्मेदारी तय नहीं होती थी, लेकिन अब हम खुद जमीन पर जाकर स्थिति देख रहे हैं क्योंकि हमारी जवाबदेही हमारी सक्रियता पर निर्भर करती है।
नालंदा के मघड़ा स्थित माता शीतला माता के मंदिर में मंगलवार सुबह को भारी भीड़ के बीच भगदड़ मच गई। अचानक मची इस भगदड़ में आठ महिला श्रद्धालुओं की मौत हो गई। वहीं एक पुरुष श्रद्धालु की मौत पटना में हुई। यह घटना पूरे देश में सुर्खियों में रही। घटना के बाद राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, मुख्ममंत्री ने शोक जताया। राज्य सरकार ने मरने वालों के परिजनों को आठ और केंद्र सरकार ने दो लाख् रुपये देने की घोषणा की। इतना ही नहीं बिहार डीजीपी विनय कुमार खुद मामले की जांच करने पहुंचे। नालंदा एसपी ने इस मामले में मंदिर के चार पुजारियों को गिरफ्तार किया। इसके अलावा दीपनगर थानेदार को निलंबित कर दिया। लापरवाही बरतने वाले मंदिर के प्रबंधन समिति के अध्यक्ष, सचिव और कोषाध्यक्ष समेत 20 लोगों के खिलाफ नामजद प्राथमिकी दर्ज कराई गई है।
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