बिहार में UCC लागू होगा! :नीतीश, मांझी, चिराग, कुशवाहा में कौन गृह मंत्री अमित शाह के साथ, कौन खिलाफ?
UCC Controversy : बिहार में सत्तारूढ़ एनडीए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के निर्णय पर चलते हुए राज्य में समान नागरिक संहिता को हरी झंडी दिखाएगा? शाह के बयान के बाद जिस तरह से एनडीए के घटक दलों का बयान आ रहा है, वह सवाल खड़ा कर रहा।
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इस तस्वीर में दिख रही जिंदादिली और इससे आ रहा मेल-मिलाप या अपनापन का संदेश आगे भी आता रहेगा? सवाल इसलिए है क्योंकि केंद्रीय गृह मंत्री के समान आचार संहिता (यूनिफॉर्म सिविल कोड- UCC) को लेकर की गई घोषणा के बाद बिहार में सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के दलों का अलग-अलग रुख सामने आ रहा है। केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी की पार्टी हिन्दुस्तानी आवाम मोर्चा (सेक्युलर) साथ देने के मूड में है तो उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी राष्ट्रीय लोक मोर्चा ने ड्राफ्ट देखने के बाद फैसले की बात कही है। चिराग पासवान ने भी ड्राफ्ट देखने पर ही बात रखने का एलान किया है। लेकिन, सबसे बड़ा और कड़ा रुख जनता दल यूनाईटेड का है। जदयू ने अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार के पुराने स्टैंड का हवाला देते हुए यूसीसी के खिलाफ बयान दिया है।
जदयू विधायक बोले- लागू नहीं होने देंगे
जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार, कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय कुमार झा या राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव रंजन प्रसाद का अब तक सीधा बयान नहीं आया है। जदयू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव रंजन ने सिर्फ इतना कहा है कि इसपर कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से बात करेंगे। लेकिन, जनता दल यूनाईटेड के विधायक और पूर्व मंत्री श्याम रजक ने साफ शब्दाें में एलान किया कि इसे बिहार में लागू नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि बिहार में एनडीए की सरकार है और जदयू के मुखिया नीतीश कुमार ने शुरुआत से ही यूसीसी का विरोध किया है। इसलिए, एनडीए सरकार में जदयू इसे लागू नहीं होने देगा।
चिराग पासवान को देखना है ड्राफ्ट, तब बोलेंगे
चिराग पासवान ने केंद्र की अपनी एनडीए सरकार और गृह मंत्री अमित शाह पर आंख बंद कर भरोसा नहीं है। एनडीए शासित 21 राज्यों में यूसीसी लागू करने के अमित शाह के बयान के बाद चिराग ने कहा कि वह ड्राफ्ट देखे बगैर कुछ नहीं कह सकते। चिराग ने कहा कि उनकी पार्टी लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) समानता और विविधता दोनों के प्रति प्रतिबद्ध है। प्रस्तावित यूसीसी का मसौदा पहले सार्वजनिक किया जाए, उसके सभी हितधारकों पर पड़ने वाले प्रभावों का आकलन किया जाए और व्यापक विमर्श के बाद ही पार्टी अपना अंतिम रुख स्पष्ट करेगी।
उपेंद्र कुशवाहा को पार्टी के अंदर विमर्श करना है
केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार में मंत्री रह चुके और इस समय राज्यसभा के सांसद उपेंद्र कुशवाहा को अपनी पार्टी राष्ट्रीय लोक मोर्चा के अंदर यूसीसी पर विचार-विमर्श करना है। उन्होंने अमित शाह के बयान के बाद कहा कि क्या प्रस्ताव आता है, वह देखकर ही निर्णय होगा। मतलब, वह सीधे तौर पर अमित शाह के फैसले पर मुहर लगाने के लिए तैयार नहीं हैं। उन्होंने कहा कि ड्राफ्ट आने के बाद वह पार्टी के अंदर उसपर विमर्श करेंगे, फिर निर्णय लेंगे।
मांझी की पार्टी का रुख साफ, हम शाह के साथ
केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी का रुख इसपर सामने नहीं आया है, लेकिन उनके बेटे, बिहार सरकार के मंत्री और हिन्दुस्तानी आवाम मोर्चा के अध्यक्ष डॉ. संतोष सुमन ने कहा है कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने यह बयान दिया है तो वह हितकारी ही होगा। उन्होंने कहा कि यूसीसी लागू करने में हर्ज तो नहीं दिखता है, बस घटक दलों से इसपर विमर्श कर लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि समान नागरिक संहिता देश के लिए दूरगामी तौर पर बेहतर ही होगा।
गिरिराज सिंह के बयान से तल्खी, बाकी मौन स्वीकृत
बिहार में यूसीसी लागू हो या नहीं, इसपर प्रदेश के पार्टी नेता चुप्पी साधे हैं। मौन स्वीकृति की बड़ी वजह यह है कि एनडीए के घटक दलों से तकरार न हो। चूंकि पार्टी के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष और देश के मौजूदा गृह मंत्री अमित शाह का बयान है तो इसपर सभी की स्वीकृति स्वाभाविक है। इस बीच, हंगामा केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह के रुख को लेकर है। एनडीए के घटक दलों के अलग-अलग सुर के बीच गिरिराज सिंह ने कहा कि कांग्रेस ने तुष्टीकरण की नीति के तहत इसे आजादी के समय लागू नहीं होने दिया। गिरिराज ने कहा कि यूसीसी को लागू होने से रोक कर कांग्रेस ने देश को गर्त में धकेल दिया। गिरिराज सिंह के इस बयान के बाद यूसीसी के खिलाफ बोलने वाले एनडीए के दल असहज महसूस कर रहे हैं। इसलिए, ड्राफ्ट देखने की बात पर जोर दिया जा रहा है।