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Patna News: राजगीर में बनेगा राज्य का पहला डायनासोर पार्क, 22 करोड़ की लागत से 6 महीने में होगा तैयार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, राजगीर
Published by: पटना ब्यूरो
Updated Wed, 11 Feb 2026 10:11 AM IST
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सार
राजगीर में राज्य का पहला डायनासोर पार्क नेचर सफारी परिसर में बनने जा रहा है, जिसकी टेंडर प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और अगले छह माह में इसे पर्यटकों के लिए खोलने का लक्ष्य तय किया गया है।
डायनासोर पार्क का प्रतीकात्मक फोटो
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विस्तार
ऐतिहासिक नगरी राजगीर में पर्यटन को नया आयाम देने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। बिहार का पहला डायनासोर पार्क जल्द ही साकार होने जा रहा है। प्रदेश सरकार ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना की टेंडर प्रक्रिया पूरी कर ली है और वन विभाग का लक्ष्य है कि अगले छह माह में यह अत्याधुनिक पार्क पर्यटकों के लिए तैयार हो जाए।
4.5 हैक्टेयर में फैलेगा मेसोजोइक युग का संसार
राजगीर नेचर सफारी परिसर में प्रस्तावित क्लिफ वॉक के समीप लगभग 4.5 हैक्टेयर क्षेत्र में बनने वाले इस पार्क पर करीब 22 करोड़ रुपये की लागत आएगी। यह केवल एक मनोरंजन स्थल नहीं, बल्कि आधुनिक तकनीक और विज्ञान का अनूठा संगम होगा। यहां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, एनिमेट्रोनिक्स और अत्याधुनिक सेंसर तकनीक के माध्यम से करोड़ों वर्ष पूर्व के मेसोजोइक युग का अनुभव कराया जाएगा।
जीवंत नजर आएंगे डायनासोर
जिला वन पदाधिकारी राजकुमार मनमोहन ने बताया कि पार्क में लगाए जाने वाले डायनासोर केवल स्थिर प्रतिमाएं नहीं होंगे। ब्रशलेस मोटर्स और संवेदनशील सेंसर की मदद से ये प्रतिकृतियां हरकत करेंगी, गर्दन घुमाएंगी, मुंह खोलेंगी और गर्जना भी करेंगी। हाई डेंसिटी स्पंज और सिलिकॉन रबर की कोटिंग से इनकी त्वचा वास्तविक जैसी प्रतीत होगी। पार्क का मुख्य आकर्षण 15 मीटर लंबा और 7 मीटर ऊंचा डिप्लोडोकस होगा। इसके अलावा 13 मीटर लंबा स्पिनोसॉरस और टायरानोसॉरस रेक्स (टी-रेक्स) भी यहां स्थापित किए जाएंगे।
ये भी पढ़ें: Bihar News : खगौल नगर परिषद के परिसीमन की प्रक्रिया तेज, 25 फरवरी को जारी होगा अंतिम गजट
छह विशेष जोन में बंटा होगा पार्क
प्रवेश द्वार को जुरासिक गेट के रूप में विकसित किया जाएगा। इसके बाद पर्यटक डायनासोर की हड्डियों जैसी संरचना वाली सुरंग से गुजरेंगे। पूरे पार्क को छह अलग-अलग विषयगत क्षेत्रों में विभाजित किया जाएगा, जिनमें टी-रेक्स जोन, विश्राम क्षेत्र, बच्चों का खेल क्षेत्र और डेंजर जोन शामिल हैं।
ज्वालामुखी से लेकर बोलते पेड़ तक
पार्क में 6 मीटर ऊंचा कृत्रिम ज्वालामुखी स्थापित किया जाएगा, जिससे धुआं और प्रकाश प्रभाव निकलेगा। बच्चों के लिए 4 मीटर ऊंचा ‘बोलने वाला पेड़’ भी लगाया जाएगा, जो अपनी हलचल और ध्वनि के माध्यम से संवाद करेगा।
बच्चों के लिए खास आकर्षण
छोटे आगंतुकों के लिए डिगिंग साइट बनाई जाएगी, जहां बच्चे रेत में छिपे डायनासोर के जीवाश्म खोजने का अनुभव ले सकेंगे। इसके अतिरिक्त डिनो राइडिंग की सुविधा भी होगी। पार्क में एक आधुनिक 3डी थिएटर स्थापित किया जाएगा, जहां डायनासोर के इतिहास और उनके विलुप्त होने की कहानी दिखाई जाएगी। साथ ही आकर्षक सेल्फी पॉइंट्स बनाए जाएंगे। पर्यटकों की सुविधा के लिए कैफेटेरिया और स्मारिका दुकान की व्यवस्था भी होगी।
इस परियोजना से राजगीर और आसपास के क्षेत्र में पर्यटन को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे और बिहार एक नए पर्यटन आकर्षण के रूप में उभरेगा।
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4.5 हैक्टेयर में फैलेगा मेसोजोइक युग का संसार
राजगीर नेचर सफारी परिसर में प्रस्तावित क्लिफ वॉक के समीप लगभग 4.5 हैक्टेयर क्षेत्र में बनने वाले इस पार्क पर करीब 22 करोड़ रुपये की लागत आएगी। यह केवल एक मनोरंजन स्थल नहीं, बल्कि आधुनिक तकनीक और विज्ञान का अनूठा संगम होगा। यहां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, एनिमेट्रोनिक्स और अत्याधुनिक सेंसर तकनीक के माध्यम से करोड़ों वर्ष पूर्व के मेसोजोइक युग का अनुभव कराया जाएगा।
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जीवंत नजर आएंगे डायनासोर
जिला वन पदाधिकारी राजकुमार मनमोहन ने बताया कि पार्क में लगाए जाने वाले डायनासोर केवल स्थिर प्रतिमाएं नहीं होंगे। ब्रशलेस मोटर्स और संवेदनशील सेंसर की मदद से ये प्रतिकृतियां हरकत करेंगी, गर्दन घुमाएंगी, मुंह खोलेंगी और गर्जना भी करेंगी। हाई डेंसिटी स्पंज और सिलिकॉन रबर की कोटिंग से इनकी त्वचा वास्तविक जैसी प्रतीत होगी। पार्क का मुख्य आकर्षण 15 मीटर लंबा और 7 मीटर ऊंचा डिप्लोडोकस होगा। इसके अलावा 13 मीटर लंबा स्पिनोसॉरस और टायरानोसॉरस रेक्स (टी-रेक्स) भी यहां स्थापित किए जाएंगे।
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छह विशेष जोन में बंटा होगा पार्क
प्रवेश द्वार को जुरासिक गेट के रूप में विकसित किया जाएगा। इसके बाद पर्यटक डायनासोर की हड्डियों जैसी संरचना वाली सुरंग से गुजरेंगे। पूरे पार्क को छह अलग-अलग विषयगत क्षेत्रों में विभाजित किया जाएगा, जिनमें टी-रेक्स जोन, विश्राम क्षेत्र, बच्चों का खेल क्षेत्र और डेंजर जोन शामिल हैं।
ज्वालामुखी से लेकर बोलते पेड़ तक
पार्क में 6 मीटर ऊंचा कृत्रिम ज्वालामुखी स्थापित किया जाएगा, जिससे धुआं और प्रकाश प्रभाव निकलेगा। बच्चों के लिए 4 मीटर ऊंचा ‘बोलने वाला पेड़’ भी लगाया जाएगा, जो अपनी हलचल और ध्वनि के माध्यम से संवाद करेगा।
बच्चों के लिए खास आकर्षण
छोटे आगंतुकों के लिए डिगिंग साइट बनाई जाएगी, जहां बच्चे रेत में छिपे डायनासोर के जीवाश्म खोजने का अनुभव ले सकेंगे। इसके अतिरिक्त डिनो राइडिंग की सुविधा भी होगी। पार्क में एक आधुनिक 3डी थिएटर स्थापित किया जाएगा, जहां डायनासोर के इतिहास और उनके विलुप्त होने की कहानी दिखाई जाएगी। साथ ही आकर्षक सेल्फी पॉइंट्स बनाए जाएंगे। पर्यटकों की सुविधा के लिए कैफेटेरिया और स्मारिका दुकान की व्यवस्था भी होगी।
इस परियोजना से राजगीर और आसपास के क्षेत्र में पर्यटन को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे और बिहार एक नए पर्यटन आकर्षण के रूप में उभरेगा।
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