{"_id":"68ef419d4118ab3d6804f70c","slug":"bihar-election-2025-yuvaon-ki-baat-gopalganj-political-mood-public-opinion-2025-10-15","type":"story","status":"publish","title_hn":"Satta Ka Sangram: सत्ता के संग्राम में युवाओं ने उठाया सवाल, कहा- रोजगार के बिना विकास अधूरा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Satta Ka Sangram: सत्ता के संग्राम में युवाओं ने उठाया सवाल, कहा- रोजगार के बिना विकास अधूरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गोपालगंज
Published by: आशुतोष प्रताप सिंह
Updated Wed, 15 Oct 2025 02:31 PM IST
विज्ञापन
सार
अमर उजाला का चुनावी रथ ‘सत्ता का संग्राम’ अब पहुंचा है बिहार के ऐतिहासिक जिले गोपालगंज में, जहां चुनावी जोश चरम पर है।
सत्ता का संग्राम
- फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन
विस्तार
बिहार की सियासत में हर दिन नया उबाल, हर गली में नई हलचल! ऐसे ही उबाल के बीच अमर उजाला का चुनावी रथ ‘सत्ता का संग्राम’ अब गोपालगंज की धरती पर पहुंच चुका है। यहां की गलियों, चाय की दुकानों और चौपालों में गूँज रही जनता की आवाज ही असली ताकत बनकर सामने आई है। आज, 15 अक्तूबर की सुबह, हमारी टीम ने सीवान के मतदाताओं से सीधे संवाद किया। चाय की प्याली के बीच आम लोगों ने खुलकर अपनी राय बताई, और दोपहर में युवाओं से मिलकर चुनावी मुद्दों और वोटिंग रुझानों की पड़ताल की गई। कौन है जिसकी ओर झुकी है जनता की नजर? उनकी उम्मीदें और सवाल क्या हैं? अमर उजाला के ‘सत्ता का संग्राम’ में हर राय, हर सवाल और हर उम्मीद बन रही है इस चुनावी कहानी का अहम हिस्सा, जो सीधे जनता के दिल से जुड़ी है।
स्थानीय निवासी आदर्श ने रोजगार के मुद्दे पर अपनी चिंता जताई। उन्होंने कहा, "नेता सिर्फ वादे करते हैं, लेकिन असली काम नहीं होता। जब तक यहां रोजगार नहीं मिलेगा, लोग बाहर नहीं रुकेंगे। बिना पलायन रुके, बिहार का विकास नहीं होगा। हमने बी.ए किया है, लेकिन अभी भी फोटोग्राफी जैसी अस्थायी नौकरी कर रहे हैं। अगर हमें नौकरी करनी है तो दिल्ली या महाराष्ट्र जाना पड़ेगा, और वहां कोई दिक्कत हुई तो हम पर हमला भी हो सकता है।"
शराबबंदी के मुद्दे पर अलोक ने कहा कि शराब बंद होने से पहले जिनके पास बाइक तक नहीं थी, आज वही लोग कार में घूम रहे हैं और अब शराब माफिया बन गए हैं। उन्होंने आगे कहा कि शराब बंद होने के बाद लोग अब सूखे नशे करने लगे हैं। पहले लोग शराब पीते थे और अगर पकड़े जाते तो जुर्माना देकर बच जाते थे।
Trending Videos
विज्ञापन
विज्ञापन
स्थानीय निवासी आदर्श ने रोजगार के मुद्दे पर अपनी चिंता जताई। उन्होंने कहा, "नेता सिर्फ वादे करते हैं, लेकिन असली काम नहीं होता। जब तक यहां रोजगार नहीं मिलेगा, लोग बाहर नहीं रुकेंगे। बिना पलायन रुके, बिहार का विकास नहीं होगा। हमने बी.ए किया है, लेकिन अभी भी फोटोग्राफी जैसी अस्थायी नौकरी कर रहे हैं। अगर हमें नौकरी करनी है तो दिल्ली या महाराष्ट्र जाना पड़ेगा, और वहां कोई दिक्कत हुई तो हम पर हमला भी हो सकता है।"
शराबबंदी के मुद्दे पर अलोक ने कहा कि शराब बंद होने से पहले जिनके पास बाइक तक नहीं थी, आज वही लोग कार में घूम रहे हैं और अब शराब माफिया बन गए हैं। उन्होंने आगे कहा कि शराब बंद होने के बाद लोग अब सूखे नशे करने लगे हैं। पहले लोग शराब पीते थे और अगर पकड़े जाते तो जुर्माना देकर बच जाते थे।