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Bihar: यूपी-बिहार और नेपाल को जोड़ने वाले पुल में बढ़ा खतरा, खंभों के बीच 12 इंच का गैप; आवाजाही प्रभावित

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गोपालगंज Published by: सारण ब्यूरो Updated Mon, 25 May 2026 12:51 PM IST
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सार

गोपालगंज-बेतिया को जोड़ने वाले जादोपुर-मंगलपुर महासेतु में गंभीर दरारें मिलने के बाद प्रशासन ने भारी वाहनों की आवाजाही रोक दी है। पुल के दो पायों के बीच 12 इंच का गैप मिला है। विशेषज्ञ टीम जांच और मरम्मत कार्य में जुटेगी।

BiharTraffic Disrupted on Key UP-Nepal Route After 12-Inch Gap Found Between Bridge Pillars
जादोपुर-मंगलपुर महासेतु - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार

गोपालगंज को पूर्वी चंपारण के बेतिया से जोड़ने वाले गंडक नदी पर बने जादोपुर-मंगलपुर महासेतु की स्थिति चिंताजनक हो गई है। पुल के स्पैन में लगातार बढ़ती दरारों और खंभों के बीच बढ़ते फासले ने प्रशासन और सरकार की चिंता बढ़ा दी है। हालात को देखते हुए एहतियातन पुल पर भारी वाहनों के परिचालन पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है।


पुल के पांच अलग-अलग हिस्सों में दरारें दिखाई दीं
जानकारी के मुताबिक, पहले केवल पाया संख्या-5 के पास दरार की सूचना सामने आई थी, लेकिन अब पुल के पांच अलग-अलग हिस्सों में गंभीर दरारें दिखाई दी हैं। गोपालगंज के जिलाधिकारी पवन कुमार सिन्हा ने बताया कि पाया संख्या-12 और 13 के बीच करीब 12 इंच का खतरनाक गैप मिला है। वहीं पाया संख्या-5 के आंशिक रूप से धंसने की भी बात सामने आई है।
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दरारें बढ़ने पर पुल की मरम्मत करना कठिन
डीएम ने कहा कि यदि दरारें और बढ़ती हैं, तो पुल की मरम्मत करना बेहद कठिन हो सकता है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए विशेषज्ञ इंजीनियरों की टीम को तकनीकी जांच और मरम्मत कार्य के लिए बुलाया गया है। प्रशासन के अनुसार, भागलपुर के विक्रमशिला पुल हादसे के बाद मुख्यमंत्री के निर्देश पर राज्य के सभी प्रमुख पुलों की सुरक्षा जांच कराई जा रही है। इसी जांच के दौरान जादोपुर-मंगलपुर महासेतु में यह बड़ी तकनीकी खामी सामने आई। रिपोर्ट मिलते ही जिला प्रशासन ने तुरंत बड़े वाहनों के परिचालन पर रोक लगा दी और पुल के दोनों ओर बैरिकेडिंग कर दी गई।
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तत्कालीन मुख्यमंत्री ने किया था पुल का उद्धाटन
यह महासेतु उत्तर प्रदेश के गोरखपुर, कुशीनगर, देवरिया, सीवान और गोपालगंज समेत नेपाल से जुड़े मार्गों के लिए महत्वपूर्ण लाइफलाइन माना जाता है। पुल पर प्रतिबंध लगने से व्यापार और आम लोगों की आवाजाही प्रभावित होने लगी है। करीब 550 करोड़ रुपये की लागत से बने इस पुल का उद्घाटन मार्च 2016 में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने किया था, लेकिन महज दस वर्षों के भीतर पुल में इस तरह की गंभीर दरारें सामने आने के बाद निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर सवाल उठने लगे हैं।

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गौरतलब है कि दो वर्ष पहले भी भारी बारिश और गंडक नदी में कटाव के कारण इस महासेतु की एप्रोच सड़क धंस गई थी। उस समय प्रशासन ने कटाव निरोधी कार्य कर स्थिति को संभाला था। अब मुख्य पुल के ढांचे में आई दरारों ने एक बार फिर इसकी सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
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