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Bihar: दुबई में उड़ते विमान की फोटो लेना पड़ा भारी, युवक को 10 साल की सजा; परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गोपालगंज
Published by: सारण ब्यूरो
Updated Fri, 15 May 2026 05:02 PM IST
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सार
Bihar News: दुबई में उड़ते विमान की फोटो लेना बिहार के गोपालगंज निवासी वसीम अकरम को भारी पड़ गया। दुबई कोर्ट ने उसे 10 साल की सजा सुनाई है। मजदूरी कर परिवार चलाने वाला युवक तीन महीने से लापता था। अब परिवार ने सरकार से मदद की गुहार लगाई है।
फोटो- वसीम अकरम
- फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच दुबई से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। बिहार के गोपालगंज जिले के एक युवक को दुबई में उड़ते हुए विमान की मोबाइल से तस्वीर लेना इतना महंगा पड़ गया कि वहां की अदालत ने उसे 10 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुना दी। फैसले की खबर मिलते ही युवक के परिवार में मातम जैसा माहौल बन गया है।
जानकारी के अनुसार, सजा पाने वाले युवक की पहचान गोपालगंज नगर थाना क्षेत्र के रफी इंद्रवां गांव निवासी अमिरूल मियां के पुत्र वसीम अकरम के रूप में हुई है। वसीम अकरम अपने परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने और घर का खर्च चलाने के लिए दुबई में मजदूरी करता था। परिवार वालों के मुताबिक, कुछ महीने पहले वह जुमे की नमाज पढ़कर लौट रहा था, तभी दुबई पुलिस ने उसे हिरासत में ले लिया। बाद में उसे रासल खेमा रम्स पुलिस स्टेशन रोड स्थित जेल में रखा गया।
तीन महीने से वसीम का कोई का संपर्क नहीं
परिजनों का कहना है कि गिरफ्तारी के बाद से करीब तीन महीने तक वसीम से उनका कोई संपर्क नहीं हो पाया। परिवार लगातार उसकी तलाश करता रहा, लेकिन कोई जानकारी नहीं मिल सकी। गुरुवार को अदालत द्वारा सजा सुनाए जाने के बाद ही उन्हें पूरे मामले की जानकारी मिली। 10 साल की सजा की खबर सुनते ही माता-पिता और पत्नी की हालत बिगड़ गई। वसीम की मां शायदा खातून और पत्नी सलमा खातून ने रोते हुए बताया कि वसीम बेहद सीधा-सादा युवक है। उसे यह जानकारी नहीं थी कि उड़ते विमान की तस्वीर लेना वहां कानून का उल्लंघन माना जा सकता है। उन्होंने कहा कि वसीम ने जानबूझकर कोई गलती नहीं की थी।
परिवार की आर्थिक स्थिति पहले से कमजोर
परिवार की आर्थिक स्थिति पहले से ही कमजोर है। घर में बूढ़े माता-पिता, पत्नी, एक बहन और दो छोटे बच्चे हैं, जिनकी पूरी जिम्मेदारी वसीम पर ही थी। अब उसके जेल जाने के बाद परिवार के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। परिजनों ने कहा कि घर चलाने तक के लिए पैसे नहीं बचे हैं। बेटे की रिहाई की उम्मीद लेकर परिवार गोपालगंज के जिलाधिकारी पवन कुमार सिन्हा के पास पहुंचा। डीएम ने मामले को गंभीर मानते हुए तुरंत संज्ञान लिया और पूरी रिपोर्ट बिहार सरकार के गृह विभाग को भेजने का निर्देश दिया। उन्होंने परिजनों को भरोसा दिलाया कि प्रशासन उनकी मदद के लिए हर संभव प्रयास करेगा।
ये भी पढ़ें- Bihar: नगर परिषद के जेई 1.45 लाख रुपये की रिश्वत लेते गिरफ्तार, निगरानी विभाग के छापे से मचा हड़कंप
दूसरे देश से जुड़ा है मामला
डीएम पवन कुमार सिन्हा ने कहा कि यह मामला दूसरे देश से जुड़ा हुआ है, इसलिए इसमें भारत सरकार और राजनयिक स्तर पर हस्तक्षेप के बाद ही आगे की प्रक्रिया संभव हो पाएगी। फिलहाल पीड़ित परिवार की मांग और पूरे मामले की रिपोर्ट गृह विभाग को भेजी जा रही है। इस घटना के बाद गांव और इलाके में भी चर्चा का माहौल है। लोग हैरानी जता रहे हैं कि एक तस्वीर खींचने की वजह से किसी को इतनी लंबी सजा हो सकती है। वहीं परिवार अब भारत सरकार और विदेश मंत्रालय से वसीम की सुरक्षित वतन वापसी की गुहार लगा रहा है।
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जानकारी के अनुसार, सजा पाने वाले युवक की पहचान गोपालगंज नगर थाना क्षेत्र के रफी इंद्रवां गांव निवासी अमिरूल मियां के पुत्र वसीम अकरम के रूप में हुई है। वसीम अकरम अपने परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने और घर का खर्च चलाने के लिए दुबई में मजदूरी करता था। परिवार वालों के मुताबिक, कुछ महीने पहले वह जुमे की नमाज पढ़कर लौट रहा था, तभी दुबई पुलिस ने उसे हिरासत में ले लिया। बाद में उसे रासल खेमा रम्स पुलिस स्टेशन रोड स्थित जेल में रखा गया।
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तीन महीने से वसीम का कोई का संपर्क नहीं
परिजनों का कहना है कि गिरफ्तारी के बाद से करीब तीन महीने तक वसीम से उनका कोई संपर्क नहीं हो पाया। परिवार लगातार उसकी तलाश करता रहा, लेकिन कोई जानकारी नहीं मिल सकी। गुरुवार को अदालत द्वारा सजा सुनाए जाने के बाद ही उन्हें पूरे मामले की जानकारी मिली। 10 साल की सजा की खबर सुनते ही माता-पिता और पत्नी की हालत बिगड़ गई। वसीम की मां शायदा खातून और पत्नी सलमा खातून ने रोते हुए बताया कि वसीम बेहद सीधा-सादा युवक है। उसे यह जानकारी नहीं थी कि उड़ते विमान की तस्वीर लेना वहां कानून का उल्लंघन माना जा सकता है। उन्होंने कहा कि वसीम ने जानबूझकर कोई गलती नहीं की थी।
परिवार की आर्थिक स्थिति पहले से कमजोर
परिवार की आर्थिक स्थिति पहले से ही कमजोर है। घर में बूढ़े माता-पिता, पत्नी, एक बहन और दो छोटे बच्चे हैं, जिनकी पूरी जिम्मेदारी वसीम पर ही थी। अब उसके जेल जाने के बाद परिवार के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। परिजनों ने कहा कि घर चलाने तक के लिए पैसे नहीं बचे हैं। बेटे की रिहाई की उम्मीद लेकर परिवार गोपालगंज के जिलाधिकारी पवन कुमार सिन्हा के पास पहुंचा। डीएम ने मामले को गंभीर मानते हुए तुरंत संज्ञान लिया और पूरी रिपोर्ट बिहार सरकार के गृह विभाग को भेजने का निर्देश दिया। उन्होंने परिजनों को भरोसा दिलाया कि प्रशासन उनकी मदद के लिए हर संभव प्रयास करेगा।
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दूसरे देश से जुड़ा है मामला
डीएम पवन कुमार सिन्हा ने कहा कि यह मामला दूसरे देश से जुड़ा हुआ है, इसलिए इसमें भारत सरकार और राजनयिक स्तर पर हस्तक्षेप के बाद ही आगे की प्रक्रिया संभव हो पाएगी। फिलहाल पीड़ित परिवार की मांग और पूरे मामले की रिपोर्ट गृह विभाग को भेजी जा रही है। इस घटना के बाद गांव और इलाके में भी चर्चा का माहौल है। लोग हैरानी जता रहे हैं कि एक तस्वीर खींचने की वजह से किसी को इतनी लंबी सजा हो सकती है। वहीं परिवार अब भारत सरकार और विदेश मंत्रालय से वसीम की सुरक्षित वतन वापसी की गुहार लगा रहा है।