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Bihar News: बिहार का चमकता सितारा! यशस्वी राजवर्धन ने UPSC में 11वीं रैंक से मचाई धूम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सारण
Published by: सारण ब्यूरो
Updated Fri, 06 Mar 2026 08:23 PM IST
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सार
बिहार के सारण जिले के दिघवारा प्रखंड स्थित मलखाचक गांव के यशस्वी राजवर्धन ने संघ लोक सेवा आयोग की सिविल सेवा परीक्षा में 11वां स्थान हासिल कर पूरे राज्य का नाम रोशन किया है।
यशस्वी राजवर्धन
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
जब भी देश की आजादी की बात होती है, तब सारण जिले के मलखाचक गांव का जिक्र जरूर होता है। लेकिन इस बार यह गांव एक नई उपलब्धि को लेकर चर्चा में है। दरअसल, यहां के होनहार युवक यशस्वी राजवर्धन ने संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की प्रतिष्ठित सिविल सेवा परीक्षा में 11वां स्थान हासिल कर न सिर्फ अपने गांव बल्कि पूरे जिले और राज्य का नाम रोशन कर दिया है। यूपीएससी का परिणाम शुक्रवार को घोषित होते ही उनके पैतृक गांव मलखाचक में खुशी की लहर दौड़ गई। गांव के लोगों ने इसे ऐतिहासिक उपलब्धि बताते हुए यशस्वी और उनके परिजनों को बधाई दी। उनके घर पर बधाई देने वालों का तांता लग गया और देर रात तक जश्न का माहौल बना रहा।
प्रतिष्ठित परिवार से ताल्लुक रखते हैं यशस्वी
25 वर्षीय यशस्वी राजवर्धन प्रसिद्ध चिकित्सक स्वर्गीय डॉ. आरपी सिंह के पौत्र हैं। उनके पिता रजनीश कुमार सिंह बिहार सरकार के सहकारिता विभाग में निबंधक के पद पर कार्यरत हैं, जबकि उनकी माता नीलिमा सिंह गृहिणी हैं। यशस्वी की इस शानदार सफलता से परिवार और पूरे क्षेत्र में गर्व और उत्साह का माहौल देखा जा रहा है।
डीपीएस पटना से पढ़ाई, फिर दिल्ली में की उच्च शिक्षा
यशस्वी राजवर्धन ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा पटना के दिल्ली पब्लिक स्कूल (डीपीएस) से प्राप्त की। यहां से दसवीं की परीक्षा पास करने के बाद वे आगे की पढ़ाई के लिए नई दिल्ली चले गए और मॉडर्न स्कूल से बारहवीं की शिक्षा पूरी की। इसके बाद उन्होंने दिल्ली कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग से कंप्यूटर साइंस में बीटेक की डिग्री हासिल की। उच्च शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने सिविल सेवा में जाने का लक्ष्य तय किया और पूरी लगन के साथ यूपीएससी की तैयारी में जुट गए।
दूसरे प्रयास में मिली शानदार सफलता
परिजनों के अनुसार यशस्वी राजवर्धन ने यह सफलता अपने दूसरे प्रयास में हासिल की है। पहले प्रयास में सफलता नहीं मिलने के बावजूद उन्होंने निराश होने के बजाय अपनी तैयारी को और मजबूत किया। योजनाबद्ध तरीके से पढ़ाई करते हुए उन्होंने लगातार कड़ी मेहनत की और दूसरे ही प्रयास में देशभर में 11वां स्थान प्राप्त कर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा दिया।
गांव के युवाओं के लिए बने प्रेरणा
यशस्वी की इस उपलब्धि को लेकर पूरे क्षेत्र में गर्व का माहौल है। ग्रामीणों का कहना है कि उनकी सफलता से गांव के युवाओं को नई प्रेरणा मिलेगी। मलखाचक गांव, जो स्वतंत्रता संग्राम की ऐतिहासिक भूमि के रूप में जाना जाता है, अब शिक्षा के क्षेत्र में भी अपनी नई पहचान बना रहा है।
जनप्रतिनिधियों और बुद्धिजीवियों ने दी बधाई
सोनपुर के विधायक विनय कुमार सिंह ने यशस्वी राजवर्धन को बधाई देते हुए कहा कि यूपीएससी जैसी कठिन परीक्षा में इतनी उत्कृष्ट रैंक हासिल करना गांव, जिला और राज्य के लिए बहुत बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि यशस्वी ने सारण जिले की प्रतिभा को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई है और उनकी यह सफलता आने वाली पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी।
इसके अलावा पूर्व प्राचार्य प्रद्युम्न कुमार सिंह, रामजंगल सिंह कॉलेज दिघवारा के सचिव अशोक कुमार सिंह, अनिल कुमार सिंह, संजय कुमार सिंह, प्रो. कन्हैया सिंह, रंगकर्मी महेश स्वर्णकार, प्रो. डॉ. सुरजीत सिंह सोनू, ब्रजकिशोर सिंह और दिलीप सिंह समेत कई प्रबुद्ध लोगों ने भी यशस्वी को बधाई दी और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
मेहनत और स्पष्ट लक्ष्य से मिली सफलता
यशस्वी राजवर्धन की इस सफलता ने यह साबित कर दिया है कि अगर लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत ईमानदारी से की जाए, तो किसी भी मुकाम को हासिल किया जा सकता है। उनकी उपलब्धि से न केवल सारण बल्कि पूरे बिहार के युवाओं में नई ऊर्जा और उत्साह का संचार हुआ है।
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प्रतिष्ठित परिवार से ताल्लुक रखते हैं यशस्वी
25 वर्षीय यशस्वी राजवर्धन प्रसिद्ध चिकित्सक स्वर्गीय डॉ. आरपी सिंह के पौत्र हैं। उनके पिता रजनीश कुमार सिंह बिहार सरकार के सहकारिता विभाग में निबंधक के पद पर कार्यरत हैं, जबकि उनकी माता नीलिमा सिंह गृहिणी हैं। यशस्वी की इस शानदार सफलता से परिवार और पूरे क्षेत्र में गर्व और उत्साह का माहौल देखा जा रहा है।
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डीपीएस पटना से पढ़ाई, फिर दिल्ली में की उच्च शिक्षा
यशस्वी राजवर्धन ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा पटना के दिल्ली पब्लिक स्कूल (डीपीएस) से प्राप्त की। यहां से दसवीं की परीक्षा पास करने के बाद वे आगे की पढ़ाई के लिए नई दिल्ली चले गए और मॉडर्न स्कूल से बारहवीं की शिक्षा पूरी की। इसके बाद उन्होंने दिल्ली कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग से कंप्यूटर साइंस में बीटेक की डिग्री हासिल की। उच्च शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने सिविल सेवा में जाने का लक्ष्य तय किया और पूरी लगन के साथ यूपीएससी की तैयारी में जुट गए।
दूसरे प्रयास में मिली शानदार सफलता
परिजनों के अनुसार यशस्वी राजवर्धन ने यह सफलता अपने दूसरे प्रयास में हासिल की है। पहले प्रयास में सफलता नहीं मिलने के बावजूद उन्होंने निराश होने के बजाय अपनी तैयारी को और मजबूत किया। योजनाबद्ध तरीके से पढ़ाई करते हुए उन्होंने लगातार कड़ी मेहनत की और दूसरे ही प्रयास में देशभर में 11वां स्थान प्राप्त कर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा दिया।
गांव के युवाओं के लिए बने प्रेरणा
यशस्वी की इस उपलब्धि को लेकर पूरे क्षेत्र में गर्व का माहौल है। ग्रामीणों का कहना है कि उनकी सफलता से गांव के युवाओं को नई प्रेरणा मिलेगी। मलखाचक गांव, जो स्वतंत्रता संग्राम की ऐतिहासिक भूमि के रूप में जाना जाता है, अब शिक्षा के क्षेत्र में भी अपनी नई पहचान बना रहा है।
जनप्रतिनिधियों और बुद्धिजीवियों ने दी बधाई
सोनपुर के विधायक विनय कुमार सिंह ने यशस्वी राजवर्धन को बधाई देते हुए कहा कि यूपीएससी जैसी कठिन परीक्षा में इतनी उत्कृष्ट रैंक हासिल करना गांव, जिला और राज्य के लिए बहुत बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि यशस्वी ने सारण जिले की प्रतिभा को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई है और उनकी यह सफलता आने वाली पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी।
इसके अलावा पूर्व प्राचार्य प्रद्युम्न कुमार सिंह, रामजंगल सिंह कॉलेज दिघवारा के सचिव अशोक कुमार सिंह, अनिल कुमार सिंह, संजय कुमार सिंह, प्रो. कन्हैया सिंह, रंगकर्मी महेश स्वर्णकार, प्रो. डॉ. सुरजीत सिंह सोनू, ब्रजकिशोर सिंह और दिलीप सिंह समेत कई प्रबुद्ध लोगों ने भी यशस्वी को बधाई दी और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
मेहनत और स्पष्ट लक्ष्य से मिली सफलता
यशस्वी राजवर्धन की इस सफलता ने यह साबित कर दिया है कि अगर लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत ईमानदारी से की जाए, तो किसी भी मुकाम को हासिल किया जा सकता है। उनकी उपलब्धि से न केवल सारण बल्कि पूरे बिहार के युवाओं में नई ऊर्जा और उत्साह का संचार हुआ है।