Bihar News: नगालैंड के राज्यपाल बने BJP के दिग्गज नंद किशोर यादव के बारे में जानिए, खास बातचीत में क्या बोले?
Nand Kishor Yadav: जेपी आंदोलन से निकले नंद किशोर यादव लंबे समय तक बिहार की राजनीति में सक्रिय थे। पार्षद से लेकर राज्यपाल तक सफर पूरा किया। रिकॉर्ड सात बार विधायक रहे। अब उन्हें राज्यपाल बनाया गया है। आइए उनके बारे में विस्तार से जानते हैं...
विस्तार
देश में कई राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के राजभवनों में बड़ा प्रशासनिक बदलाव किया गया। नौ राज्यों राज्यपाल और उपराज्यपाल की नियुक्ति की गई। इसमें सबसे अधिक जिस नाम की चर्चा बिहार में हो रही है, वह है नंद किशोर यादव। उन्हें नगालैंड का नया राज्यपाल नियुक्त किया गया तो सोशल मीडिया से राजनीतिक गलियारे तक उनके नाम की चर्चा होने लगी। भारतीय जनता पार्टी के सबसे अनुभवी नेताओं में से एक नंद किशोर यादव पार्षद, भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष, विधायक, मंत्री, नेता प्रतिपक्ष और विधानसभा अध्यक्ष रह चुके हैं। उनके बारे में जानेंगे लेकिन आइये उससे पहले जानते हैं 'अमर उजाला' से खास इंटरव्यू में उन्होंने क्या कहा?
'मैं आज भी संगठन का कार्यकर्ता हूं'
अमर उजाला से खास बातचीत में नगालैंड के राज्यपाल नंद किशोर ने कहा कि मैं आज भी संगठन का कार्यकर्ता हूं। अपनी जिम्मेदारियों का जीवन भर निर्वाह करता रहूंगा। अब आभार व्यक्त करता हूं भारत के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री का। उन्होंने जो जिम्मेदारी दी है, उसका पूरी निष्ठा और ईमानदारी के साथ उसका निर्वहन करूंगा। खासकर नगालैंड की जनता की सेवा करूंगा। नगालैंड की जिम्मेदारी कितनी चुनौतीपूर्ण है? इस सवाल पर उन्होंने कहा कि चुनौती तो हर काम है। चुनौती को अवसर में कैसे बदला जाता है? यह मैंने पीएम नरेंद्र मोदी से सीखा है। मेरे लिए यह बड़ा अवसर है। संवैधानिक दायरे में रहकर नगालैंड का विकास करना मेरी प्राथमिकता होगी।
1974 में जेपी आंदोलन में कूद पड़े
बिहार राजनीति में मजबूत जनाधार रखने वाले नंद किशोर यादव का जन्म पटना सिटी इलाके में 26 अगस्त 1953 को जमींदार परिवार में हुआ था। 1969 में वह राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ से जुड़े। इसके बाद 1970 में वह अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् से जुड़े। उस वक्त उन्होंने जनसंघ के कई वरिष्ठ नेताओं के साथ रहकर भारतीय राजनीति का ककहरा सीखा। 1974 में जेपी आंदोलन में कूद पड़े। इस दौरान स्नातक की पढ़ाई बीच में ही छोड़ दी। इसके बाद राजनीति में पूरी तरह सक्रिय हो गए। 1978 में वह पटना नगर निगम के पार्षद बने। बेहतरीन काम और मिलनसार व्यवहार के कारण चार साल बाद ही उन्हें उप महापौर बना दिया गया है।
भाजयुमो और भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष भी रहे
80 के दशक में ही नंद किशोर यादव भारतीय जनता युवा मोर्चा में पूरी तरह सक्रिय हो गए। उनके काम को देखते हुए शीर्ष नेतृत्व ने उन्हें भाजयुमो का प्रदेश अध्यक्ष 1990 में बना दिया। इसके बाद 1995 में भारतीय जनता पार्टी के महासचिव बने। इसी साल पटना पूर्व से विधानसभा चुनाव लड़े। चुनाव जीते। पार्टी में इतना कद काफी बढ़ चुका था। भारत रत्न पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी भी इनके काम की तारीफ किया करते थे। बेहतरीन काम को देखते हुए 1998 में भाजपा का प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया। 2005 में नीतीश कुमार के नेतृत्व में एनडीए की सरकार बनी तो नंद किशोर यादव को पथ निर्माण विभाग की जिम्मेदारी दी गई। बिहार की सड़क की दशा और दिशा को बेहतर बनाने का श्रेय इन्हें ही जाता है।
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लगातार सात बार विधायक रहे
2013 में जब सीएम नीतीश कुमार एनडीए से अलग हुए तो नंद किशोर यादव नेता प्रतिपक्ष बने और विपक्ष की आवाज बुलंद की। 2017 में फिर से एनडीए की सरकार बनी तो नंद किशोर पथ निर्माण विभाग के मंत्री बने। इसके बाद 2024 में इन्हें बिहार विधानसभा अध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई। विधानसभा को डिजिटल करने का श्रेय इन्हें ही जाता है। रिकॉर्ड लगातार सात बार विधायक रहे नंद किशोर यादव 2025 में चुनाव नहीं लड़े लेकिन पार्टी के लिए समर्पित रहे। विधानसभा चुनाव में भाजपा की जीत में अहम भूमिका निभाई।
राज्यपाल बनने में किसने क्या कहा?
उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि हमलोग सभी उन्हें नगालैंड के राज्यपाल के तौर पर नवीन जिम्मेदारी की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं देते। बिहार भाजपा अध्यक्ष संजय सरावगी ने मैं केंद्रीय नेतृत्व के प्रति आभार प्रकट करता हूं। नंद किशोर यादव को अपार प्रशासनिक अनुभव, संगठन का अनुभव है और उनको नागालैंड के राज्यपाल के पद पर नियुक्त किया गया है। उनको बहुत शुभकामनाएं। निश्चित रूप से वो नागालैंड की बेहतरी के लिए काम करेंगे।