सोवियत संघ के शासक जोसेफ स्टालिन को कभी कम्युनिस्टों का आदर्श माना जाता था। वो सोवियत संघ के बहुत बड़े हीरो थे, मगर क्या वो वाकई ऐसे थे? या फिर उन्हें आज नरसंहार करने वाले नेता के तौर पर याद किया जाए? उनकी जिंदगी पर नजर डालें, तो लगता है कि स्टालिन हीरो भी थे और विलेन भी।
लाखों लोगों को मरवाने वाला वो क्रूर तानाशाह, जिसने कभी बैंक में डाली थी डकैती
स्टालिन के नाम का मतलब होता है लौह पुरुष। स्टालिन ने जिस तरह की जिंदगी जी, उससे ये लगता है कि उन्होंने अपना नाम सार्थक किया। उन्होंने रूस को इतना ताकतवर बनाया कि उसने हिटलर की जर्मन सेना को दूसरे विश्व युद्ध में मात दी। वो करीब एक चौथाई सदी तक सोवियत संघ के सबसे बड़े नेता रहे। लेकिन ये भी कहा जाता है कि स्टालिन के राज में जुल्मो-सितम की भी इंतेहा हुई। उनकी नीतियों और फरमानों की वजह से कथित तौर पर दसियों लाख लोग मारे गए।
एक दौर में दुनिया के सबसे ताकतवर नेता रहे स्टालिन की जिंदगी एक मामूली से परिवार से शुरू हुई थी। स्टालिन की पैदाइश 18 दिसंबर 1879 में जॉर्जिया के गोरी में हुई थी। उनके बचपन का नाम था, जोसेफ विसारियोनोविच जुगाशविली। उस वक्त जॉर्जिया रूस के बादशाह जार के साम्राज्य का हिस्सा था। स्टालिन के पिता पेशे से एक मोची थे। मां कपड़े धोने का काम करती थी। सात बरस की उम्र में स्टालिन को चेचक की बीमारी हो गई, जिससे उनके चेहरे पर दाग पड़ गए। इस बीमारी की वजह से उनके बाएं हाथ में भी खराबी आ गई थी।
बचपन में स्टालिन बहुत कमजोर थे। दूसरे बच्चे उन्हें बहुत तंग किया करते थे। उनके पिता शराबी थे और अक्सर स्टालिन को पीटा करते थे। जब स्टालिन बड़े हो रहे थे, तो जॉर्जिया में जार के खिलाफ बगावत की चिंगारी सुलग रही थी। वो जॉर्जिया की लोककथाओं और रूस विरोधी विचारों से काफी प्रभावित हुए। स्टालिन की मां धार्मिक ख्यालात वाली थीं। उन्होंने 1895 में स्टालिन को पादरी बनने की पढ़ाई करने के लिए जॉर्जिया की राजधानी तिफ्लिस भेजा, लेकिन स्टालिन को धार्मिक किताबों में जरा भी दिलचस्पी नहीं थी। वो छुप-छुपकर कार्ल मार्क्स की किताबें पढ़ा करते थे। स्टालिन ने उन दिनों एक समाजवादी विचारधारा वाले संगठन की सदस्यता भी ले ली थी। ये संगठन रूस के बादशाह के खिलाफ लोगों को एकजुट करता था। मां की ख्वाहिश के खिलाफ जाकर स्टालिन ने पादरी बनने से साफ इनकार कर दिया। 1899 में उन्हें धार्मिक स्कूल से बाहर कर दिया गया।
बीसवीं सदी की शुरुआत में स्टालिन ने तिफ्लिस के मौसम विभाग में काम करना शुरू कर दिया था। इस दौरान वो लगातार रूसी साम्राज्य के खिलाफ बागी तेवर अपनाए हुए थे। स्टालिन अक्सर हड़ताल और विरोध प्रदर्शन आयोजित किया करते थे। जार की खुफिया पुलिस को स्टालिन की हरकतों का अंदाजा हो चुका था। मजबूरन उन्हें भूमिगत होना पड़ा। तब स्टालिन बोल्शेविक पार्टी में शामिल हो गए। 1905 में स्टालिन ने पहली बार रूसी साम्राज्य के खिलाफ गुरिल्ला युद्ध में हिस्सा लिया। रूस में बोल्शेविक क्रांति के अगुवा व्लादिमीर लेनिन से स्टालिन की पहली मुलाकात फिनलैंड में हुई थी। लेनिन उनकी प्रतिभा के कायल हो गए। 1907 में स्टालिन ने तिफ्लिस में एक बैंक में डकैती डालकर ढाई लाख रूबल चुरा लिए। ये रकम जार विरोधी आंदोलन में काम आई।