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Weird News: क्या ममी के श्राप से हुई थी 15 वैज्ञानिकों की मौत? राजा की मौत के 500 साल बाद खोला था का मकबरा

Thu, 30 Jul 2026 05:39 PM IST
धर्मेंद्र कुमार सिंह फीचर डेस्क, अमर उजाला
फीचर डेस्क, अमर उजाला Published by: धर्मेंद्र कुमार सिंह Updated Thu, 30 Jul 2026 05:39 PM IST
सार

Weird News: पोलैंड में राजा की मौत के 500 साल बाद वैज्ञानिकों ने शोध के लिए उनका मकबरा खोला था। सबसे हैरानी वाली बात यह है कि मकबरे के भीतर जाने वाले सभी वैज्ञानिकों की मौत हो गई। 

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Poland King Casimir Iv Jagiellon Archaeologists Death After Opened 500 Year Old Tomb Mummy Curse Myth
क्या ममी के श्राप से हुई थी 15 वैज्ञानिकों की मौत? - फोटो : Adobe Stock

विस्तार

Weird News: पुरातत्वविदों ने 50 साल पहले 1973 में पोलैंड के 15वीं सदी के सम्मानित राजा कैसिमिर IV जैगिलोन के मकबरे की खुदाई की थी। सरकार की तरफ से प्राचीन स्मारकों तक पहुंच बहुत सीमित रखी गई थी, लेकिन क्राको के आर्कबिशप कैरोल वोज्टिला (जो बाद में पोप जॉन पॉल II बने) ने एक शोध टीम को राजा के तहखाने में विशेष इजाजत दी थी। राजा कैसिमिर ने 1492 में अपनी मृत्यु तक राज किया था। किंग कैसिमिर की कब्र पर शोध करना जानलेवा साबित हुआ। मकबरा खोलने के कुछ ही दिनों तहखाने में गए 12 शोधकर्ताओं में से चार लोगों की मौत हो गई। कुछ ही हफ्तों में यह संख्या बढ़कर 10 हो गई और कुछ वर्षों में सभी 15 लोगों की मौत हो गई। यह सभी लोग मकबरे में गए थे या लैब में शव पर शोध कर रहे थे। लोगों ने इस ममी का श्राप की तरह देखने लगे। इसकी मिस्र में पहले से ही चर्चा हो रही थी। 

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ममी के श्राप की कहानी

पोलैंड से काफी पहले 1922 में किंग टुट का मकबरा खोला गया था, जिसके बाद से ममी के श्राप की कहानी शुरू हुई थी। मिस्र के फराओ के दफन कक्ष में अभियान के नेता लॉर्ड कार्नारवोन गए थे, जिसके पांच हफ्ते बाद उनकी मौत हो गई। इसके बाद कहा जाने लगा कि यह उस स्थान का श्राप है। कार्नारवोन की मौत की वजह संक्रमित मच्छर के काटने और निमोनिया के अजीब मेल को माना जाता है, लेकिन मेडिकल साइंस को इस पूरी तरह विश्वास नहीं है।
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सबसे प्रतिष्ठित साप्ताहिक चिकित्सा पत्रिकाओं में द लैंसेट में 2003 में अध्ययन में निष्कर्ष निकाला कि मकबरे से सीधे सांस के माध्यम से शरीर में गए फंगस एस्परगिलोसिस से जानलेवा संक्रमण हो सकता है। शोधकर्ताओं ने लक्षणी की समीक्षा करने के बाद यह निष्कर्ष निकाला था। 1922 वाली फंगस से अनजान पोलिश शोधकर्ताओं ने 1973 में वावेल रॉयल कैसल के चैपल में किंग कैसिमिर जैगिलोन के तहखाने में घुसने से पहले श्राप के बारे में मजाक किया था। हालांकि जब मौतें होने लगीं तो यह मजाक नहीं रहा।
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तहखानों की हवा और सतहों के लिए सैंपल

जर्नल ऑफ द एयर एंड वेस्ट मैनेजमेंट एसोसिएशन में 2015 में एक अध्ययन प्रकाशित हुआ था। इसके लिए पोलैंड के वावेल और अन्य जगहों पर कई तहखानों की हवा और सतहों के सैंपल इकट्ठा किए थे। अध्ययन के लेखकों ने कहा कि तहखाने के अंदर फंगस की संख्या काम के समय संपर्क में आने की अनुशंसित सीमा से अधिक है। तहखानों में काम करने वाले कर्मचारियों को खतरे के बारे में जानकारी होनी चाहिए। राजा की मृत्यु के बाद अंतिम संस्कार की प्रक्रियाओं के समय अपनाई गई प्रक्रियाएं जानलेवा फंगल बीजाणुओं के पनपने में बड़ी भूमिका निभाई। राजा कैसिमिर IV जैगिलोन का 1427में जन्म हुआ था  और वह 1440 में लिथुआनिया के पहले ग्रैंड ड्यूक बने। इसके बाद 1447 में पोलैंड के राजा बने। वह अपने दौर के महान राजाओं में शामिल थे। उनके शासनकाल में पूरे यूरोप में पोलैंड की हैसियत बढ़ गई थी।

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किंग कैसिमिर का साल 1492 में 65 साल की उम्र में निधन हो गया था। जब उनकी मौत हुई, तो उस समय बहुत ज्यादा गर्मी थी और उनके शव को कपड़े से ढककर लकड़ी के सामान्य ताबूत में दफना दिया, तब तक वह सड़ने लगा था। शोधकर्ताओं ने 500 साल बाद 13 अप्रैल 1973 को मकबरा खोला। उन्होंने देखा कि ताबूत सड़ गया था और फंगस पनप रही थी। इसके बाद मकबरे की जांच में खुलासा हुआ कि वहां फंगस का घना मिश्रण था, जिसमें एस्परगिलस, पेनिसिलियम रूब्रम और पेनिसिलियम रुगुलोसम शामिल थे। आम तौर पर इनकी वजह से बुखार और सूजन होता है, लेकिन मकबरे के भीतर सांस के माध्यम से शरीर में भीरा मात्रा में चले जाते हैं, जिससे फंगल कॉकटेल खतरनाक बन जाता है।

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