Viral: हादसे में खो दिए थे दोनों पैर, अब शख्स ने हाथों के सहारे की माउंट एवरेस्ट पर चढ़ाई
Viral Video: इन दिनों सोशल मीडिया पर एक जज्बे की कहानी लोगों का दिल जीत रही है, जो यह सिखाती है कि हिम्मत हो तो नामुमकिन भी मुमकिन बन सकता है। रूस के पर्वतारोही रुस्तम नाबिएव ने बिना पैरों के सिर्फ अपने हाथों के सहारे उन्होंने दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट पर पहुंचकर इतिहास रच दिया।
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Viral Video: जिंदगी हर किसी के साथ एक जैसा व्यवहार नहीं करती। किसी को मंजिल तक पहुंचने के लिए आसान रास्ते मिल जाते हैं, तो किसी को हर कदम पर मुश्किलों से जूझना पड़ता है। लेकिन असली फर्क इस बात से पड़ता है कि इंसान हालात के सामने घुटने टेकता है या फिर उनसे लड़कर अपनी कहानी खुद लिखता है। इन दिनों सोशल मीडिया पर एक ऐसे ही जज्बे की कहानी लोगों का दिल जीत रही है, जो यह सिखाती है कि हिम्मत हो तो नामुमकिन भी मुमकिन बन सकता है।
हम बात कर रहे हैं रूस के पर्वतारोही रुस्तम नाबिएव की, जिन्होंने अपनी अदम्य इच्छाशक्ति से दुनिया को चौंका दिया। बिना पैरों के, सिर्फ अपने हाथों के सहारे उन्होंने दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट पर पहुंचकर इतिहास रच दिया। उनका यह कारनामा इंटरनेट पर तेजी से वायरल हो रहा है और हर कोई उनकी हिम्मत को सलाम कर रहा है।
संघर्ष से सफलता की कहानी
रुस्तम की कहानी सिर्फ सफलता की नहीं, बल्कि दर्द और संघर्ष की भी है। साल 2015 में एक हादसे ने उनकी जिंदगी पूरी तरह बदल दी। जब वे एक इमारत में सो रहे थे, तभी अचानक वह ढह गई। इस भयानक हादसे में उन्होंने अपने दोनों पैर खो दिए। किसी भी इंसान के लिए यह पल जिंदगी को खत्म कर देने जैसा हो सकता था, लेकिन रुस्तम ने इसे अपनी नई शुरुआत बना लिया।
हादसे के बाद उन्होंने हार मानने के बजाय खुद को और मजबूत बनाने का फैसला किया। उन्होंने पहले अपने लक्ष्य को तय किया और फिर धीरे-धीरे उसकी ओर बढ़ना शुरू किया। शुरुआत छोटे पहाड़ों से की, फिर बड़े-बड़े पर्वतों को चुनौती दी। माउंट एल्ब्रस और माउंट मानस्लू जैसी ऊंचाइयों को पार करने के बाद उनका हौसला और भी बुलंद हो गया।
देखें वीडियो
🏔🇷🇺 Rustam Nabijev iz Rusije napravio je izuzetan poduhvat – prvi se u svetu popeo na Mont Everest samo na rukama
— Sputnik Србијa (@rs_sputnik) May 21, 2026
ℹ️ Nabijevu su 2015. godine amputirane obe noge nakon nesreće koja se dogodila kada se srušila kasarna a on skoro sedam sati proveo ispod ruševina.
🗨️„Posvećujem… pic.twitter.com/CeU6ZsyWcw
आखिरकार मई 2026 में, अपने 34वें जन्मदिन के मौके पर उन्होंने अपने सबसे बड़े सपने की ओर कदम बढ़ाया। बिना पैरों के, सिर्फ हाथों के दम पर उन्होंने माउंट एवरेस्ट की चढ़ाई शुरू की और उसे पूरा करके इतिहास के पन्नों में अपना नाम दर्ज करवा लिया। यह सिर्फ एक जीत नहीं, बल्कि उन सभी लोगों के लिए प्रेरणा है, जो जिंदगी की मुश्किलों से हार मानने लगते हैं।
रुस्तम नाबिएव की कहानी हमें एक ही बात सिखाती है, हालात चाहे कितने भी कठिन क्यों न हों, अगर इरादे मजबूत हों तो कोई भी सपना दूर नहीं होता। जैसा कि उन्होंने खुद कहा, “जब तक सांस है, तब तक संघर्ष जारी रखो।”
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