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आखिर अरुणाचल प्रदेश को अपना क्यों बताता है चीन? क्या है इतिहास

फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: सोनू शर्मा Updated Sat, 23 May 2020 02:11 PM IST
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Why China claims Arunachal Pradesh know the history of Tawang
अरुणाचल प्रदेश का तवांग शहर - फोटो : Social media

भारत और चीन के बीच सीमा विवाद सालों से चलता आ रहा है। भारत के ऐसे कई इलाके हैं, जिनपर चीन अपना दावा करता है। इन्ही में से एक है अरुणाचल प्रदेश, जो भारत का 24वां राज्य है और भौगोलिक दृष्टि से पूर्वोत्तर के राज्यों में यह सबसे बड़ा राज्य है। चीन कई सालों से इसके पीछे हाथ धोकर पड़ा है। असल में वो इसे अपना इलाका मानता है। चीन अरुणाचल प्रदेश को दक्षिणी तिब्बत बताता है। वैसे तो तिब्बत ने भी कई साल पहले खुद को स्वतंत्र राष्ट्र घोषित कर दिया था, लेकिन चीन इसको नहीं मानता और उसपर अपना अधिकार बताता है। आइए जानते हैं कि चीन आखिर अरुणाचल प्रदेश को अपना क्यों बताता है? इसके पीछे क्या इतिहास है? 

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Why China claims Arunachal Pradesh know the history of Tawang
तवांग शहर का प्रवेशद्वार - फोटो : Social media

शुरुआत में चीन अरुणाचल प्रदेश के उत्तरी हिस्से तवांग को लेकर दावा करता था। दरअसल, तवांग यहां का एक खूबसूरत शहर है, जो हिमालय की तराई में समुद्र तल से 3500 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। यही पर विशाल बौद्ध मंदिर भी है, जो 17वीं शताब्दी का बना हुआ है। यह तिब्बत के बौद्धों के लिए एक पवित्र स्थल है।  

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Why China claims Arunachal Pradesh know the history of Tawang
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay

कहते हैं कि प्राचीन काल में भारतीय शासकों और तिब्बती शासकों ने तिब्बत और और अरुणाचल प्रदेश के बीच कोई निश्चित सीमा का निर्धारण नहीं किया था। यहां तक कि साल 1912 तक तिब्बत और भारत के बीच कोई स्पष्ट सीमा रेखा नहीं खींची गई थी, क्योंकि इन इलाकों पर न ही मुगलों का अधिकार था और न ही अंग्रेजों का। इस वजह से सीमा को लेकर भारत और तिब्बत के लोग भी असमंजस की स्थिति में थे। 

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अरुणाचल प्रदेश का तवांग शहर - फोटो : Social media

सीमा रेखा के निर्धारण को लेकर 1914 में शिमला में तिब्बत, चीन और ब्रिटिश भारत के प्रतिनिधियों की बैठक हुई। उस समय ब्रिटिश शासकों ने तवांग और दक्षिणी हिस्से को भारत का हिस्सा माना, जिसे तिब्बत के प्रतिनिधियों ने भी स्वीकार किया, लेकिन चीन इसे मानने को तैयार नहीं था। इसलिए वो बैठक से निकल गया। बाद में इस पूरे इलाके को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता मिली और वो भारत और विश्व के नक्शे पर आ गया। 

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अरुणाचल प्रदेश का तवांग शहर - फोटो : Social media

वैसे तो चीन तिब्बत को भी स्वतंत्र राष्ट्र नहीं मानता है। ऐसे में तवांग पर उसके फैसले को भी वो नहीं मानता। वो हमेशा से यह चाहता रहा है कि तवांग उसके अधिकार में आ जाए जो कि तिब्बती बौद्धों के लिए एक पवित्र जगह है। 1962 में जब भारत और चीन के बीच युद्ध हुआ था, तब चीन ने तवांग पर कब्जा कर लिया था, लेकिन बाद में वह पीछे हट गया था। जिसके बाद भारत ने पूरे इलाके को अपने नियंत्रण में ले लिया था। पूरी दुनिया भले ही तवांग को भारत का हिस्सा मानती हो, लेकिन चीन आज भी इसे मानने को तैयार नहीं है।

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