सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Business ›   Bonus ›   russian-oil-to-return-to-market-but-at-higher-prices Brent Crude Russian Urals Energy Crisis

Russian Oil: बाजार में आएगा रूस का तेल पर चुकानी होगी ऊंची कीमत, जानें भारत के लिए इसके क्या मायने

बोनस डेस्क, नई दिल्ली। Published by: Devesh Tripathi Updated Wed, 20 May 2026 03:26 AM IST
विज्ञापन
सार

ईरान संकट शुरू होने के बाद रूसी तेल और ब्रेंट क्रूड के बीच कीमतों का अंतर अब काफी कम रह गया है। मंगलवार को रूसी उराल 101-102 डॉलर और ब्रेंट क्रूड 110 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था। युद्ध से पहले फरवरी में रूसी उराल 55 डॉलर और ब्रेंट क्रूड का भाव 70 डॉलर के आसपास था।

russian-oil-to-return-to-market-but-at-higher-prices Brent Crude Russian Urals Energy Crisis
रूसी तेल खरीद - फोटो : ANI
विज्ञापन

विस्तार

दुनियाभर में तेल की ऊंची कीमतों से निपटने के लिए अमेरिका ने रूसी तेल खरीदने की मंजूरी एक महीने और बढ़ा दी है। अमेरिका के वित्त विभाग के दस्तावेजों के मुताबिक, यह अनुमति उन रूसी पेट्रोलियम उत्पादों पर लागू होगी, जो इस समय जहाजों पर लादे जा चुके हैं। अमेरिका के इस कदम से भारत सहित अन्य देशों को समुद्र में फंसे रूसी तेल खरीदने की अनुमति मिलेगी, लेकिन इसके लिए ऊंची कीमत चुकानी होगी।
Trending Videos


सीबीएस न्यूज के मुताबिक, वर्तमान में दुनियाभर के समुद्रों में करीब 12.4 करोड़ बैरल रूसी तेल मौजूद है। रूसी तेल से आपूर्ति जरूर बढ़ेगी, लेकिन कीमतों पर ज्यादा फर्क नहीं पड़ेगा। समुद्रों में रूस का 12 करोड़ बैरल तेल मौजूद है, लेकिन यह तेल की महज एक दिन की वैश्विक मांग (10.4 करोड़ प्रतिदिन) से कम है।
विज्ञापन
विज्ञापन


डच बैंक आईएनजी में कमोडिटीज स्ट्रेटेजी के हेड वारेन पैटरसन ने कहा, अमेरिका के इस कदम से आपूर्ति में रुकावट की पूरी भरपाई नहीं होगी। तेल बाजार के लिए सिर्फ एक ही समाधान है...होर्मुज से आपूर्ति फिर से सुचारू रूप से शुरू हो। इस नए उपलब्ध रूसी तेल को खरीदने की सर्वाधिक  संभावना भारत और अन्य एशियाई देशों की है।
विज्ञापन


रूस को लाभ नहीं
अमेरिकी वित्त विभाग ने कहा, इस अल्पकालिक छूट से रूस को कोई वित्तीय लाभ नहीं होगा, क्योंकि वह अपनी ऊर्जा का अधिकांश राजस्व पॉइंट ऑफ एक्सट्रैक्शन (जहां से तेल निकलता है) पर लगने वाले टैक्स से प्राप्त करता है।

घट रहा रूसी उराल और ब्रेंट क्रूड में अंतर
ईरान संकट शुरू होने के बाद रूसी तेल और ब्रेंट क्रूड के बीच कीमतों का अंतर अब काफी कम रह गया है। मंगलवार को रूसी उराल 101-102 डॉलर और ब्रेंट क्रूड 110 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था। युद्ध से पहले फरवरी में रूसी उराल 55 डॉलर और ब्रेंट क्रूड का भाव 70 डॉलर के आसपास था।

रूसी तेल और ब्रेंट क्रूड के बीच अंतर अब सिर्फ 8 डॉलर का रह गया है, जो युद्ध से पहले 15 डॉलर प्रति बैरल का था। इस तरह देखा जाए, तो रूसी तेल बाजार में आएगा तो, लेकिन पहले की तरह सस्ता नहीं मिलेगा।

भारत के लिए मायने...अल्पकालिक जोखिम घटेगा
भारत को उम्मीद है कि जो अतिरिक्त रूसी तेल बाजार में उपलब्ध होगा, उसे खरीदा जा सकता है। इससे भारत और बाकी देशों को थोड़ी राहत मिल सकती है। इससे अल्पकालिक आपूर्ति का जोखिम कम होगा। रूस भारत के लिए सस्ते तेल का एक प्रमुख स्रोत बना हुआ है। यह छूट जब तक जारी रहेगी, तब तक रिफाइनरियां कम कानूनी जोखिमों के साथ मौजूदा व्यापार प्रवाह को बनाए रख सकेंगी।

भारत यह सुनिश्चित करने की कोशिश कर रहा है कि उसके पास जरूरतों के लिए पर्याप्त तेल हो। साथ ही, वह पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों से जुड़े नियमों का भी पालन कर रहा है। यह छूट भारत को उन प्रतिबंधों से सीधे टकराए बिना रूसी तेल खरीदना जारी रखने में मदद करेगी।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

एप में पढ़ें

Followed