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Union Budget 2026: क्रिप्टो से कमाई पर 30% टैक्स, लेकिन नुकसान का क्या? बजट से निवेशकों को राहत की उम्मीद

बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: रिया दुबे Updated Sat, 31 Jan 2026 02:12 PM IST
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सार

आगामी बजट से पहले क्रिप्टो निवेशक टैक्स में राहत की मांग कर रहे हैं। मौजूदा नियमों में क्रिप्टो से होने वाली कमाई पर 30% टैक्स देना पड़ता है, लेकिन नुकसान को समायोजित करने की अनुमति नहीं है। निवेशकों का कहना है कि जब मुनाफे पर टैक्स लिया जा रहा है, तो नुकसान को भी अन्य निवेशों की तरह मान्यता मिलनी चाहिए।

30% tax on crypto earnings, but what about losses? Graduates hope for relief from the budget
बजट 2026 - फोटो : Amar Ujala
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वर्चुअल डिजिटल एसेट्स (VDA) में निवेश करने वाले निवेशक टैक्स व्यवस्था में राहत की मांग कर रहे हैं, खासतौर पर नुकसान को समायोजित करने की अनुमति को लेकर, जबकि क्रिप्टोकरेंसी से होने वाली आय पर फिलहाल 30 फीसदी टैक्स लागू है। यह जानकारी रोहित गर्ग पार्टनर, शार्दुल अमरचंद मंगलदास एंड कंपनी, ने दी। 

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नुकसान में भी चुकाना पड़ता है टैक्स

गर्ग ने कहा कि मौजूदा व्यवस्था में अगर कोई निवेशक क्रिप्टोकरेंसी से मुनाफा कमाता है तो उस पर 30 फीसदी टैक्स देना होता है, लेकिन अगर नुकसान होता है तो उसे टैक्स में समायोजित करने की अनुमति नहीं है। उन्होंने कहा कि अगर सरकार मुनाफे पर टैक्स लगा रही है, तो निवेशकों को नुकसान का फायदा भी मिलना चाहिए, जैसा कि अन्य कैपिटल एसेट्स में होता है।

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वीडीए के प्रावधान क्या-क्या है?

उन्होंने बताया कि वीडीए से जुड़ा टैक्स आयकर अधिनियम, 1961 के तहत आता है और इसे नए आयकर कोड में भी आगे बढ़ाया गया है। वीडीए में बिटकॉइन समेत अन्य क्रिप्टो और स्टेबलकॉइन शामिल हैं। उनका कहना है कि यदि भारत इन पर टैक्स लगाना जारी रखना चाहता है, तो लाभ और हानि दोनों को मान्यता देना जरूरी है।

विदेशी निवेशकों की चिंता: टैक्स में अनिश्चितता

वीडीए के अलावा, गर्ग ने कहा कि विदेशी निवेशक समुदाय अंतरराष्ट्रीय कर व्यवस्था में स्पष्टता और निश्चितता चाहता है। उन्होंने बताया कि 1 अप्रैल 2026 से लागू होने वाले नए भारतीय आयकर अधिनियम के मद्देनजर विदेशी निवेशकों को पहले से नियमों की साफ तस्वीर चाहिए।


गर्ग के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट के कुछ हालिया टैक्स फैसलों ने विदेशी निवेशकों के भरोसे को झटका दिया है। उन्होंने कहा कि टैक्स दरों के साथ-साथ किसी लेन-देन पर टैक्स प्रशासन का रुख भी स्पष्ट होना चाहिए, क्योंकि कई मामलों में विवाद सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचने में वर्षों लग जाते हैं।

अपील और विवाद निपटारे पर जोर

टैक्स विवादों पर बोलते हुए गर्ग ने कहा कि भले ही अपील अब डिजिटल हो रही हैं, लेकिन पहले अपीलीय स्तर पर 5 लाख से ज्यादा अपीलें लंबित हैं, जिससे सरकार का राजस्व अटका हुआ है। उन्होंने बजट में तेजी से निपटारे के लिए प्रभावी रिड्रेसल मैकेनिज्म लाने और इनकम टैक्स सेटलमेंट कमीशन को फिर से शुरू करने की मांग की, जिसे पहले के बजट में हटा दिया गया था।

निवेश का मूड सकारात्मक, शर्त टैक्स स्पष्टता

गर्ग ने कहा कि वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव के बावजूद विदेशी निवेशक भारत में निवेश को लेकर सकारात्मक हैं। उन्होंने भारत-यूरोपीय संघ ट्रेड डील को अहम बताते हुए कहा कि निवेशक टैक्स लागत स्वीकार करने को तैयार हैं, बशर्ते कर नियम स्पष्ट और स्थिर हों तथा पहले से अनुमानित किए जा सकें।


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