8th Pay Commission: आठवें वेतन आयोग की ओर से कितनी सैलरी बढ़ाने की हो सिफारिश? कर्मचारियों के संगठन की यह मांग
आठवें वेतन आयोग के लिए केंद्रीय कर्मचारियों के संगठन एफएनपीओ ने ने 3.0 से 3.25 फिटमेंट फैक्टर और सैलरी में 5% सालाना इंक्रीमेंट का प्रस्ताव दिया है। 25 फरवरी 2026 को एनसीजेसीएम की बैठक में अंतिम मसौदा तैयार होगा। जानें सैलरी पर क्या होगा असर।
विस्तार
आठवें वेतन आयोग के गठन और सिफारिशों को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों के एक प्रमुख निकाय ने वेतन ढांचे में बड़े बदलाव की मांग की है। 'फेडरेशन ऑफ नेशनल पोस्टल ऑर्गनाइजेशन' (एफएनपीओ) ने आठवें वेतन आयोग के लिए अपनी सिफारिशों में डाक कर्मचारियों के लिए 3.0 से 3.25 तक के 'मल्टी-लेवल फिटमेंट फैक्टर' का प्रस्ताव रखा है। इसके साथ ही, संगठन ने वार्षिक वेतन वृद्धि को मौजूदा 3% से बढ़ाकर 5% करने की वकालत की है, ताकि कर्मचारियों की वेतन प्रगति सुनिश्चित की जा सके और ठहराव को कम किया जा सके।
फिटमेंट फैक्टर: हर स्तर के लिए अलग फॉर्मूला
एफएनपीओ ने 'नेशनल काउंसिल (ज्वाइंट कंसल्टेटिव मशीनरी- स्टाफ साइड)' को भेजे गए अपने प्रस्ताव में कहा है कि पिछले वेतन आयोगों में रेशनलाइजेशन फैक्टर को सभी स्तरों पर एक समान नहीं रखा गया था। इसलिए, इस बार कर्मचारियों के विभिन्न स्तरों के लिए अलग-अलग फिटमेंट फैक्टर की मांग की गई है। संगठन ने 'एक्रॉयड फॉर्मूला' के आधार पर ये सिफारिशें तैयार की हैं, जिसमें गणना के लिए चार परिवार के सदस्यों की इकाई को आधार बनाया गया है। प्रस्तावित फिटमेंट फैक्टर इस प्रकार हैं:
- फाउंडेशनल लेवल (लेवल 1 से 5): 3.00 का समान फैक्टर, ताकि निचले स्तर पर वास्तविक मजदूरी में हुई कमी की भरपाई की जा सके।
- मिडिल लेवल (लेवल 6 से 12): 3.05 से 3.10 का फैक्टर, जो उच्च कौशल आवश्यकताओं और पर्यवेक्षी जिम्मेदारियों से जुड़ा है।
- सीनियर एडमिनिस्ट्रेटिव लेवल (लेवल 13 से 15): नीति निर्माण और नेतृत्व को मान्यता देने के लिए मध्यम वृद्धि।
- एपेक्स लेवल (लेवल 16 और ऊपर): पदानुक्रम को बनाए रखने के लिए 3.20 से 3.25 तक का उच्च फैक्टर।
अपनी मांगों के पक्ष में एफएनपीओ ने क्या तर्क दिया है?
एफएनपीओ का तर्क है कि 3% की वार्षिक वृद्धि पर्याप्त नहीं है। संगठन ने इसे बढ़ाकर 5% करने का सुझाव दिया है। उनका कहना है कि इससे वित्तीय प्रगति सार्थक होगी और यह सरकारी वेतन ढांचे को अन्य संगठित क्षेत्रों के करीब लाएगा। यह विशेष रूप से ग्रुप सी और डी कर्मचारियों के लिए महत्वपूर्ण है, जहां पदोन्नति के अवसर कम होते हैं। इसके अलावा, संगठन ने सरकार से सातवें वेतन आयोग की मैट्रिक्स प्रणाली को बरकरार रखने का अनुरोध किया है, क्योंकि इससे वेतन निर्धारण में स्पष्टता आई है और विवाद कम हुए हैं।
न्यूनतम वेतन के लिए क्या है संगठन का प्रस्ताव?
एफएनपीओ की ओर से सुझाए गए ढांचे के अनुसार, यदि ये मांगें मानी जाती हैं, तो विभिन्न स्तरों पर न्यूनतम वेतन में बड़ा उछाल आएगा।
- लेवल 1 (एंट्री लेवल): मौजूदा 18,000 रुपये से बढ़कर 54,000 रुपये।
- लेवल 10 (ग्रुप A एंट्री): 56,100 रुपये से बढ़कर 1,74,000 रुपये।
- लेवल 18 (कैबिनेट सेक्रेटरी): 2,50,000 रुपये से बढ़कर 8,12,500 रुपये।
25 फरवरी को होनी है अहम बैठक
एफएनपीओ के महासचिव और एनसीजेसीएम (स्टाफ साइड) के सदस्य शिवाजी वासिरेड्डी ने बताया कि विभिन्न केंद्रीय कर्मचारी संगठनों से सिफारिशें एकत्र करने के बाद, एनसीजेसीएम 25 फरवरी 2026 को ड्राफ्ट कमेटी के सदस्यों के साथ बैठक करेगा। इस बैठक के बाद अंतिम सिफारिशों का मसौदा तैयार किया जाएगा और उसे 8वें वेतन आयोग की अध्यक्ष रंजना प्रकाश देसाई को भेजा जाएगा।
अब आगे क्या?
अगर वेतन आयोग एफएनपीओ की ये मांगें स्वीकार करती है, तो केंद्रीय कर्मचारियों, विशेषकर निचले और मध्यम स्तर के कर्मियों की सैलरी में बड़ा इजाफा होगा। 5% इंक्रीमेंट और 3.25 तक के फिटमेंट फैक्टर की मांग महंगाई और जीवन स्तर की लागत में वृद्धि को देखते हुए एक मजबूत रणनीतिक कदम है। अब सबकी निगाहें 25 फरवरी की बैठक पर टिकी हैं।