Budget 2026: 'पूंजी की दिक्कतों को दूर कर वित्तीय समावेशन बढ़े', जानें वित्तीय क्षेत्र बजट से क्या चाहिए
बजट 2026 से वित्तीय क्षेत्र को ऐसी नीतियों की उम्मीद है, जो पूंजी बाधाएं कम करें, क्रेडिट की गुणवत्ता सुधारें और वित्तीय समावेशन को मजबूत करें, ताकि सतत और संतुलित आर्थिक वृद्धि सुनिश्चित हो सके। आइए जानते हैं विशेषज्ञों की मांग।
विस्तार
केंद्रीय बजट 2026 के नजदीक आते ही वित्तीय क्षेत्र के हितधारकों ने सरकार से कई नीतिगत कदम उठाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि जो पूंजी की बाधाओं को कम करें, जिम्मेदार क्रेडिट विस्तार को बढ़ावा दें और वित्तीय समावेशन को गहराई दें। विशेषज्ञों का कहना है कि आगे की वृद्धि केवल वित्तीय सेवाओं की पहुंच बढ़ाने से नहीं, बल्कि क्रेडिट की गुणवत्ता, वित्तीय संस्थानों की स्थिरता और अंतिम छोर तक सेवाओं की प्रभावी डिलीवरी से तय होगी।
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बजट का फोकस बचत, क्रेडिट और भुगतान से जुड़े क्षेत्रों पर
- बीएलएस ई-सर्विसेज के सीओओ लोकनाथ पांडा ने कहा कि बजट का फोकस बचत, क्रेडिट और भुगतान से जुड़े समावेशी विकास को सहारा देने वाले वित्तीय इकोसिस्टम को मजबूत करने पर होना चाहिए।
- उन्होंने कहा कि खाता स्वामित्व और डिजिटल अपनाने में प्रगति के बावजूद, वित्तीय समावेशन का अगला चरण खातों की सक्रियता, वंचित वर्गों तक क्रेडिट प्रवाह और अंतिम छोर तक सेवाओं की बेहतर आपूर्ति पर निर्भर करेगा।
- इसके लिए टिकाऊ ऑपरेटिंग मॉडल, पर्याप्त लिक्विडिटी सपोर्ट और बैंकों व मध्यस्थों के लिए समन्वित प्रोत्साहन जरूरी हैं।
क्रेडिट विस्तार से आगे बढ़ने पर जोर
- गोदरेज कैपिटल के एमडी और सीईओ मनीष शाह ने कहा कि भारत में वित्तीय गहराई के अगले चरण में केवल क्रेडिट विस्तार से आगे बढ़कर उसकी गुणवत्ता, पहुंच और स्थिरता पर ध्यान देना होगा।
- उन्होंने कहा कि बजट 2026 घरेलू लिक्विडिटी को मजबूत करने और क्रेडिट गारंटी व सह-ऋण संरचनाओं जैसे जोखिम-साझेदारी ढांचों को सुदृढ़ कर अहम भूमिका निभा सकता है।
- साथ ही, दीर्घकालिक बचत को प्रोत्साहन और उच्च कर अनुपालन को मान्यता देने की जरूरत भी जताई।
बैंकिंग सेक्टर में सुधारों पर फोकस
- ग्रांट थॉर्नटन भारत के पार्टनर विवेक अय्यर ने कहा कि बैंकिंग सेक्टर में सुधारों का फोकस कंसोलिडेशन, नवाचार, तकनीक और निजी पूंजी पर रह सकता है। उन्होंने संकेत दिया कि छोटे वित्त बैंकों और शहरी सहकारी बैंकों में विलय-अधिग्रहण की प्रक्रिया आसान की जा सकती है, जबकि एआई और क्वांटम कंप्यूटिंग जैसी नई तकनीकों के उपयोग को बढ़ावा देने की घोषणाएं संभव हैं।
- निजी पूंजी के मोर्चे पर सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में एफडीआई सीमा बढ़ाने और विदेशी बैंकों के लिए कर सरलीकरण जैसे कदम उठाए जा सकते हैं।
पूंजी बाजार को देखते हुए ले फैसला
- एक्सिस सिक्योरिटीज के एमडी और सीईओ प्रणव हरिदासन ने कहा कि बाजार बजट 2026-27 से निरंतरता, विश्वसनीयता और बेहतर क्रियान्वयन की उम्मीद कर रहे हैं।
- उन्होंने कहा कि पूंजी बाजार के लिहाज से कर स्थिरता और नीतिगत निरंतरता, बड़े ऐलानों से ज्यादा महत्वपूर्ण है।
- वैश्विक निवेशकों के लिए भारत को संरचनात्मक विकास बाजार के रूप में बनाए रखने के लिए व्यावहारिक कर नीति और दीर्घकालिक बचत को समर्थन जरूरी होगा।
कुल मिलाकर, विशेषज्ञों का कहना है कि वित्तीय क्षेत्र को ऐसा बजट चाहिए जो सुर्खियों से आगे बढ़कर वित्तीय प्रणाली की बुनियाद को मजबूत करे, पूंजी और लिक्विडिटी की उपलब्धता बढ़ाए और जिम्मेदार क्रेडिट विस्तार को समर्थन दे।