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रिपोर्ट में दावा: 90 फीसदी कर्मियों को मिल रहे तरक्की के भरपूर अवसर, सिर्फ 64% लोग नौकरी से हैं खुश
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।
Published by: निर्मल कांत
Updated Wed, 21 Jan 2026 04:15 AM IST
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सार
भारतीय कर्मचारी अपनी काम करने की क्षमता को लेकर बेहद आत्मविश्वास में हैं, लेकिन इसके बावजूद नौकरी से संतुष्टि का स्तर अपेक्षाकृत कम बना हुआ है। मैनपावरग्रुप इंडिया की रिपोर्ट बताती है कि करियर ग्रोथ और एआई को अपनाने का भरोसा बढ़ा है, वहीं काम का दबाव कर्मचारियों को तनाव में रखे हुए है। पढ़िए रिपोर्ट-
सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला प्रिंट
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विस्तार
देश में 95 फीसदी कर्मचारी अपनी काम करने की क्षमता पर भरोसा करते हैं। लेकिन केवल 64 फीसदी ही नौकरी से संतुष्ट हैं। मैनपावरग्रुप इंडिया ने देश के 1,000 से ज्यादा कर्मचारियों से बातचीत पर आधारित रिपोर्ट में कहा, काम की दुनिया तेजी से बदल रही है। इस बदलाव के बीच कर्मचारियों का आत्मविश्वास, संतुष्टि और मानसिक स्थिति अलग-अलग स्तर पर नजर आ रही है।
भारतीय कर्मचारी अपनी क्षमता को लेकर सबसे ज्यादा आत्मविश्वास दिखाते हैं। 90 फीसदी कर्मचारियों को करियर में आगे बढ़ने के मौके मिल रहे हैं। 84 फीसदी को प्रमोशन की संभावना है। 90 फीसदी एआई के इस्तेमाल को लेकर भी आत्मविश्वास महसूस करते हैं। हालांकि, आज के काम में लोग जितना आत्मविश्वास महसूस कर रहे हैं, उतना ही भविष्य को लेकर असमंजस में हैं। आगे चलकर उनकी भूमिका क्या होगी, इसे लेकर चिंता है।
ये भी पढ़ें: CCI की बड़ी मंजूरी: टाटा स्टील को त्रिवेणी पैलेट्स से जुड़े सौदे के लिए हरी झंडी, जानें और क्या खास
आत्मविश्वास का असर नौकरी से संतुष्टि और कंपनी के प्रति वफादारी पर नहीं दिख रहा है। इसी वजह से सिर्फ 64 फीसदी ही नौकरी से खुश हैं। 53 फीसदी कर्मचारी रोजाना मध्यम से ज्यादा तनाव महसूस करते हैं। जब नौकरी से संतुष्टि 64 फीसदी को है, तब आधे से ज्यादा कर्मचारी रोज तनाव में रहते हैं। 75 फीसदी में काम का ज्यादा बोझ व लंबे काम के घंटे तनाव की वजह बन रहे हैं। कई कर्मचारी नौकरी छोड़ना नहीं चाहते, लेकिन साथ ही नए मौके भी तलाश रहे हैं।
जेन-जी महिलाओं में तनाव की स्थिति ज्यादा
ब्लू-कॉलर कर्मचारियों में सबसे कम मानसिक और शारीरिक संतुलन देखा गया, जो 68 फीसदी रहा। जेन-जी महिलाओं में ज्यादा तनाव की स्थिति यानी 64 फीसदी पाई गई। मिडिल मैनेजर्स (95 फीसदी) और व्हाइट-कॉलर व सीनियर मैनेजर्स (94 फीसदी) सबसे ज्यादा तनाव में रहता है।
ये भी पढ़ें: India-EU FTA: 'मदर ऑफ ऑल डील्स' की दहलीज पर भारत; 27 जनवरी को ऐतिहासिक समझौते के आसार, जानिए क्या फायदा होगा?
एनर्जी-यूटिलिटी में कमजोर स्थिति : 72 फीसदी के साथ एनर्जी और यूटिलिटी में कर्मियों की स्थिति सबसे कमजोर रही। हेल्थकेयर (52 फीसदी) और वित्त व रियल एस्टेट (50 फीसदी) में नौकरी को लेकर सुरक्षा की भावना सबसे कम। नौकरी खोजने का आत्मविश्वास आईटी (86 फीसदी) और औद्योगिक व मटेरियल क्षेत्र (85 फीसदी) में सबसे ज्यादा।
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भारतीय कर्मचारी अपनी क्षमता को लेकर सबसे ज्यादा आत्मविश्वास दिखाते हैं। 90 फीसदी कर्मचारियों को करियर में आगे बढ़ने के मौके मिल रहे हैं। 84 फीसदी को प्रमोशन की संभावना है। 90 फीसदी एआई के इस्तेमाल को लेकर भी आत्मविश्वास महसूस करते हैं। हालांकि, आज के काम में लोग जितना आत्मविश्वास महसूस कर रहे हैं, उतना ही भविष्य को लेकर असमंजस में हैं। आगे चलकर उनकी भूमिका क्या होगी, इसे लेकर चिंता है।
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जेन-जी महिलाओं में तनाव की स्थिति ज्यादा
ब्लू-कॉलर कर्मचारियों में सबसे कम मानसिक और शारीरिक संतुलन देखा गया, जो 68 फीसदी रहा। जेन-जी महिलाओं में ज्यादा तनाव की स्थिति यानी 64 फीसदी पाई गई। मिडिल मैनेजर्स (95 फीसदी) और व्हाइट-कॉलर व सीनियर मैनेजर्स (94 फीसदी) सबसे ज्यादा तनाव में रहता है।
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एनर्जी-यूटिलिटी में कमजोर स्थिति : 72 फीसदी के साथ एनर्जी और यूटिलिटी में कर्मियों की स्थिति सबसे कमजोर रही। हेल्थकेयर (52 फीसदी) और वित्त व रियल एस्टेट (50 फीसदी) में नौकरी को लेकर सुरक्षा की भावना सबसे कम। नौकरी खोजने का आत्मविश्वास आईटी (86 फीसदी) और औद्योगिक व मटेरियल क्षेत्र (85 फीसदी) में सबसे ज्यादा।
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