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Global Share Markets: ट्रंप की टैरिफ नीति से सहमे वैश्विक बाजार, वॉल स्ट्रीट में तीन महीने की सबसे बड़ी गिरावट

बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: रिया दुबे Updated Wed, 21 Jan 2026 09:58 AM IST
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सार

ट्रंप की यूरोप पर टैरिफ धमकी से वैश्विक बाजारों में तेज बिकवाली हुई और वॉल स्ट्रीट तीन महीनों की सबसे बड़ी गिरावट के साथ बंद हुआ। इसका असर भारत समेत एशियाई बाजारों पर भी पड़ा, जबकि सोना रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया और बाजार में अस्थिरता बढ़ गई। आइए विस्तार से जानते हैं। 

Trump's tariff policy shakes global markets, Wall Street suffers biggest drop in three months
शेयर बाजार - फोटो : Adobestock
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विस्तार
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की यूरोप पर नए टैरिफ लगाने की धमकी से मंगलवार को वैश्विक वित्तीय बाजारों में तेज बिकवाली देखने को मिली। वॉल स्ट्रीट में तीनों प्रमुख सूचकांक तीन महीनों के सबसे बड़े एकदिनी नुकसान के साथ बंद हुए, जिससे निवेशकों के बीच नई अस्थिरता की आशंका गहरा गई।

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एसएंडपी 500 में 143.15 अंकों यानी 2.06% की गिरावट आई और यह 6,796.86 पर बंद हुआ। नैस्डैक कंपोजिट 561.07 अंक या 2.39% टूटकर 22,954.32 पर आ गया, जबकि डॉव जोंस इंडस्ट्रियल एवरेज 870.74 अंक यानी 1.76% गिरकर 48,488.59 पर बंद हुआ। एसएंडपी 500 और नैस्डैक दोनों ही अपने 50-दिवसीय मूविंग एवरेज से नीचे फिसल गए।
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बिकवाली से सुरक्षित निवेश की मांग बढ़ी

बिकवाली का असर सिर्फ शेयर बाजार तक सीमित नहीं रहा। सुरक्षित निवेश की ओर रुख बढ़ने से सोना नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया, जबकि अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड में बिकवाली से बॉन्ड यील्ड ऊपर चली गई। बिटकॉइन, जो आमतौर पर बाजार तनाव के दौर में सहारा माना जाता है, 3% से ज्यादा टूट गया।

ट्रंप ने आठ यूरोपीय देशों पर टैरिफ लगाने की धमकी दी

यह अमेरिकी निवेशकों के लिए ट्रंप के सप्ताहांत बयानों पर पहली प्रतिक्रिया थी, क्योंकि सोमवार को मार्टिन लूथर किंग जूनियर डे के चलते बाजार बंद थे। ट्रंप ने घोषणा की थी कि 1 फरवरी से डेनमार्क, नॉर्वे, स्वीडन, फ्रांस, जर्मनी, नीदरलैंड्स, फिनलैंड और ब्रिटेन से आयातित वस्तुओं पर अतिरिक्त 10% शुल्क लगाया जाएगा, जो 1 जून से बढ़कर 25% हो जाएगा। यह शुल्क तब तक लागू रहेगा, जब तक अमेरिका ग्रीनलैंड खरीदने को लेकर कोई समझौता नहीं कर लेता। हालांकि, डेनमार्क और ग्रीनलैंड के नेताओं ने स्पष्ट किया है कि द्वीप बिक्री के लिए नहीं है।

लिबरेशन डे जैसी दिखी हलचल

टैरिफ से जुड़ी अनिश्चितता ने अप्रैल में देखी गई ‘लिबरेशन डे’ जैसी हलचल की याद दिला दी, जब अमेरिकी व्यापार कदमों ने एसएंडपी 500 को लगभग बेयर मार्केट की कगार पर पहुंचा दिया था। बाजार में डर का संकेत देने वाला सीबीओई वोलैटिलिटी इंडेक्स (VIX) बढ़कर 20.09 पर पहुंच गया, जो नवंबर के बाद का उच्चतम स्तर है। कारोबार भी तेज रहा और अमेरिकी एक्सचेंजों पर 20.6 अरब से ज्यादा शेयरों का लेनदेन हुआ।

भारतीय बाजार में मंगलवार को एक प्रतिशत से अधिक गिरावट

इसका असर भारत पर भी पड़ा। एनएसई और बीएसई दोनों ही 1% से ज्यादा टूटे, जिससे निवेशकों की संपत्ति में करीब 9.86 लाख करोड़ रुपये की गिरावट आई। निफ्टी 50, 1.38% गिरकर 25,232.5 पर बंद हुआ, जबकि सेंसेक्स 1,065.71 अंक यानी 1.28% टूटकर 82,180.47 पर आ गया। एशियाई बाजारों में भी बुधवार को लगातार तीसरे सत्र में कमजोरी देखने को मिली।

विशेषज्ञों ने क्या कहा?

हालांकि, विशेषज्ञों के बीच यह बहस जारी है कि यह गिरावट अस्थायी घबराहट है या लंबी अवधि के रुझान का संकेत। हैरिस फाइनेंशियल ग्रुप के मैनेजिंग पार्टनर जेमी कॉक्स ने कहा कि फिलहाल बाजार से बड़े पैमाने पर पूंजी निकलने के संकेत नहीं दिख रहे हैं। उनके अनुसार, बॉन्ड बाजारों में हो रहे घटनाक्रम ज्यादा चिंता का विषय हो सकते हैं।

इन सबके बीच अमेरिकी अर्थव्यवस्था के मजबूत संकेत बने हुए हैं। इस सप्ताह निवेशकों की नजर जीडीपी अपडेट, पीएमआई आंकड़ों, महंगाई से जुड़े पीसीई डेटा और प्रमुख कंपनियों के तिमाही नतीजों पर रहेगी, जो आगे की बाजार दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
 

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