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Budget: बजट से पहले स्टील उद्योग को लेकर एसोचैम का रोडमैप, कार्बन उत्सर्जन कम करने पर सरकार से मांगा सहयोग

बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: रिया दुबे Updated Thu, 08 Jan 2026 02:10 PM IST
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सार

केंद्रीय बजट से पहले एसोचैम ने स्टील सेक्टर को कम-कार्बन उत्पादन की ओर ले जाने के लिए नीतिगत समर्थन की मांग की है। संगठन ने हाइड्रोजन आधारित डीआरआई, ग्रीन फाइनेंस, वेस्ट-हीट रिकवरी, रिन्यूएबल पावर, स्क्रैप रीसाइक्लिंग और आर एंड डी को प्रोत्साहन देने पर जोर दिया।

Assocham's roadmap for the steel industry before the Union Budget, seeking government support on decarbonizati
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : Adobestock
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केंद्रीय बजट से पहले उद्योग संगठन एसोचैम ने स्टील उद्योग के डीकार्बोनाइजेशन को तेज करने के लिए सरकार से नीतिगत समर्थन की अपील की है। संगठन ने हाइड्रोजन आधारित डायरेक्ट रिड्यूस्ड आयरन (DRI) के लिए इंसेंटिव, रियायती ग्रीन फाइनेंस, वेस्ट-हीट रिकवरी सिस्टम और रिन्यूएबल कैप्टिव पावर प्लांट्स को बढ़ावा देने का सुझाव दिया है।

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1 फरवरी बजट होगा पेश

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी को संसद में वित्त वर्ष 2026-27 का केंद्रीय बजट पेश करने वाली हैं। इससे पहले जारी प्री-बजट सिफारिशों में एसोचैम ने कहा कि डीकार्बोनाइजेशन, जहां एक बड़ी चुनौती है, वहीं यह वैश्विक प्रतिस्पर्धा में भारत के लिए बड़ा अवसर भी बन सकता है।

स्क्रैप कलेक्शन और रीसाइक्लिंग को प्रोत्साहन देने पर जोर

संगठन ने स्क्रैप कलेक्शन और रीसाइक्लिंग को प्रोत्साहन देने पर भी जोर दिया है। एसोचैम के मुताबिक, घरेलू रीसाइक्लिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने और स्किलिंग बढ़ाने से आयात पर निर्भरता कम होगी।


हालांकि, संगठन ने स्टील सेक्टर की चुनौतियों की ओर भी ध्यान दिलाया। चीन के बाद दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा स्टील उत्पादक होने और 8 से 9 फीसदी की मजबूत ग्रोथ के बावजूद, सेक्टर को ऊंची इनपुट लागत, रुपये की कमजोरी और कोकिंग कोल के भारी आयात पर निर्भरता जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है, क्योंकि देश में इसके खनन योग्य भंडार बेहद सीमित हैं।

इसके अलावा, संगठन ने कहा कि लौह अयस्क का उत्पादन ठहरा हुआ है और नीलाम की गई कई खदानें अभी तक उत्पादन शुरू नहीं कर पाई हैं। बढ़ती घरेलू मांग और आयरन ओयर के निर्यात से आपूर्ति पर दबाव बढ़ रहा है, जिससे घरेलू स्टील मिलों की लागत बढ़ रही है।

एसोचैम का मानना है कि आने वाला केंद्रीय बजट भारत को स्टील और वैल्यू-एडेड उत्पादों के लिए वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने का अहम मौका है, खासकर मेक इन इंडिया पहल के तहत। इसके लिए संगठन ने लौह अयस्क के शोधन को बढ़ावा देने, जरूरी कच्चे माल पर आयात शुल्क हटाने और रॉयल्टी की गणना में दोहरे कर को खत्म करने की मांग की है।

साथ ही, स्टील रीसाइक्लिंग, एलॉय इनोवेशन और प्रकिया डिजिटलीकरण में अनुसंधान व विकास को प्रोत्साहन देने से उत्पादकता बढ़ेगी और विशेष इस्पात के आयात पर निर्भरता कम होगी।


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