सब्सक्राइब करें

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
Hindi News ›   Business ›   Business Diary ›   Bank Loan Write-Offs NPA, Ministry of Finance Pankaj Chaudhary Loan Recovery RBI

बैंकिंग सेक्टर का हाल: 11 साल में 9.75 लाख करोड़ रुपये के लोन राइट ऑफ किए, जानिए यह कर्ज माफी से कैसे अलग

बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Kumar Vivek Updated Mon, 16 Mar 2026 08:00 PM IST
विज्ञापन
सार

पिछले 11 वित्तीय वर्षों में बैंकों की ओर से 9.75 लाख करोड़ रुपये के ऋण बट्टा खाते में डाल दिए गए हैं। हालांकि इसका मतलब किसी ऋण को माफ करना नहीं है। बैंकों की रिकवरी प्रक्रिया कैसे काम करती है, पूरी रिपोर्ट यहां पढ़ें।

Bank Loan Write-Offs NPA, Ministry of Finance Pankaj Chaudhary Loan Recovery RBI
bank holiday - फोटो : Adobe Stock
विज्ञापन

विस्तार

भारतीय बैंकिंग प्रणाली में 'नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स' यानी एनपीए और लोन राइट-ऑफ की स्थिति पर सरकार ने संसद में महत्वपूर्ण आंकड़े साझा किए हैं। वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने लोकसभा में एक लिखित उत्तर में बताया कि पिछले 11 वित्तीय वर्षों में बैंकों ने कुल 9.75 लाख करोड़ रुपये के ऋण को बट्टे खाते में डाला है। हालांकि, आंकड़ों में यह भारी भरकम राशि कर्जदारों के लिए कोई राहत लेकर नहीं आई है, क्योंकि सरकार ने स्पष्ट किया है कि राइट-ऑफ का मतलब किसी भी तरह से देनदारियों की माफी नहीं है।

Trending Videos


कैसे बढ़ा और घटा राइट-ऑफ का ग्राफ
सोमवार को सदन में दी गई जानकारी के अनुसार, लोन राइट-ऑफ की गई राशि वित्त वर्ष 2020 (FY20) में अपने सर्वोच्च स्तर 1.59 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गई थी। वित्त वर्ष 2018-19 के दौरान भी राइट-ऑफ की राशि 1 लाख करोड़ रुपये के आंकड़े को पार कर 1.59 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गई थी। 
विज्ञापन
विज्ञापन

    
राहत की बात यह है कि इसके बाद से इस रुझान में लगातार गिरावट देखी जा रही है और मौजूदा वित्त वर्ष 2025 में यह आंकड़ा घटकर 47,568 करोड़ रुपये रह गया है। 
    
पिछले कुछ वर्षों के आधिकारिक आंकड़ों पर नजर डालें तो स्थिति इस प्रकार रही है:

  • वित्त वर्ष 2015 में बैंकों ने 31,723 करोड़ रुपये के लोन राइट-ऑफ किए।
  • वित्त वर्ष 2016 में यह आंकड़ा 40,416 करोड़ रुपये दर्ज किया गया।
  • वित्त वर्ष 2017 में 68,308 करोड़ रुपये बट्टे खाते में डाले गए।
  • वित्त वर्ष 2018 में यह राशि और बढ़कर 99,132 करोड़ रुपये हो गई थी।

क्या राइट-ऑफ का मतलब कर्जदारों को फायदा पहुंचाना है?
इस आम धारणा को पूरी तरह से खारिज करते हुए मंत्री ने स्पष्ट किया है कि राइट-ऑफ की प्रक्रिया से कर्जदारों की देनदारी खत्म नहीं होती है, और न ही इससे कर्जदार को कोई लाभ मिलता है। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के दिशानिर्देशों और संबंधित बैंकों के बोर्ड द्वारा अनुमोदित नीति के अनुसार, बैंक केवल उन एनपीए को बट्टे खाते में डालते हैं जिनके लिए चार साल पूरे होने पर शत-प्रतिशत प्रोविजनिंगकर दी गई हो। 


अब आगे क्या?
कर्ज को बट्टे खाते में डालने के बावजूद, कर्जदारों पर पुनर्भुगतान की जिम्मेदारी पहले की तरह ही लागू रहती है। राइट-ऑफ किए गए इन ऋणों की वसूली एक निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है। बैंक इन खातों में शुरू की गई अपनी रिकवरी की कार्रवाई लगातार जारी रखते हैं। वित्तीय संस्थान उनके पास उपलब्ध विभिन्न रिकवरी तंत्रों के तहत बकायेदारों के खिलाफ अपने प्रयास सक्रिय रूप से आगे बढ़ाते रहते हैं। इससे साफ है कि बहीखातों की सफाई के साथ-साथ बैंकों का जोर कर्ज वसूली पर लगातार बना हुआ है।

विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें कारोबार समाचार और Union Budget से जुड़ी ब्रेकिंग अपडेट। कारोबार जगत की अन्य खबरें जैसे पर्सनल फाइनेंस, लाइव प्रॉपर्टी न्यूज़, लेटेस्ट बैंकिंग बीमा इन हिंदी, ऑनलाइन मार्केट न्यूज़, लेटेस्ट कॉरपोरेट समाचार और बाज़ार आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

एप में पढ़ें

Followed